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पाकिस्तान अब रूस नहीं अमेरिका से खरीदेगा हथियार… एक तीर से दो निशाने साध रहा इस्लामाबाद, भारत पर नजर

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इस्लामाबाद:

पाकिस्तान एक बार फिर से अमेरिका और उसके सहयोगियों से हथियार खरीद की तरफ बढ़ रहा है। पाकिस्तान की हथियार खरीद में प्रमुख बिचौलिया तबानी ग्रुप अमेरिकी कंपनियों के साथ काम कर रहा है। यह कंपनी पहले रूस से हथियार खरीदने में मदद करती थी। ऐसा करते हुए पाकिस्तान ने रूस पर सैन्य निर्भरता कम करने और अमेरिका के साथ संबंध सुधारने का प्रयास किया है। यह कदम भारत की अमेरिका से बढ़ती नजदीकी का मुकाबला करने की कोशिश भी है। इस बदलाव से पाकिस्तान को अमेरिका पर दबाव बनाने में मदद मिल सकती है। अमेरिका और पाकिस्तान के बीच आखिरी हथियार सौदा 2020 में हुआ था।

द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना ने अपने हथियारों के मुख्य बिचौलिए को अमेरिका और उसके सहयोगियों से हथियार खरीदने का निर्देश दिया है। यह फैसला भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती नजदीकी को देखते हुए लिया गया है। पाकिस्तान लंबे समय से रूस से हथियार खरीदता रहा है लेकिन अब वह इस रणनीति में बदलाव कर रहा है। इससे दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की उम्मीद है।

तबानी ग्रुप निभाएगा अहम रोल
तबानी ग्रुप पाकिस्तान के सबसे पुराने व्यापारिक समूहों में से एक है, जो दशकों से रूस और पाकिस्तान के बीच हथियारों के आयात में बिचौलिए की भूमिका निभाता रहा है। यह समूह को पाकिस्तान सेना के रावलपिंडी स्थित मुख्यालय रावलपिंडी के हिस्से की तरह देखा जाता है। अब यह समूह अमेरिकी संस्थाओं और कंपनियों के साथ जुड़ रहा है, जो यूक्रेन को सहायता प्रदान कर रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लामाबाद ने साफतौर पर हथियारों के मामले में मॉस्को से वाशिंगटन की ओर शिफ्ट करने का संकेत दिया है। इससे आने वाले समय में पाकिस्तान सेना की रूस पर निर्भरता में कमी आएगी। तबानी ग्रुप अमेरिकी कंपनियों के साथ मिलकर अधिक अमेरिकी हथियार और सिस्टम हासिल करने के लिए काम करेगा, जो रूसी सैन्य सामानों की जगह लेंगे।

भारत को ध्यान में रखकर फैसला!
एक्सपर्ट का मानना है कि इससे इस्लामाबाद को वॉशिंगटन पर कुछ दबाव बनाने का मौका भी मिलेगा। खासतौर भारत और अफगानिस्तान के मुद्दों पर वह अमेरिका से कुछ राहत मांग सकता है। SIPRI डेटाबेस के अनुसार, वाशिंगटन और इस्लामाबाद के बीच आखिरी हथियारों का लेनदेन 2020 में हुआ था। उस समय पाकिस्तान ने गैस टर्बाइन का ऑर्डर अमेरिका को दिया था, जिसकी डिलीवरी 2023 में हुई। पाकिस्तान लंबे समय तक अमेरिका का खास सहयोगी रहा है। वहीं रूस और भारत में दोस्ती का रिश्ता रहा है। हालांकि बीते कुछ वर्षों में इन संबंधों में बदलाव आया है।

 

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