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यूपी : रिक्शा चलाकर जिसके हाथों में पड़े छाले, उसे सरकारी विभाग ने भेजा इतने लाख वसूली का नोटिस, परिवार की नींद हराम

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श्रावस्ती ,

यूपी के श्रावस्ती जिले के शिक्षा विभाग ने एक रिक्शा चालक को फर्जी शिक्षक बताकर उसके घर 51 लाख से अधिक की रिकवरी का नोटिस भेज दिया. अब रिक्शा चालक नोटिस को लेकर दर-दर भटक रहा है. पूरा परिवार परेशान है. हालांकि, शिक्षा विभाग का कहना है कि नोटिस को निरस्त कर दिया गया है. जांच की जा रही है.

उधर, पीड़ित ने रोते हुए आपबीती बयां की है. उसने कहा कि रिक्शा खींचकर मेरे हाथों में छाले पड़ गए हैं. पढ़ा-लिखा नहीं हूं. परिवार बेहद गरीब है. ऐसे में 51 लाख का नोटिस आने से हम सब मुश्किल में पड़ गए हैं. अधिकारियों से मदद की गुहार लगाई है.

मिली जानकारी के मुताबिक, श्रावस्ती के बेसिक शिक्षा विभाग के द्वारा बीते शुक्रवार को भिनगा क्षेत्र के गोड़पुरवा निवासी मनोहर यादव को डाक से एक नोटिस भेजा गया. नोटिस को पढ़ाने के लिए मनोहर गांव के साक्षर व्यक्ति के पास गए. जिसके बाद उन्हें 51 लाख से अधिक रिकवरी के नोटिस की जानकारी हुई. नोटिस की बात जानकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई.

दरअसल, भेजे गए नोटिस में यह दावा किया गया था कि अंबेडकर नगर जिले के सुरेंद्र प्रताप सिंह के नाम पते पर रिक्शा चालक मनोहर यादव उच्च प्राथमिक विद्यालय नव्वा पुरवा में सहायक शिक्षक के पद पर फर्जी तरीके से नियुक्त थे. उनके द्वारा 14 जुलाई 2020 तक 51 लाख 63 हजार रुपये वेतन के रूप में लिया गया है. जिसे उन्हें हफ्ते भर में सरकारी कोषागार में जमा कराना होगा, अन्यथा वसूली की कार्रवाई की जाएगी.

पीड़ित मनोहर यादव का पूरा परिवार भिनगा क्षेत्र के गोड़ पुरवा में रहता है. परिवार काफी गरीब है. वहीं, मनोहर दिल्ली में रहकर हाथ रिक्शा चलाता है. रिक्शा चलाने के कारण उसके हाथों पर निशान पड़ गए हैं. बकौल मनोहर यादव- मैं पढ़ा लिखा नहीं हूं. जिस विद्यालय में फर्जी शिक्षक बन तैनाती की बात की जा रही वहां तैनात रहे फर्जी शिक्षक के फोटो से उसका फोटो तक मेल नहीं खा रहा है.

फिलहाल, विभाग शिक्षा विभाग द्वारा नोटिस को वापस लेते हुए एक लेटर जारी किया गया है. इसमें विभाग ने बताया है कि बर्खास्त फर्जी शिक्षक सुरेंद्र प्रताप सिंह को वेतन के रूप में भुगतान किया गया था. उस भुगतान की वसूली के लिए मनोहर यादव निवासी गोड़पुरवा भिनगा श्रावस्ती को नोटिस भेज दिया गया था. फर्जी शिक्षक सुरेंद्र प्रताप का असली नाम देवमणि है जो कि अंबेडकर नगर का ही निवासी है. ऐसे में मनोहर यादव को भेजा गया नोटिस निरस्त किया जाता है.

वहीं, उसी विद्यालय के वर्तमान शिक्षक जनार्दन यादव ने बताया की मैं 2020 के बाद यहां आया हूं. फर्जी शिक्षक के बारे में मुझे कोई जानकारी नहीं है. शिक्षक ने बताया कि मैं जब से आया हूं, यहां अकेला हूं. मीडिया के माध्यम से मुझे फर्जी शिक्षक की भी जानकारी हुई. इसके आगे का नहीं पता.

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