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महाकुंभ 2025: गंगाजल की शुद्धता को लेकर NGT का आदेश, कहा- ‘श्रद्धालुओं की सेहत पर ना पड़े कोई असर’

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संगम नगरी प्रयागराज में महाकुंभ के दौरान गंगा जल की उपलब्धता और शुद्धता को लेकर एनजीटी यानी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने बड़ा फैसला दिया है. एनजीटी ने सरकार से कहा है कि महाकुंभ के दौरान प्रयागराज में गंगाजल की पर्याप्त उपलब्धता हो और साथ ही गंगाजल की क्वालिटी पीने-आचमन करने और नहाने योग्य होनी चाहिए.

एनजीटी की डिवीजन बेंच ने अपने 30 पन्ने के आदेश में आठ प्रमुख बिंदुओं के अनुपालन का आदेश दिया है और केंद्र व यूपी सरकार से इन सभी बिंदुओं पर अनुपालन करने को कहा है. एनजीटी ने अपने फैसले में कहा है कि महाकुंभ के दौरान जो भी श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाने के लिए प्रयागराज आए, उन्हें गंगाजल को लेकर कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए.

गंगा में आस्था की डुबकी लगाने पर श्रद्धालुओं की सेहत पर कोई खराब असर कतई नहीं पड़ना चाहिए. एनजीटी ने अपने फैसले में कहा है कि महाकुंभ के दौरान गंगा और यमुना नदियों में सीवेज का जीरो डिस्चार्ज होना चाहिए. नालों और टेनरियों का गंदा पानी कतई नहीं गिरना चाहिए.

एनजीटी कोर्ट ने सेंट्रल पल्यूशन कंट्रोल बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को महाकुंभ के दौरान हफ्ते में कम से कम दो दिन प्रयागराज में संगम के आसपास विभिन्न जगहों पर गंगाजल का सैंपल लेना होगा. फैसले के मुताबिक सैंपल की डुप्लीकेसी नहीं होनी चाहिए. यानी हर बार सैंपल अलग-अलग जगह पर होना चाहिए. महाकुंभ में भीड़ बढ़ने पर सैंपलिंग की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए. हफ्ते में दो दिन से ज्यादा और कई जगहों पर सैंपल लेना होगा.

NGT के रजिस्ट्रार जनरल को लगातार भेजनी होगी सैंपल रिपोर्ट
केंद्रीय और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को लिए गए सैंपल की रिपोर्ट एनजीटी के रजिस्ट्रार जनरल को लगातार भेजनी होगी. एनजीटी इस रिपोर्ट का लगातार एनालिसिस करेगी. अगर कोर्ट को रिपोर्ट के आधार पर यह लगता है कि गंगाजल पीने-नहाने या आचमन के लायक नहीं है तो वह नए सिरे से जरूरी दिशा निर्देश जारी करेगा. केंद्र और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सैंपल की रिपोर्ट अपनी वेबसाइट पर भी नियमित तौर पर अपलोड करनी होगी.

एनजीटी में स्टेटस रिपोर्ट करनी होगी पेश
एनजीटी ने इसके साथ ही पोस्ट मेला मैनेजमेंट के तहत कचरे और दूसरे वेस्ट मटेरियल को एनवायर्नमेंटल नॉर्म्स के तहत डिस्पोजल करने को कहा है. गंगाजल की उपलब्धता और शुद्धता को लेकर क्या कदम उठाए गए हैं और सुधार के लिए क्या कुछ किया गया है. इसे लेकर 31 जनवरी और 28 फरवरी को एनजीटी में स्टेटस रिपोर्ट पेश करनी होगी. सुनवाई के दौरान यूपी सरकार की तरफ से कहा गया कि गंगा और यमुना नदियों में अब नालों और टेनरियों का गंदा पानी कतई नहीं गिर रहा है. जिन तीन जगहों को लेकर शिकायत की गई है, वहां जिओ ट्यूब के माध्यम से शोधित पानी ही छोड़ा जा रहा है.

अधिवक्ता सौरभ तिवारी खुद करेंगे मॉनिटरिंग
इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता सौरभ तिवारी व अन्य की याचिका पर सुनवाई के बाद एनजीटी कोर्ट ने यह आदेश दिया है. इस मामले की सुनवाई चेयरपर्सन प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर डाक्टर ए सेंथिल वेल डिवीजन बेंच में हुई. याचिकाकर्ता अधिवक्ता सौरभ तिवारी का कहना है कि वह एनजीटी कोर्ट के आदेश के अनुपालन को लेकर खुद भी लगातार मॉनिटरिंग करेंगे. अगर एनजीटी के आदेश का अनुपालन नहीं हुआ और महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं को दिक्कत हुई तो वह नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को इस बारे में फिर से अवगत कराएंगे.

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