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मुख्य चुनाव आयुक्त चुनने में टूटेगी परंपरा? पहली बार बदले नियमों के तहत होगी नए सीईसी की नियुक्ति

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नई दिल्ली

दिल्ली में चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है। इस बीच मुख्य चुनाव आयुक्त राजीव कुमार के रिटायरमेंट की डेट भी करीब आ रही है। दिल्ली में मतदान और नतीजों के आने के कुछ दिन बाद ही सीईसी राजीव कुमार अपने पद से रिटायर हो जाएंगे। रिपोर्ट के अनुसार राजीव कुमार का 18 फरवरी को उनके कार्यालय में आखिरी दिन होगा। राजीव कुमार के बाद पहली बार नए मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति बदले नियमों के तहत होगी। पहले मुख्य चुनाव आयुक्त के पैनल में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया भी होते थे। नए कानून में सीजेआई को पैनल से बाहर रखा गया है।

कैसे होगा नए सीईसी का सेलेक्शन?
परंपरागत रूप से, मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) का उत्तराधिकारी अगला सबसे वरिष्ठ चुनाव आयुक्त होता है। मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 के अनुसार पहली बार, इसके दायरे को व्यापक बनाया जा सकता है। वर्तमान सीईसी राजीव कुमार 18 फरवरी को पद से रिटायर हो रहे हैं। चुनाव आयोग में वर्तमान में सीईसी और दो चुनाव आयुक्त – ज्ञानेश कुमार और सुखबीर सिंह संधू शामिल हैं।

ऐसे में ज्ञानेश कुमार अभी भी दावेदारी में हो सकते हैं, लेकिन अधिनियम की धारा 6 और 7 के अनुसार, विधि मंत्रालय चयन समिति के लिए पांच नामों का पैनल तैयार करने के लिए विधि मंत्री की अध्यक्षता में एक सर्च समिति का गठन करेगा।

चयन समिति में कौन-कौन होगा शामिल
चयन समिति में प्रधानमंत्री, एक कैबिनेट मंत्री और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल हैं। यह समित नए सीनियर मोस्ट चुनाव आयुक्त को या बाहर से ‘किसी अन्य व्यक्ति’ के नाम पर विचार कर सकते हैं। अधिनियम की धारा 6 मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए इस प्रक्रिया को निर्दिष्ट करती है।

भले ही ज्ञानेश कुमार शीर्ष पद के लिए संभावित उम्मीदवार बने हुए हैं, लेकिन अधिनियम चयन समिति को चुनाव आयोग के बाहर से नामों पर विचार करने का विकल्प देता है। यह चुनाव आयोग की तरफ से वोटर लिस्ट में सुधार से लेकर ईवीएम की प्रभावशीलता तक कई मुद्दों पर विपक्षी दलों की आलोचना की पृष्ठभूमि में हुआ है।

तो बाहरी व्यक्ति बनेगा सीईसी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार विधि मंत्रालय की तरफ से अभी पैनल को लेकर प्रक्रिया शुरू होनी है। रिपोर्ट के अनुसार चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि इस बदलाव का मतलब है कि बाहरी लोगों (दो सेवारत चुनाव आयुक्तों के अलावा) को आयोग का नेतृत्व करने का अवसर मिल सकता है। इस बदलाव के निहितार्थों पर पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओ पी रावत ने कहा कि इससे चुनाव के बाद सरकार बदलने पर पिछली सरकार के फैसले को सही करने का विकल्प खुल जाता है। इससे आयोग की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ सकता है।

सचिव स्तर का अधिकारी बनेगा सीईसी
मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और पदावधि) अधिनियम, 2023 की धारा 5 के अनुसार, पद के लिए उम्मीदवार वर्तमान या पूर्व सचिव स्तर के अधिकारी होंगे। धारा 6 में कहा गया है कि विधि और न्याय मंत्री की अध्यक्षता वाली एक खोज समिति मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए चयन समिति के विचार के लिए पांच व्यक्तियों का एक पैनल तैयार करेगी। इसमें पीएम, नेता प्रतिपक्ष, एक कैबिनेट मंत्री के साथ ही और दो अन्य सदस्य शामिल होंगे। ये दो सदस्य भारत सरकार के सचिव के पद से नीचे के नहीं होने चाहिए।

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