नई दिल्ली,
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ग्रैप-4 के प्रतिबंध ठीक से लागू नहीं हो पा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट ने जिस वकील को वायु प्रदूषण का हाल जानने की जिम्मेदारी सौंपी है, उसे धमकी दिए जाने का मामला सामने आया है. कोर्ट कमिश्नर का दावा है कि एक सीनियर अधिकारी के घर प्रदूषण से जुड़े नियमों का उल्लंघन हो रहा था. शिकायत करने पर उन्हें धमकी दी गई. कोर्ट कमिश्नर ने इस बात का जिक्र सुप्रीम कोर्ट में सब्मिट की गई रिपोर्ट में किया है.
दरअसल, दिल्ली में वायु प्रदूषण से हालात गंभीर हैं. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में GRAP-IV के प्रतिबंध लागू किए गए हैं. सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को फिर प्रदूषण को लेकर सुनवाई होगी और प्रतिबंध आगे बढ़ाए जाएंगे या नहीं, इस पर फैसला लिया जाएगा. इससे पहले 28 नवंबर को सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दिल्ली में GRAP-IV उपाय 2 दिसंबर तक लागू रहेंगे. इतना ही नहीं, कोर्ट ने ग्रैप के नियमों को सही से पालन नहीं करवाने पर दिल्ली सरकार को फटकार भी लगाई थी. कोर्ट ने ग्रैप के नियमों को सही तरीके से लागू करवाने के लिए 13 वकीलों की एक टीम भी बनाई है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त कोर्ट कमिश्नरों ने दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण के संबंध में जांच की है और अब कोर्ट में अपनी रिपोर्ट जमा कर दी है. ये रिपोर्ट आजतक के हाथ लगी है.
आपत्ति जताई तो धमकाया गया…
कोर्ट कमिश्नर और वकील मनन वर्मा ने दावा किया कि एक वरिष्ठ अधिकारी के घर पर नियमों का उल्लंघन किया जा रहा था. जब आपत्ति जताई गई तो उन्हें धमकाया गया था.
‘धमकी दी तो साइट से चला गया’
कोर्ट कमिश्नर और वकील मनन वर्मा ने रिपोर्ट में कहा, उन्होंने देखा कि BHEL के एक वरिष्ठ अधिकारी के घर पर निर्माण कार्य चल रहा है. इस बीच, एक व्यक्ति उस घर से बाहर आया और मुझे बताया कि वो एक बहुत वरिष्ठ अधिकारी के घर काम करवा रहा है. जब मैं उस घर की तस्वीरें लेने लगा तो उसने मेरे अधिकार पर सवाल उठाए और तस्वीरें लेने से रोकने की कोशिश की. उसने मुझे डराने-धमकाने की कोशिश की और मेरा आईडी कार्ड भी मांग लिया. इसके बावजूद वो धमकी भी देने लगा. ऐसे में बिना कुछ कहे, मैं तुरंत साइट से चला गया.
‘CAQM पर उठाए सवाल’
उन्होंने कहा कि सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस ने तुरंत कार्रवाई की. उन्होंने आगे दावा किया कि अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने के लिए CAQM की ओर से निष्क्रियता के कारण जमीन पर GRAP का बहुत कम या कोई कार्यान्वयन नहीं हुआ है.
