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Friday, May 1, 2026
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सम्मेद शिखर पर जंगल सफारी: जैन समाज का विरोध, पवित्रता भंग होने का दावा

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गिरिडीह

झारखंड सरकार सम्मेद शिखर पर जंगल सफारी शुरू करना चाहती है। इससे जैन समाज नाराज़ है। सम्मेद शिखर जैन धर्म का पवित्र स्थल है। यहां 20 तीर्थंकरों को मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। जैन समाज का मानना है कि सफारी से इस जगह की पवित्रता भंग होगी। उन्होंने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। भारत सरकार और झारखंड सरकार ने पहले ही इस जगह को पवित्र तीर्थस्थल घोषित कर दिया है।

पारसनाथ क्षेत्र में झारखंड सरकार की ओर से जंगल सफारी शुरू करने की योजना है। जैन समुदाय को लगता है कि इससे इस पवित्र जगह का माहौल खराब होगा। जैन समाज के लोग धर्म स्थल क्षेत्र में मनोरंजन गतिविधियों को अनुचित मानते हैं। यही कारण है कि देश भर के जैन धर्मावलम्बी इस फैसले का विरोध कर रहे हैं।

पवित्र स्थान पर मौज-मस्ती की गतिविधियां नहीं होनी चाहिए
जैन धर्म संगठनों का कहना है कि सम्मेद शिखर जैसे पवित्र स्थान पर मौज-मस्ती की गतिविधियां नहीं होनी चाहिए। ऐसा करना तीर्थस्थल का अपमान है। जैन समाज के कई संगठन और नेता इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हैं। राजेश जैन दद्दू, राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ भारत, विश्व जैन संगठन, दिगंबर जैन सोशल ग्रुप फेडरेशन, महावीर ट्रस्ट और कई वरिष्ठ समाजसेवी भी इस आंदोलन का समर्थन कर रहे हैं।डॉ जैनेन्द्र जैन, आजाद जैन, अमित कासलीवाल, हंसमुख गांधी, टी के वेद, राकेश विनायका, विपुल बांझल, मयंक जैन, पुष्पा कासलीवाल, मुक्ता जैन और सारिका जैन जैसे प्रमुख लोग भी इस विरोध में शामिल हैं।

जैन समाज की ओर से देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी
जैन समाज ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने अपना फैसला नहीं बदला तो वे देशव्यापी आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि इसकी जिम्मेदारी झारखंड सरकार और केंद्र सरकार की होगी।

2 साल पहले पर्यटन क्षेत्र को लेकर भी हुआ था विवाद
पारसनाथ को पर्यटन क्षेत्र घोषित करने को लेकर भी दो साल पहले इसी तरह का विवाद खड़ा हुआ था। जैन समाज के लोगों का कहना है कि पर्यटन क्षेत्र घोषित करने से इलाके में मांस-मदिरा का सेवा शुरू हो जाएगा, जिससे समेज शिखर जी की पवित्रता भंग होगी। हालांकि सरकार की ओर से इस क्षेत्र को पहले से ही मांस-मदिरा निषेध क्षेत्र घोषित किया जा चुका है।बताया गया है कि भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने 5 जनवरी 2023 को और झारखंड सरकार ने 2018 में पारसनाथ पर्वत को जैन समाज का पावन तीर्थ घोषित किया था।

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