पटना
BPSC अभ्यर्थियों का समर्थन करते हुए बिहार के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अगर सरकार और आयोग मांग नहीं मानते हैं, तो वे BPSC दफ्तर के बाहर धरना देंगे। गर्दनीबाग धरना स्थल पर पप्पू यादव अभ्यर्थियों से मिले। अभ्यर्थियों की मुख्य मांग BPSC परीक्षा का पुनः आयोजन है। उनका कहना है कि जब तक आयोग अपना फैसला नहीं बदलता, तब तक उनका शिक्षा सत्याग्रह जारी रहेगा। अभ्यर्थी चाहते हैं कि नेता राजनीति न करें और फैसला उनके हित में लिया जाए।
‘सिर्फ एक मांग री-एग्जाम’
912 केंद्रों पर हुई बीपीएससी परीक्षा को रद्द करने की मांग की जा रही है। वे ये भी चाहते हैं कि उनकी बात मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तक पहुंचे। अभ्यर्थियों ने कहा, ‘सिर्फ एक मांग री-एग्जाम।’ उन्होंने आगे कहा, ‘सरकार और आयोग को झुकना ही पड़ेगा। जब तक आयोग अपना फैसला नहीं बदलेगा, हम सभी अभ्यर्थी शिक्षा सत्याग्रह पर बैठे रहेंगे।’ पप्पू यादव ने अभ्यर्थियों की मांगों का समर्थन किया।
‘पदाधिकारी के बच्चे को मुर्गा-भात…’
निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने कहा, ‘मेरा सवाल यह है कि जहां-जहां एग्जाम हुआ उसका सीसीटीवी फुटेज आप सामने लाइए। बच्चों का कहना है कि मात्र 50-60 अभ्यर्थियों को क्वेश्चन पेपर दिया गया। उसके बाद किसी को क्वेश्चन पेपर नहीं मिला। खगड़िया में पदाधिकारी के बच्चे को मुर्गा-भात खिलाकर के एग्जाम दिलाया गया। गया में लाउड स्पीकर के द्वारा क्वेश्चन शॉर्ट-आउट काराया गया।’
कोचिंग का पेपर एग्जाम में आया?
आगे उन्होंने कहा, ‘ये वही क्वेश्चन है, जो नॉर्मल तरीके से किसी भी कोचिंग के द्वारा सजेस्ट किया गया। वहीं, क्वेश्चन एग्जामिनेशन में भी रख दिए। इसके लिए सिर्फ बीपीएससी दोषी नहीं है। बीपीएससी को सरकार कंडक्ट करती है।’
पेपर लीक का एपिक सेंटर नालंदा क्यों?
पप्पू यादव यहीं नहीं रुके, उन्होंने सीएम नीतीश के गृह जिले नालंदा को भी लपेटे में लिया। उन्होंने कहा, ‘एक तो सबसे बड़ा सवाल ये है कि नालंदा ही एक शहर ऐसा क्यों है जो नब्बे (1990) के पहले से लेकर के आज तक एक शहर से लगभग सभी एग्जामिनेशन के पेपर लिक-आउट होते रहते हैं। बड़े और छोटे स्केल पर, अब यदि आप कहते हैं कि नॉर्मलाइजेशन जैसे विचार मेरे मन में नहीं थे, जबकि आप (बीपीएससी) जो एग्जाम लिए उसमें क्वेश्चन दो प्रकार के थे।’
