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दहेज प्रताड़ना, घरेलू हिंसा अब भी गंभीर स्तर पर, NCW डेटा बता रहा कितनी खराब है स्थिति

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नई दिल्ली

राष्ट्रीय महिला आयोग को 2024 में महिलाओं के खिलाफ अपराधों की 25,743 शिकायतें मिलीं। इनमें सबसे ज्यादा 24% (6,237) घरेलू हिंसा की थीं। गौरतलब है कि ‘सम्मान के साथ जीने के अधिकार’ की मांग वाली शिकायतें सबसे ऊपर रहीं, जो कुल शिकायतों का लगभग 28% हैं। दहेज उत्पीड़न के मामले 17% (4,383) रहे और दहेज हत्याओं की 292 शिकायतें दर्ज हुईं।

घर में सुरक्षित नहीं महिलाएं
एनसीडब्ल्यू के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में घरेलू हिंसा एक प्रमुख चिंता का विषय बनी रही। कुल 25,743 शिकायतों में से 6,237 शिकायतें घरेलू हिंसा से संबंधित थीं, जो कुल शिकायतों का लगभग एक-चौथाई है। यह दर्शाता है कि घर की चारदीवारी के भीतर महिलाओं के खिलाफ हिंसा एक गंभीर समस्या बनी हुई है। ‘सम्मान के साथ जीने के अधिकार’ से जुड़ी शिकायतें सबसे ज़्यादा रहीं। यह अधिकार महिलाओं के लिए बुनियादी है और इसकी मांग सबसे ज़्यादा होना चिंताजनक है। दहेज उत्पीड़न और दहेज हत्याओं की शिकायतें भी बड़ी संख्या में दर्ज की गईं, जो दर्शाता है कि दहेज प्रथा अभी भी महिलाओं के लिए एक बड़ा खतरा है।

शिकायतों में आई थोड़ी गिरावट
हालांकि 2024 में कुल शिकायतों में गिरावट देखी गई, लेकिन ये संख्या कोविड से पहले के सालों की तुलना में अभी भी ज्यादा है। 2019 में कुल शिकायतें 19,730 थीं, जो 2020 में बढ़कर 23,722 हो गईं। महामारी के दौरान 2021 और 2022 में यह संख्या 30,000 से अधिक हो गई। 2023 में पहली बार इन शिकायतों में गिरावट आई। यह गिरावट सकारात्मक संकेत है, लेकिन शिकायतों की संख्या अभी भी चिंताजनक है।

सबसे ज्यादा यूपी से मिली शिकायतें
राज्यवार आंकड़ों को देखें तो उत्तर प्रदेश से सबसे ज़्यादा शिकायतें मिलीं, जो कुल शिकायतों का आधे से भी ज्यादा हैं। दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, मध्य प्रदेश और हरियाणा भी उन राज्यों में शामिल हैं जहां से बड़ी संख्या में शिकायतें मिलीं। यह दर्शाता है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों को रोकने के लिए इन राज्यों में और ज्यादा कोशिश करनी होगी। 2024 में सबसे ज्यादा शिकायतें उत्तर प्रदेश (54%) से आईं, उसके बाद दिल्ली (9%), महाराष्ट्र (5.1%), बिहार (4.8%), मध्य प्रदेश (4.2%) और हरियाणा (4.1%) का स्थान रहा।

महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े अन्य अपराधों, जैसे कि छेड़छाड़, बलात्कार, यौन उत्पीड़न, साइबर अपराध और कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायतें भी दर्ज की गईं। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि महिलाओं को विभिन्न प्रकार की हिंसा और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है।

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