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पाकिस्‍तानी एटम बम पर होगा TTP आतंकियों का कब्‍जा? 18 परमाणु वैज्ञानिकों का अपहरण और यूरेनियम की लूट, उठे सवाल

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इस्‍लामाबाद:

पाकिस्‍तान के परमाणु कार्यक्रम की सुरक्षा एक बार फिर से खतरे में पड़ गई है। तहरीक-ए-तालिबान यानि टीटीपी के आतंकियों ने 16 पाकिस्‍तानी परमाणु वैज्ञानिकों और कर्मचारियों का अफगानिस्‍तान से लगे खैबर पख्‍तूनख्‍वा प्रांत से गुरुवार को अपहरण कर लिया। पाकिस्‍तानी सेना का दावा है कि उसने 8 लोगों को आतंकियों के कब्‍जे से रिहा करा लिया है। इससे पहले टीटीपी आतंकियों ने कहा था कि वे पाकिस्‍तानी सेना के प्रतिष्‍ठानों को अब निशाना बनाएंगे। पाकिस्‍तानी सेना का दावा है कि ये आम कर्मचारी थे लेकिन टीटीपी ने इनके पहचान पत्र जारी करके बताया है कि वे पाकिस्‍तानी परमाणु ऊर्जा आयोग में काम करते हैं। यह भी दावा किया जा रहा है कि आतंकियों ने यूरेनियम की भी लूट हुई है।

पाकिस्‍तान एक परमाणु हथियार संपन्‍न राष्‍ट्र है और उसके एटम बमों पर टीटीपी दशकों से नजर है। इस वजह से 16 वैज्ञानिकों के अपहरण को बड़ी घटना माना जा रहा है। वाइस ऑफ अमेरिका की रिपोर्ट के मुताबिक टीटीपी के आतंकियों ने बंदूक के बल पर इन वैज्ञानिकों का अपहरण कर लिया। उन्‍होंने वैज्ञानिकों की गाड़ी को आग के हवाले कर दिया और कर्मचारियों को लेकर फरार हो गए। टीटीपी ने एक वीडियो जारी करके बताया है कि सेना उनकी डिमांड को पूरा करे। एक कर्मचारी को गंभीर हालत में रिहा कराया गया है। पाकिस्‍तान का परमाणु ऊर्जा आयोग शोध और व‍िकास तथा परमाणु ऊर्जा के काम करता है।

पाकिस्‍तानी आतंकी बनाना चाहते हैं डर्टी बम
पाकिस्‍तान का यह प्रांत इस समय टीटीपी के निशाने पर है। इस बीच बलूचों ने भी बलूचिस्‍तान प्रांत में एक सरकारी कार्यालय पर कब्‍जा कर लिया है। टीटीपी आतंकियों ने दावा किया है कि उन्‍होंने बड़ी मात्रा में यूरेनियम भी लूट लिया है। टीटीपी का यह दावा अगर सही है तो यह दुनिया की सुरक्षा के लिहाज से बहुत डरावनी खबर है। कई आतंकी गुट डर्टी बम बनाने की फिराक में हैं जिसमें यूरेनियम का इस्‍तेमाल किया जाता है। ये सभी परमाणु वैज्ञानिक पाकिस्‍तान की सबसे बड़ी यूरेनियम खदान काबुल खेल अटामिक एनर्जी में काम करते थे। वे पाकिस्‍तान की सरकार से अपनी जान की गुहार लगा रहे हैं।

टीटीपी ने मांग की कि इन परमाणु इंजीनियरों की रिहाई के बदले पाकिस्‍तानी सेना टीटीपी आतंकियों के खिलाफ चलाए जा रहे अपने सैन्‍य अभियान को रोके। इससे पहले तालिबान सरकार के साथ तनाव के बाद पाकिस्‍तानी सेना अफगानिस्‍तान में हवाई हमला किया था और टीटीपी के ठिकाने को तबाह करने का दावा किया था। इसके बाद तालिबान और टीटीपी ने भी जवाबी हमला करके कई पाकिस्‍तानी सैनिकों को मारने का दावा किया था। टीटीपी को पाकिस्‍तानी तालिबान के नाम से भी जाना जाता है और इसमें करीब 6000 लड़ाके हैं जो अफगानिस्‍तान और पाकिस्‍तान की सीमा पर सक्रिय हैं।

टीटीपी की नजर पाकिस्‍तानी परमाणु बम पर
टीटीपी के आतंकी पाकिस्‍तान की सरकार को हटाकर वहां पर शरिया कानून लागू करना चाहते हैं। टीटीपी की नजर कई सालों से पाकिस्‍तान के परमाणु बम कार्यक्रम पर है। अमेरिका के ब्रुकिंग संस्‍थान के मुताबिक अफगानिस्‍तान में तालिबान सरकार आने के बाद टीटीपी के हौसले बुलंद हैं। उसका कहना है कि अगर पाकिस्‍तान अगर इन आतंकियों पर काबू नहीं पाता है तो जिहादियों के हाथ में पाकिस्‍तानी परमाणु बमों के जाने का खतरा है। पाकिस्‍तानी सेना के अंदर भी ऐसे कई कट्टरपंथी हैं जो तालिबान से बहुत प्रभावित हैं। पाकिस्‍तान के पास इस समय 170 परमाणु बम है और इसे 200 तक पहुंचाने में लगा हुआ है। पाकिस्‍तान के इस घटनाक्रम से अमेरिका की भी टेंशन बढ़ गई है।

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