नई दिल्ली,
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में लेडी डॉक्टर की बलात्कार के बाद हत्या मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा को रोकने, अस्पतालों में डॉक्टरों और मेडिकल कर्मचारियों के लिए सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर सुझाव मांगे हैं. सभी सुझाव कोर्ट के द्वारा बनाई गई नेशनल टास्क फोर्स के साथ साझा किया जाएगा.
मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ ने कहा कि नेशनल टास्क फोर्स मंगलवार से 12 सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट दाखिल करेगा. सीजेआई ने कहा कि इस मामले की अगली सुनवाई 17 मार्च, 2025 से शुरू होने वाले सप्ताह में होगी. लेकिन ये भी कहा कि यदि बलात्कार और हत्या मामले की सुनवाई में देरी होती है, तो पहले सुनवाई की मांग की जा सकती है.
एनटीएफ ने नवंबर में दी गई अपनी रिपोर्ट में कहा था कि मेडिकल स्टाफ के खिलाफ अपराधों से निपटने के लिए अलग केंद्रीय कानून की आवश्यकता नहीं है. पैनल ने कहा कि राज्य के कानूनों में भारतीय न्याय संहिता, 2023 के तहत गंभीर अपराधों के अलावा दिन-प्रतिदिन होने वाले छोटे अपराधों से निपटने के लिए पर्याप्त प्रावधान हैं. 24 राज्यों ने पहले ही मेडिकल स्टाफ के लिए अलग कानून बनाए हैं.
सीजेआई ने कहा कि बहुत सारे सुझाव दिए गए हैं. सभी सिफारिशों को संक्षेप में प्रस्तुत करने की जरूरत है. इस पर एसजी तुषार मेहता ने सुझाव दिया किएक स्वतंत्र मॉनिटरिंग कमेटी गठित की जानी चाहिए, ताकि वो एनटीएफ की शिफारिशें लागू कराने के लिए पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दे सके. सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की स्टेट्स रिपोर्ट को रिकॉर्ड पर ले लिया है.
सीबीआई ने अपनी स्टेट्स रिपोर्ट मे कहा है कि 43 गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं. एक महीने में ट्रायल खत्म होने की संभावना है. इस मामले में कुल 52 गवाह हैं. कोर्ट ने कहा कि इस मामले को लेकर सभी सिफारिशें और सुझाव नेशनल टास्क फोर्स को भेजे जाएं. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को एनटीएफ की रिपोर्ट पर अपने जवाब दाखिल करने दिया जाए. 17 मार्च 2025 को अगली सुनवाई होगी
