12.9 C
London
Friday, April 10, 2026
Homeअंतरराष्ट्रीयभारत को लेकर चीन की बातों से शहद क्यों टपक रहा, जयशंकर...

भारत को लेकर चीन की बातों से शहद क्यों टपक रहा, जयशंकर के बयान पर दी ‘मीठी’ प्रतिक्रिया

Published on

बीजिंग

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद भारत को लेकर चीन के स्वभाव में नरमी देखने को मिली है। चीनी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को कहा कि भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को ‘रणनीतिक ऊंचाई व दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य’ में देखा जाना चाहिए और दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी आम सहमति को लागू करना चाहिए। चीन के विदेश मंत्रालय ने विदेश मंत्री एस जयशंकर की हालिया टिप्पणियों पर यह प्रतिक्रिया दी। ऐसा माना जा रहा है कि चीन की रुख में नरमी के पीछे अमेरिका में हुआ सत्ता परिवर्तन है।

रणनीतिक ऊंचाई व दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य का राग अलापा
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने बीजिंग में संवाददाताओं से कहा, “हमें द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक ऊंचाई व दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य में देखने की जरूरत है, संबंधों को मधुर और स्थिर विकास की पटरी पर वापस लाने तथा बड़े पड़ोसी देशों के लिए सद्भाव के साथ रहने तथा साथ-साथ विकास करने का सही रास्ता खोजने की जरूरत है।”

जयशंकर ने क्या कहा था?
जयशंकर ने पिछले दशकों में बीजिंग के साथ नई दिल्ली के संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए 18 जनवरी को मुंबई में नानी पालकीवाला स्मारक व्याख्यान में कहा था कि पिछले नीति-निर्माताओं की ”गलत व्याख्या”, चाहे वह ”आदर्शवाद या व्यावहारिक राजनीति की अनुपस्थिति” से प्रेरित हो, ने चीन के साथ न तो सहयोग और न ही प्रतिस्पर्धा में मदद की है।

भारत-चीन सीमा विवाद पर बोले थे जयशंकर
जयशंकर ने कहा था कि भारत और चीन 2020 के बाद की सीमा स्थिति से उत्पन्न जटिलताओं से खुद को अलग करने की कोशिश कर रहे हैं और दोनों देशों के बीच संबंधों के दीर्घकालिक विकास पर अधिक विचार किये जाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा था कि पिछले दशक में इस रुख में बदलाव आया है और आपसी विश्वास, आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता को दोनों पक्षों के बीच संबंधों का आधार बने रहना चाहिए। विदेश मंत्री ने कहा कि संबंधों के दीर्घकालिक विकास पर अधिक विचार किए जाने की आवश्यकता है।

चीन बोला- दोनों देशों को सहयोग बढ़ाने की जरूरत
गुओ ने जयशंकर की टिप्पणियों पर एक प्रश्न का जवाब देते हुए कहा कि दो प्रमुख सभ्यताओं, विकासशील देशों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के रूप में, चीन और भारत को विकास पर ध्यान केंद्रित करने और सहयोग बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह दोनों देशों के 2.8 अरब से अधिक लोगों के मौलिक हितों को पूरा करता है, क्षेत्रीय देशों और लोगों की साझा आकांक्षाओं को पूरा करता है, वैश्विक दक्षिण के मजबूत होते ऐतिहासिक रुझान के अनुरूप है तथा इस क्षेत्र और व्यापक विश्व की शांति और समृद्धि के लिए अनुकूल है।

Latest articles

राज्यमंत्री गौर ने 90 लाख की लागत के विभिन्न विकास कार्यों का किया भूमिपूजन

भोपाल। पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर ने गुरूवार को...

छत्तीसगढ़ में एआई आधारित शिक्षा की पहल, 2 लाख शिक्षकों को मिलेगा प्रशिक्षण

रायपुर। विष्णु देव साय ने कहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित शिक्षा के माध्यम...

पुष्कर में शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ में शामिल हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

पुष्कर (अजमेर)। भजनलाल शर्मा ने पुष्कर में आयोजित शत गायत्री पुरश्चरण महायज्ञ में भाग...

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के प्रस्तावित हिंडोली दौरे को लेकर तैयारियों की समीक्षा

हिंडोली (बूंदी)। भजनलाल शर्मा के 11 अप्रैल को प्रस्तावित हिंडोली दौरे के मद्देनजर गुरुवार...

More like this

ट्रम्प बोले- ईरान से डील नहीं हुई तो उपराष्ट्रपति दोषी, अमेरिका ने जंग के बीच 3 आर्मी अफसरों को हटाया

तेहरान। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने जंग के बीच आर्मी चीफ जनरल...

Iran-US War: ईरान की पूरी लीडरशिप, नेवी… एयर फ़ोर्स और मिसाइलें सब खत्म, ट्रंप ने कहा- अब और बड़ा हमला करेंगे

वाशिंगटन डीसी। गुरुवार को US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान (Iran-US War) के साथ...