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Tuesday, April 7, 2026
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ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे… भारत के लिए हथियारों का सबसे बड़ा एक्सपोर्टर कैसे बन रहा फ्रांस

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पेरिस

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं। दोनों देशों ने कई बड़े रक्षा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इस कारण भारत की सैन्य ताकत में जबरदस्त इजाफा हुआ है। इसमें न सिर्फ लड़ाकू विमान शामिल हैं, बल्कि पनडुब्बियां और मिसाइलें भी प्रमुख हैं। इसके अलावा भारत और फ्रांस के बीच स्ट्रैटजिक अलायंस भी है, जिसके तहत दोनों देशों की सेनाएं कई युद्धाभ्यासों को अंजाम देती हैं और आपसी सैन्य सहयोग को बनाए रखी हुई हैं।

फ्रांस शीत युद्ध की समाप्ति से पहले भी भारत का एक शांत और बाकी देशों की अपेक्षा एक अनदेखा मित्र और सहयोगी रहा है। लेकिन, शीत युद्ध के बाद से भारत और फ्रांस में रक्षा संबंध बहुत मजबूत हुए हैं। भारत ने फ्रांस से राफेल लड़ाकू विमान खरीदने से बहुत पहले 1982-83 में मिराज 2000 को खरीदा शुरू कर दिया था। मिराज अपने समय के सबसे आधुनिक विमानों में से एक था। फ्रांस ने यह विमान तब भारत को बेचा था, जब रूस और अमेरिका के बीच शीत युद्ध चरम पर था। इसका अंत मिखाइल गोर्बाचेव और बुश सीनियर ने 1989 में माल्टा शिखर सम्मेलन के बाद हुआ था।

विमान, पनडुब्बी और मिसाइलों की खरीद कर रहा भारत
भारत के रक्षा मंत्रालय ने फ्रांस की डसॉल्ट एविएशन से €7.87 बिलियन (₹58,891 करोड़) की अनुमानित कीमत पर 36 राफेल बहुउद्देशीय लड़ाकू विमानों की खरीद की थी। इसके अलावा भारत ने स्कॉर्पीन क्लास की छह डीजल इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को भी मेक इन इंडिया पहल के तहत भारत में बनाया। अब जल्द ही भारत अपनी नौसेना के लिए राफेल-एम लड़ाकू विमानों को खरीदने जा रहा है, जिनको देश के दो एयरक्राफ्ट कैरियरों आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत से ऑपरेट किया जाएगा। भारत ने इसके अलावा माइका, हैमर जैसी मिसाइलों की भी खरीद की है।

परमाणु परीक्षण पर फ्रांस ने नहीं लगाया प्रतिबंध
फ्रांस पुराने मित्र रूस के अलावा एकमाकत्र ऐसा P-5 राष्ट्र था, जिसने भारत के पोखरण-II परमाणु परीक्षणों पर टिप्पणी करने से परहेज किया था। इसके विपरीत, फ्रांस ने यह भी घोषणा की कि परमाणु परीक्षणों से द्विपक्षीय परमाणु सहयोग प्रभावित नहीं होगा। यह उस समय की बात है जब अमेरिका दुनिया भर के सहयोगियों को भारत पर प्रतिबंध लगाने के लिए उकसा रहा था। हालांकि, भारत और फ्रांस के संबंधों पर अमेरिकी दबाव का ज्यादा असर नहीं देखा गया और बाद में यह और मजबूत होता चला गया।

पीएम मोदी के कार्यकाल में संबंधों में आई तेजी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के दौरान भारत और फ्रांस के संबंधों में नई तेजी देखने को मिली है। पीएम मोदी ने कई बार फ्रांस का दौरा किया है। वह फ्रांस के बैस्टिल डे परेड पर मुख्य अतिथि के तौर पर भी शामिल हुए हैं। इसके बाद भारत ने फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को भी गणतंत्र दिवस का मुख्य अतिथि बनाकर आमंत्रित किया था। दोनों नेता वैश्विक मंचों पर भी अपनी दोस्ती का खुलेआम प्रदर्शन करने से नहीं चूकते हैं, जो दोनों देशों के संबंधों पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है।

रूस से सस्ता तेल न खरीदने के लिए नहीं डाला दबाव
फ्रांस भारत के उन कुछ पश्चिमी मोर्चों में से एक था, जिसने नई दिल्ली पर रूस से ‘सस्ता तेल’ न खरीदने का दबाव नहीं डाला। इसके उलट अमेरिका ने भारत को रोकने के लिए अपनी पूरी क्षमता का इस्तेमाल किया। हालांकि, भारत के दृढ़ निश्चय के आगे अमेरिका की एक न चली और पहले ट्रंप प्रशासन और बाद में बाइडन प्रशासन को रूस को लेकर भारत पर दबाव बनाने की रणनीति से पीछे हटना पड़ा है।

इंडो-पैसिफिक में भी भारत-फ्रांस एक साथ
भारत और फ्रांस के संबंध इंडो-पैसिफिक में भी काफी मजबूत हैं। फ्रांसीसी रीयूनियन द्वीप भारत के करीब दक्षिणी हिंद महासागर के मुहाने पर स्थित है। फ्रांस ने अपने सैनिकों और हथियारों को द्वीप पर तैनात कर रखा है। फ्रांसीसी नौसेना, वायु सेना और थल सेना अक्सर भारत के साथ युद्धाभ्यास करती रहती हैं। समुद्र में गश्त के दौरान भारतीय युद्धपोत फ्रांसीसी बंदरगाहों पर रुकते हैं और ईंधन समेत दूसरे साजोसामान को जहाजों पर रिफिल करते हैं।

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