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भारत के पड़ोस में बनेगा नया देश! अराकान आर्मी बदल सकती है एशिया का नक्शा, जानें भारतीय निवेश पर कितना खतरा

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नेपीडॉ:

म्यांमार में सैन्य शासन के खिलाफ जंग लड़ने वाली अराकान आर्मी आजादी के उस लक्ष्य हासिल करने के बहुत करीब है, जो महज कुछ महीने तक असंभव लग रहा था। अराकान आर्मी ने देश के रखाइन प्रांत के 18 में से 15 प्रांतों पर कब्जा कर लिया है। अगर वे पूरे रखाइन राज्य पर कब्जा कर लेते हैं और स्वतंत्रता की घोषणा करते हैं कि 1971 में बांग्लादेश के निर्माण के बाद एशिया में बनने वाला पहला देश होगा। आइए रखाइन आर्मी की सफलता को समझते हैं।

यूनाइटेड लीग ऑफ अराकान (ULA) की सैन्य शाखा अराकान आर्मी ने रखाइन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है। अब केवल भारत से वित्तपोषित सिट्टवे बंदरगाह और चीन की मदद से बना क्याऊकफ्यू का गहरे समुद्र का बंदरगाह और मुनांग शहर ही म्यांमार के सैन्य जुंटा के नियंत्रण में रह गए हैं।

प्रमुख शहरों पर अराकान आर्मी का कब्जा
साल 2024 के आखिर में अराकान आर्मी रखाइन में स्थित म्यांमार आर्मी की पश्चिम कमांड के मुख्यालय एन (Ann) शहर पर कब्जा कर लिया था। इसके साथ ही माउंगडॉ पर भी कब्जा कर लिया और बांग्लादेश से लगी पूरी सीमा पर इसका नियंत्रण हो गया है। रखाइन राज्य के अधिकांश हिस्से पर कब्जा करने वाली अराकान आर्मी ने सैन्य जुंटा से बातचीत पर भी सहमति जताई है। एक बयान में कहा गया, हम हमेशा सैन्य समाधानों के बजाय राजनीतिक साधनों के माध्यम से मौजूदा आंतरिक मुद्दों को हल करने के लिए खुले रहते हैं।

भारत के निवेश का क्या होगा?
यूएलए के बयान में विदेशी देशों भारत और चीन का आश्वासन दिया गया है कि वह रखाइन राज्य में उनके निवेश की रक्षा करेगा। इस बयान को चीनी भाषा में भी प्रकाशित किया गया है, जिसमें बीजिंग के नेतृत्व की प्रशंसा की गई है। इसमें कहा गया है कि अराकान आर्मी सभी विदेशी निवेशों का स्वागत करती है और उन्हें मान्यता देती है जो अराकान को लाभ पहुंचाएंगे और इसके विकास और प्रगति में सहायता करेंगे।

भारत और अराकान आर्मी
इस बीच ऐसी रिपोर्ट है कि अराकान सेना के वरिष्ठ नेताओं की भारत और चीन के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों के साथ गुप्त बैठकें हुई हैं। अभी तक स्पष्ट नहीं है कि अराकान आर्मी सित्तवे और क्याउकफ्यू पर भी कब्जा करेगी या चीनी और भारतीय प्रतिक्रियाओं का इंतजार करेगी। म्यांमार की जुंटा सेना ने विद्रोहियों के खिला वायु सेना और नेवी का इस्तेमाल किया है, उसके बावजूद अराकान आर्मी ने जीत हासिल की है।

भारत के पड़ोस में नया सीरिया
विश्लेषकों का कहना है कि अराकान आर्मी की बातचीत की पेशकश और विदेशी निवेशकों को आश्वस्त करने के पीछे असल वजह यह है कि अगर आजादी हासिल होती है तो राजनयिक मान्यता की संभावनाओं के आकलन के लिए समय मिल सके। एशिया और पश्चिम में महत्वपूर्ण देशों से मान्यता के बिना यूएलए का आजाद देश का सपना पूरा नहीं हो सकता है। भारत के पड़ोस में म्यांमार एक नया सीरिया बनता जा रहा है।

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