बेतिया
बिहार के बाद केके पाठक की एंट्री अब उत्तर प्रदेश में भी हो गई है। यही कारण है कि बेतिया से लेकर गोरखपुर तक हड़कंप मचा हुआ है। दरअसल, गोरखपुर में 51 एकड़ जमीन पर बिहार सरकार ने दावा ठोका है। यह जमीन बेतियाहाता इलाके में है, जहां कई सरकारी अफसरों के घर और दफ्तर हैं। बिहार सरकार का कहना है कि यह जमीन बेतिया राजघराने की है। बता दें कि राजघराने का कोई वारिस नहीं है, इसलिए बिहार सरकार इसे अपना बता रही है।
कहां हैं जमीन?
गोरखपुर के पॉश इलाके बेतियाहाता में 51 एकड़ जमीन है। इस पर कमिश्नर, सीडीओ, CMO, जज जैसे कई बड़े अधिकारियों के आवास हैं। साथ ही सरकारी दफ्तर, स्कूल और धार्मिक स्थल भी हैं। बिहार सरकार का दावा है कि यह जमीन बेतिया राजघराने की है। क्योंकि बेतिया राजघराने का कोई वारिस नहीं मिला है, इसलिए बिहार सरकार इस जमीन पर अपना हक जता रही है।
केके पाठक से साथ पहुंची थी टीम
बिहार सरकार की एक टीम जांच के लिए गोरखपुर आई है। इस टीम का नेतृत्व बिहार राजस्व परिषद के अध्यक्ष केके पाठक कर रहे हैं। यह टीम जमीन के कागजातों की जांच कर रही है। यूपी और बिहार सरकार के बीच इस बारे में बातचीत चल रही है। माना जा रहा है कि जमीन को लेकर जल्द ही कोई फैसला लिया जाएगा।
क्या कह रहे बिहार के अधिकारी
बिहार के राजस्व अधिकारी बद्री प्रसाद गुप्ता ने बताया कि इस मामले पर 26 नवंबर 2024 को बिहार विधानसभा में चर्चा हुई थी। इसके अगले दिन 27 नवंबर को गजट नोटिफिकेशन जारी किया गया। अब नियमों के अनुसार जमीनों की पहचान की जा रही है। जहां आज कमिश्नर का आवास है, वहां कभी बेतिया राजघराने की रानी का महल था। सरकारी आवास और दफ्तरों को छोड़कर लगभग 8 एकड़ जमीन पर दूसरों का कब्जा है। ऐसे लोगों की सूची बनाई जा रही है।
आगे क्या हो सकता है?
अगर सब ठीक रहा तो इन लोगों को सर्किल रेट से दोगुनी कीमत पर जमीन रजिस्टर कराने का मौका दिया जाएगा। जो लोग यह शर्त नहीं मानेंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गोरखपुर के अलावा कुशीनगर और महाराजगंज में भी बेतिया स्टेट की जमीन है। कुल मिलाकर 119 एकड़ से ज्यादा जमीन पर 300 से ज्यादा मकान बने हैं, जहां 1500 से ज्यादा लोग रहते हैं। इन सभी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी चल रही है।
क्या कह रहे गोरखपुर के अधिकारी
गोरखपुर के मुख्य विकास अधिकारी संजय कुमार मीणा ने बताया कि फिलहाल सभी सरकारी आवास और दफ्तर सुरक्षित हैं। भविष्य में भी इन पर कोई असर नहीं पड़ेगा। दोनों राज्य सरकारों के बीच बातचीत जारी है। जो भी अंतिम फैसला होगा, उसकी जानकारी सबको दी जाएगी। फिलहाल बातचीत से ही हल निकालने की कोशिश की जा रही है।
