नई दिल्ली:
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (NBWL) ने लद्दाख में सेना के लिए 11 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दे दी है। ये प्रोजेक्ट्स चीन सीमा के पास संरक्षित क्षेत्रों में हैं। इनमें दूरसंचार नेटवर्क और गोला-बारूद भंडारण जैसी सुविधाएं शामिल हैं। पिछले महीने हुई बैठक में पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता वाली NBWL की स्थायी समिति ने यह फैसला लिया।
यह फैसला LAC के पास सैनिकों के लिए महत्वपूर्ण है। इससे सीमा पर सुरक्षा बढ़ेगी। इन प्रोजेक्ट्स से सेना को बेहतर संचार और संसाधन मिलेंगे। NBWL ने चांगथांग और काराकोरम नुब्रा श्योक वन्यजीव अभयारण्यों में निर्माण की अनुमति दी है। चांगथांग में 10 और काराकोरम में 1 प्रोजेक्ट मंजूर हुआ है। चांगथांग अभयारण्य में एक गारबेज प्लांट भी बनेगा, जो हानले गांव में होगा। इन प्रोजेक्ट्स में पैदल सेना शिविर, तोपखाने रेजिमेंट चौकी, मोबाइल टॉवर, नाव शेड, गोला-बारूद भंडार और ट्रैफिक पोस्ट शामिल हैं। ये सभी निर्माण LAC के पास सामरिक रूप से महत्वपूर्ण हैं।
क्या शर्ते हैं?
NBWL ने इन प्रोजेक्ट्स को कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दी है। रक्षा मंत्रालय को यह सुनिश्चित करना होगा कि इनसे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। स्थानीय जीव-जंतुओं और उनके आवास पर कम से कम प्रभाव पड़े, इसका भी ध्यान रखना होगा। चांगथांग और काराकोरम अभयारण्य में हिम तेंदुआ, तिब्बती मृग, तिब्बती जंगली गधा और तिब्बती भेड़िया जैसे दुर्लभ जानवर पाए जाते हैं। कई प्रजातियों के पक्षी भी यहां रहते हैं। अब तक NBWL की स्थायी समिति ने चांगथांग अभयारण्य में 2,967 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में 107 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी है।
सेना को क्या फायदा होगा?
यह फैसला सीमा सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। सेना को आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी, साथ ही पर्यावरण का भी ध्यान रखा जाएगा। NBWL ने यह भी सुनिश्चित किया है कि निर्माण कार्य से पहले पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन किया जाएगा। इससे यह तय होगा कि प्रोजेक्ट्स से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को कम से कम नुकसान हो। यह कदम सीमावर्ती इलाकों में विकास और सुरक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे स्थानीय लोगों और वन्यजीवों दोनों को फायदा होगा। NBWL ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्माण कार्य के दौरान नियमित निगरानी की जाएगी।
