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तुर्की और पाकिस्तान का दोस्त अब स्कूलों में पढ़ाएगा यहूदियों से भाईचारा, ऐसा करने वाला पहला मुस्लिम देश, इजरायल खुश

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बाकू

अजरबैजान ने एंटीसेमेटिज्म (यहूदी-विरोधी) की परिभाषा को अपने स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने का फैसला किया है। ऐसा करने वाला वह दुनिया का पहला मुस्लिम-बहुल देश बन गया है, जो उसकी महत्वपूर्ण प्रगति को दिखाता है। स्कूली शिक्षा में शांति और सांस्कृतिक सहिष्णुता के लिए निगरानी संस्थान (IMPACT-se) की बृहस्पतिवार को प्रकाशित रिपोर्ट से इस बारे में पता चलता है। यह रिपोर्ट मध्य एशियाई पाठ्यक्रमों पर तीन-भाग की शृंखला का हिस्सा है। इसमे उजबेकिस्तान और कजाकिस्तान की भी जांच की गई है।

यहूदियों को लेकर अच्छी बातें
अजरबैजान का ऐसा करना इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके संबंध तुर्की के एर्दोगन शासन और पाकिस्तान के साथ बहुत अच्छे हैं। रिपोर्ट में स्कूली पाठ्यक्रम के अंदर यहूदियों और इजरायल के सकारात्मक चित्रण को लेकर प्रकाश डाला गया है। पाठ्यक्रम में होलोकॉस्ट के दौरान 60 लाख यहूदियों के नरसंहार के रूप में मान्यता दी गई है। साल 2024-25 के शैक्षणिक सत्र में पाठ्यक्रम में एक महत्वपूर्ण अपडेट हुआ है, जिसके तहत इजरायल विरोधी पाठ्य को हटा दिया गया है।

इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष पर भी संतुलन
इसके साथ ही इसमें इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष के बारे में अधिक संतुलित दृष्टिकोण पेश किया गया है। अच्छी बात यह है कि पाठ्यपुस्तकों में कट्टरपंथ या इस्लामवादी कट्टर बयानबाजी के संकेत नहीं है। इसकी जगह धर्मनिरपेक्षता, विविधता और समावेश को बढ़ावा दिया गया है। हालांकि, अभी भी अजरबैजान में यहूदियों का इतिहास और व्यापक यहूदी ऐतिहासिक नैरेटिव अभी भी अनुपस्थित हैं, जो अभी भी सुधार को जरूरत को दिखाता है।

इजरायल को लेकर बड़ा बदलाव
स्टडी में अजरबैजान के राष्ट्रीय पाठ्यक्रम की 53 पाठ्यपुस्तकों का मूल्यांकन किया गया और सभी में इजरायल के चित्रण में बड़ा बदलाव देखा गया। पुरानी सामग्री में इजरायल को आक्रामक और शांति को खारिज करने वाला दिखाया गया था। अब नए पाठ्यक्रम में संघर्ष के लिए 1947 के संयुक्त राष्ट्र विभाजन योजना को अरबों के अस्वीकार करने को वजह बताया गया।

स्कूली किताबों में अरब राज्यों में भ्रष्टाचार और सैन्य विफलताओं की आलोचना की। इसके साथ अधिक तटस्थ भाषा को अपनाया गया। स्कूली किताबों में यहूदी धर्म और दूसरे अल्पसंख्यक धर्मों के प्रति सम्मान प्रदर्शित किया। उन्हें राष्ट्र के ताने-बाने के हिस्से के रूप में शामिल किया।

 

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