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Tuesday, April 7, 2026
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चीन ने तिब्बत में खोजा अरबों डॉलर का दुर्लभ खजाना, दुनिया की इकोनॉमी को कर सकेगा कंट्रोल, वैज्ञानिकों ने कहा ‘गेमचेंजर’

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बीजिंग

चीन ने तिब्बत में एक ऐसे दुर्लभ खजाने की खोज कर ली है, जो उसके खनिज इंडस्ट्री की सूरत को बदलकर रख देगा। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने तिब्बत में ताबें के खान की एक बड़ी खोज की है। इस खोज के साथ ही चीन जियो-पॉलिटिक्स और कमजोर देशों पर अपना प्रभाव और ज्यादा बढ़ा लेगा। पता चला है, कि किंघई-तिब्बत पठार में 20 मिलियन टन से ज्यादा तांबे का भंडार पाया गया है। चीन के पास पहले से ही तांबे का विशाल भंडार रहा है, ऐसे में इस नये खोज ने चीन के लिए और ताकतवर बनने का रास्ता खोल दिया है। इस खोज के साथ ही चीन आयात पर अपनी निर्भरता और कम कर सकेगा और तांबे के उत्पादन में खुद को ग्लोबल लीडर के तौर पर प्रोजेक्ट कर पाएगा।

तिब्बत में तांबे की खोज से चीन भले ही खुश होगा, लेकिन इस खोज ने दुनियाभर के वैज्ञानिकों की टेंशन बढ़ा दी है। वैज्ञानिक इस खोज को भले ही गेमचेंजर कह रहे हैं, लेकिन उनकी आशंका इस बात को लेकर है, कि इससे स्थानीय पारिस्थिति तंत्र पर काफी गंभीर असर पड़ेगा। इसके अलावा, तांबे की खोज जियो- पॉलिटिकल तनाव को और ज्यादा बढ़ा सकते हैं।

तांबे की खोज चीन के लिए गेमचेंजर कैसे?
तिब्बत के चार क्षेत्रों यूलोंग, डुओलोंग, जूलोंग-जियामा और जियोनगुन-झुनूओ में तांबे के विशालकाय भंडार का पता लगाया गया है। चीन पहले से ही इन इलाकों का दोहन करता रहा है। तिब्बत के ही चामडो शहर में यूलोंग साइट में पहले से ही चीन का दूसरा सबसे बड़ा तांबा भंडार है, जो इसे तांबे के निष्कर्षण के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र बनाता है। इस नई खोज के साथ ही तिब्बत, दुनिया का सबसे बड़ा तांबा उत्पादक क्षेत्र बनने की तरफ बढ़ चला है। वहीं, इस खोज के साथ ही ग्लोबल सप्लाई चेन पर चीन का नियंत्रण तेजी से बढ़ने की आशंका बन गई है।

दुनिया में तांबे की मांग में पिछले कुछ सालों में जबरदस्त उछाल आया है। खासकर इलेक्ट्रिक गाड़ियों के निर्माण में तांबे की मांग काफी ज्यादा होती है। वहीं, नवीकरणीय ऊर्जा टेक्नोलॉजी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के तेजी से बढ़ने के कारण भी दुनिया में तांबे की मांग में भारी इजाफा हुआ है। जिससे चीन के इंरनेशनल ट्रेड में बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। इलेक्ट्रिक ग्रिड, बैटरी उत्पादन और एडवांस इंडस्ट्रियल जरूरतों को पूरा करने के लिए तांबे की काफी ज्यादा जरूरत होती है। लिहाजा, दुनिया के वो देश, जो अपने उत्पादन को बढ़ाना चाहते हैं, वो तांबे की खोज के लिए रेस लगाते रहे हैं।

चीन के ग्रीन एनर्जी सेक्टर के लिए वरदान
चीन के साथ साथ पूरी दुनिया में नवीकरणीय ऊर्जा और विद्युतीकरण के लिए कोशिशें चल रही हैं और चीन के ज्यादातर महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट्स तांबे की प्रचूर आपूर्ति पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। पवन टर्बाइन, सौर पैनल, पावर ग्रिड और इलेक्ट्रिक वाहनों के निर्माण में भी तांबा काफी ज्यादा महत्वपूर्ण कंपोनेट है। इससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाने में काफी मदद मिलती है। लिहाजा, इस नई खोज ने चीन के पास घरेलू तांबे का एक ऐसा विशाल भंडार खोल दिया है, जिससे वो ग्लोबल सप्लाई चेन को कंट्रोल कर सकता है। तांबे के लिए चीन चिली, पेरू और कांगो रिपब्लिक जैसे देशों पर निर्भर रहा है और इस नई खोज से इन देशों पर चीन की निर्भरता काफी कम हो जाएगी। इसके अलावा, तांबे की खोज चीनी प्रोडक्ट्स की कीमत को और कम करेगा, क्योंकि उसके पास कच्चे माल की आपूर्ति अपने ही देश से कम कीमत पर हो पाएगी।

दुनिया में अपना वर्चस्व कायम करने के लिए चीन पहले से ही बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) प्रोजेक्ट चला रहा है और इस प्रोजेक्ट में भी तांबे की खोज एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। चीन इस प्रोजेक्ट के तहत एशिया के साथ साथ अफ्रीका और यूरोपीय देशों में भी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का निर्माण कर रहा है और तांबे की खोज इन प्रोजेक्ट्स के लिए भी वरदान साबित होने वाली है। ऐसे में, घरेलू संसाधनों को सुरक्षित करके चीन ग्लोबल सप्लाई चेन में अपने जोखिमों को कम कर सकता है और बुनियादी ढांचे के डेवलपमेंट में अपने प्रभुत्व का और विस्तार कर सकता है।

तांबे की खोज से तिब्बत पर गंभीर असर
तांबे की खोज निश्चित तौर पर चीन के लिए एक बड़ी आर्थिक जीत है, लेकिन दुनियाभर के वैज्ञानिकों में चिंता इस बात को लेकर है, कि इससे चीन, तिब्बत के पर्यावरण को बर्बाद करके रख देगा। किंघई-तिब्बत पठार, दुनिया के सबसे ज्यादा पारिस्थितिकीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में से एक है, जहां अद्वितीय जैव विविधता और नाजुक इको-सिस्टम है। अगर चीन, पागलों की तरह तांबे का उत्पादन करता है, तो वो इकोलॉजी का सत्यानाश कर देगा। एक्सपर्ट्स का मानना है, कि चीन ऐसा करने में एक इंच भी पीछे नहीं हटेगा।

एक्सपर्ट्स का कहना है, कि तांबे को निकालने के लिए चीन को पूरे इलाके में इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास करना होगा, जिनमें सड़कों के साथ साथ रेल लाइनों का निर्माण शामिल है। इसके अलावा भी कई तरह के और प्रोजेक्ट शुरू करने होंगे, जिससे सीधे तौर पर स्थानीय आबादी प्रभावित होगी। अगर चीन ऐसा करता है, तो तिब्बत में मौजूद ग्लेशियर और उच्च-ऊंचाई वाली नदियों पर खतरनाक प्रभाव पड़ेगा। तांबे के खनन से जमीन के अंदर का पानी भी जहरीला होगा और इससे वन्यजीव बुरी तरह से प्रभावित होंगे और ये एक नई पर्यावरणीय आपदा को जन्म देगा।

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