नई दिल्ली
कथित रूप से मुस्लिम उपदेशक बनकर जाकिर नाइक साल 2016 से मलेशिया में रह रहा है। जाकिर नाइक भारत में पैसों के अवैध लेनदेन और चरमपंथ से जुड़े आरोपों में वांछित है। कई देशों में रहने के बाद ज़ाकिर नाइक मलेशिया में हैं जहां उसे स्थायी निवासी का दर्जा मिला हुआ है। भारत ने मलेशिया से ज़ाकिर नाइक को भारत प्रत्यर्पित करने के लिए कहा है। इस विवादित और कट्टरपंथी उपदेशक को देश के दो प्रमुख कट्टरपंथी इस्लामिक राजनीतिक दल पैन-मलेशियाई इस्लामिक पार्टी और यूनाइटेड मलेशिया नेशनल ऑर्गनाइजेशन का समर्थन हासिल है। ज़ाकिर नाइक पुत्राजया नामक जगह पर रहता है जो कुआलालंपुर के पास है। पुत्राजया वह जगह है जहां मलेशियाई सरकार के सरकारी दफ़्तर और आवासीय भवन हैं। इस समय सत्ता में अनवर इब्राहिम हैं,जिन्हें यूनाइटेड मलेशिया नेशनल ऑर्गनाइजेशन का समर्थन हासिल है।
जाकिर नाईक देश में भारतीयों और चीनियों का विरोध करते है, इसमें अधिकांश गैर मुसलमान है। अब अनवर इब्राहिम देश में मुसलमानों और गैर मुसलमानों के बीच जो विभाजन रेखा खींच रहे है, उसके पीछे जाकिर नाईक की जहरीली सोच नजर आती है। मलय प्रायद्वीप का पूर्वोत्तर रूढ़िवादी पैन-मलेशियाई इस्लामिक पार्टी का गढ़ रहा है। यह मलेशिया में एक इस्लामवादी राजनीतिक दल है। वैचारिक रूप से इस्लामी कट्टरवाद और मलय वर्चस्व पर केंद्रित है। वहीं यूनाइटेड मलेशिया नेशनल ऑर्गनाइजेशन, मलेशिया में एक राष्ट्रवादी दक्षिणपंथी राजनीतिक दल है। यूएमएनओ को मलेशिया की ग्रैंड ओल्ड पार्टी के रूप में जाना जाता है। देश की राजनीति में खुद को मजबूत रखने के लिए अनवर इब्राहिम,दक्षिणपंथी और इस्लामिक राजनीतिक दलों को कोई मौका नहीं देना चाहते।
मलेशिया में मलय मुस्लिम वर्चस्व की भावना को बढ़ावा
मलेशिया में उन्हें एक सुधारवादी नेता कहा जाता था जो विविधता को पसंद करता है। साल 2022 में हुए आम चुनावों में अनवर की पकातन हरापन या पीएच पार्टी के पास सत्ता में बने रहने के लिए पर्याप्त सीटें नहीं थी। देश में मलेशियाई इस्लामिक पार्टी सबसे मजबूत दल के तौर पर उभर कर विपक्ष में है जबकि दूसरे सबसे बड़े रुढ़िवादी दल यूनाइटेड मलेशिया नेशनल ऑर्गनाइजेशन के सहयोग से अनवर की सरकार चल रही है। इन दोनों दलों का ज़ाकिर नाइक को समर्थन हासिल है। नाइक का प्रभाव दूरगामी रहा है और इस उपदेशक ने पूरे देश में धार्मिक और राजनीतिक लहरें पैदा करने में कामयाबी हासिल की है। उसकी उपस्थिति ने मलेशिया में मलय मुस्लिम वर्चस्व की भावना को बढ़ावा दिया है।
जाकिर नाइक जिस मलय संस्कृति का समर्थन करता है वह दक्षिण पूर्व एशिया के लोगों की एक सांस्कृतिक पहचान है जिसे मलेशिया में राजनीतिक अवधारणा में ढालकर इस्लामिक पहचान बना दिया गया है। इस्लामिक दुनिया के बड़े नेताओं में शुमार और देश के पूर्व प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने आधी सदी तक मलय राष्ट्रवाद की राजनीति से सत्ता पर कब्जा बनाएं रखा और बाद में यह मलेशिया की राजनीति की जरूरत बन गया। विविधता पसंद यह देश अब धर्म और नस्लीय राजनीति की आशंका से ग्रस्त है तथा सुधारवादी नेता माने जाने वाले अनवर इब्राहिम भी मलय मुसलमान की पहचान के उस मार्ग पर चलने की कोशिश करने लगे है जिससे यह खूबसूरत देश चरमपंथियों के जाल में उलझ कर अस्थिर हो सकता है।
जाकिर नाइक फैला रहा है जहर
मलेशिया के एक गरीब देश से खुशहाल देश में बदलने का सफर बड़ा दिलचस्प है। साल 1970 के दशक में देश में एक नई आर्थिक नीति लाई गई थी जिसका मूल उद्देश्य राजनीतिक रूप से मलेशिया को शक्तिशाली बनाना और अन्य समुदायों में उभरतें असंतोष को खत्म कर राष्ट्रीय एकता हासिल करना था। इस आर्थिक नीति में आय के स्तर को बढ़ाकर और नस्ल को अनदेखा करते हुए सभी मलेशियाई लोगों के लिए रोजगार को बढ़ाकर गरीबी को मिटाना तथा विशिष्ट आर्थिक गतिविधियों के साथ नस्ल की पहचान को कम करने में मदद करना था, जिसके कारण मलेशियाई समाज में वर्ग स्तरीकरण देखने को मिला था। इस आर्थिक नीति के परिणाम बेहतरीन हुए और देश की विविधता को बढ़ावा मिला जिसका व्यापक फायदा यह हुआ की देश में व्यापार और पर्यटन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई। इससे अंतर जातीय संघर्षों और विवादों को कम करने में भी मदद मिली और एक बहुल समाज में राजनीतिक स्थिरता हेतु एक मजबूत भौतिक आधार मिला।
