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ब्रिक्स विस्तार: नए सदस्यों को जोड़कर बढ़ा रहा वैश्विक प्रभाव, यूं ही नहीं खौफ में हैं ट्रंप, क्या टूटेगा अमेरिकी दबदबा!

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मॉस्को

ब्रिक्स देशों के समूह का दुनिया में प्रभाव बढ़ रहा है। ब्राजील, रूस, भारत, चीन से शुरू हुआ यह ग्रुप निवेश बैंक के विचार से शुरू होकर आज बड़ा समूह बन गया है। हाल ही में (जनवरी 2025) इंडोनेशिया भी इस समूह का सदस्य बना है। ब्रिक्स समूह में अब 10 देश शामिल हैं। इनमें बड़े ऊर्जा उत्पादक और विकासशील देशों के बड़े उपभोक्ता शामिल हैं तो इसके पास अपना बहुपक्षीय ऋणदाता भी है। ब्रिक्स अमेरिका के दबदबे वाली दुनिया में अपनी आर्थिक ताकत बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2024 की शुरुआत में ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, इथियोपिया और मिस्र ब्रिक्स में शामिल हुए थे। नवंबर 2024 में तुर्की को ब्रिक्स में ‘साझेदार देश’ का दर्जा दिया गया है। सऊदी अरब के भी ग्रुप में आने की बात कही गई थी लेकिन सऊदी सरकार ने इस पर फैसला नहीं लिया है। मलेशिया और थाईलैंड भी ब्रिक्स में आना चाहते हैं। हालांकि अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई ने अमेरिका के करीब जाने और चीन-ब्राजील से दूरी के लिए ब्रिक्स के न्योते को ठुकरा दिया।

ब्रिक्स के विस्तार का अर्थ
ब्रिक्स कई प्रमुख ऊर्जा उत्पादकों को विकासशील देशों के सबसे बड़े उपभोक्ताओं के साथ जोड़ता है। यह समूह अपनी संख्या बढ़ाकर अमेरिका के प्रभुत्व वाली दुनिया में अपनी आर्थिक ताकत बढ़ा रहा है। ब्रिक्स विस्तार के पीछे मुख्य रूप से चीन है, जो दुनिया की प्रमुख औद्योगिक शक्ति है। चीन अपने वैश्विक प्रभाव को बढ़ा रहा है। दक्षिण अफ्रीका और रूस ने ब्रिक्स के विस्तार समर्थन किया है। भारत और ब्राजील ने भी शुरुआती झिझक के बाद इस पर सहमति दी है।

ब्रिक्स ने हालिया समय में गैर डॉलर करेंसी के विचार को पेश किया है। ब्रिक्स देश डॉलर की बजाय अपनी एक मुद्रा लाना चाहते हैं, ये एक बड़ा बदलाव हो सकता है। इस पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुस्सा दिखाया है और ब्रिक्स देशों को धमकी दी है। ब्लूमबर्ग इकोनॉमिक्स के विश्लेषकों का कहना है कि ब्रिक्स विस्तार राजनीति के बारे में ज्यादा है। चीन की कोशिश अमेरिकी दबदबे को चुनौती देने के लिए दक्षिणी गोलार्ध के देशों को अपनी ओर खींचने की है।

ब्रिक्स की वित्तीय ताकत
ब्रिक्स समूह की सबसे बड़ी उपलब्धियां वित्तीय रही हैं। ब्रिक्स देशों ने 100 बिलियन डॉलर के विदेशी मुद्रा भंडार को पूल करने पर सहमति व्यक्त की है, जिसे वे आपात स्थिति के दौरान एक-दूसरे को उधार दे सकते हैं। उन्होंने न्यू डेवलपमेंट बैंक की स्थापना की, जो विश्व बैंक ती तर्ज पर ऋण देने वाली संस्था है। इसने 2015 में शुरू होने के बाद से पानी, परिवहन और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए 33 बिलियन डॉलर कर्ज को मंजूरी दी है।

एक्सपर्ट का कहना है कि ब्रिक्स में कई देशों की रुचि है लेकिन भूराजनीतिक परिवर्तनों ने इसे प्रभावित किया है। अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रतिबंधों ने रूस को ज्यादातर विदेशी निवेशकों की सीमा से बाहर कर दिया है। एक और मुख्य सदस्य चीन भी संरचनात्मक मंदी का सामना कर रहा है। ब्राजील की अर्थव्यवस्था में मंदी है। इस सबने ब्रिक्स को भी प्रभावित किया है।

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