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राजस्थान: धुर विरोधियों के बीच गजब मुस्कान, क्या खिचड़ी पक रही? हरीश चौधरी -रवींद्र सिंह भाटी की तस्वीर की चर्चा क्यों, जानें

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जयपुर

राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र के दो चर्चित नेताओं की एक तस्वीर आज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। इस तस्वीर में दो धुर विरोधी नेता एक साथ नजर आ रहे हैं। एक चौधरी हैं और दूसरे ठाकुर। पिछले दिनों राजस्थान विधानसभा में बजट भाषण के बाद जब कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी ने ‘ठाकुर का कुआं’ कविता पढी तो उन पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने के आरोप लगे। चौधरी और ठाकुर आमने सामने हो गए थे। हालांकि हरीश चौधरी ने इस कविता के जरिए सरकार पर तंज कसा कि बजट में दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के लिए कुछ नहीं है जबकि बड़े बड़े महलों और ठाकुरों के लिए बहुत कुछ है। जब उन्होंने ‘ठाकुर का कुआ’ कविता पढी तो हंगामा हो गया। कविता पढ़ने पर राजपूत समाज के नेताओं ने चौधरी का विरोध करते हुए माफी मांगे जाने की मांग की थी।

अब चौधरी और ठाकुर एक मंच पर
गुरुवार को ताजा तस्वीर सामने आई है। इस तस्वीर में कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी और निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी एक साथ नजर आ रहे हैं। यह तस्वीर बाड़मेर जिले के चौहटन की है। दरअसल बाड़मेर के चौहटन में सुईया अर्द्ध कुंभ के ध्वज पूजन का कार्यक्रम था। इस कार्यक्रम में कई संत महात्मा मौजूद रहे। हरीश चौधरी और रविंद्र भाटी के साथ कई अन्य जनप्रतिनिधि भी मौजूद थे। दोनों नेता ना केवल पास पास बैठे बल्कि मुस्कुराते हुए आपस में बातें करते रहे। जो नेता अक्सर विधानसभा में और बाहर एक दूसरे खिलाफ आरोप प्रत्यारोप करते थे, उन्हें घुला मिला देखकर लोग अलग अलग तरह के कमेंट कर रहे हैं।

रिफायनरी खाने के तीखे आरोप जड़े थे भाटी ने
हरीश चौधरी ने जब ‘ठाकुर का कुआं’ कविता पढी तो राजपूत समाज के कई लोगों ने उन पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए चौधरी पर निशाना साधा था। ऐसे मौके पर रविंद्र भाटी भी प्रतिक्रिया करने से पीछे नहीं रहे। उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा कि रिफाइनरी को कौन खा गया। बाद में रिफाइनरी को लेकर भी दोनों नेताओं में बयानबाजी हुई। तीखी बयानबाजी के बाद अब दोनों नेता आपस में बड़े प्रेम में मिलते दिखे तो लोगों के जहन में तरह तरह के सवाल उठना लाजमी है।

जानिए क्या कविता पढ़ी थी चौधरी ने
सदन में बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए हरीश चौधरी ने ओम प्रकाश वाल्मीकि की कविता पढी। कविता कुछ इस तरह से है। “बैल ठाकुर का, हल ठाकुर का…हल की मूठ पर हथेली अपनी.. फसल ठाकुर की, कुआं ठाकुर का, पानी ठाकुर का… खेत-खलिहान ठाकुर के… गली-मोहल्ले ठाकुर के…. फिर अपना क्या ?…गांव..शहर…?….देश…?”। कविता पढ़ने के बाद सत्ता पक्ष के सदस्यों ने भी हरीश चौधरी पर सवाल उठाए।

लोकसभा चुनाव के दौरान भी दिखी थी कड़वाहट
विधानसभा में हुई तीखी बहसबाजी के बाद भी हरीश चौधरी और रविंद्र सिंह भाटी के बीच तकरार खत्म नहीं हुई। लोकसभा चुनाव के दौरान भी दोनों नेता एक- दूसरे के सामने दिखते रहे। इतना ही नहीं लोकसभा चुनाव के दौरान जब बाड़मेर के बायतु में आने वाले ‘दुधवा खुर्द’ बूथ पर हुई री-पोलिंग हुई, तब निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव में उतरे रवींद्र सिंह भाटी ने बिना नाम लिए कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी पर भी तंज कसते हुए उन पर बीजेपी के साथ मिलकर धांधली करने का आरोप लगाया था। इस दौरान भाटी ने कहा कि ‘नेताजी ने धरने पर बैठकर साजिश और षडयंत्र रचने का काफी प्रयास किया, लेकिन वह सफल नहीं हुए’।

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