नई दिल्ली
दिल्ली में करीब 27 साल बाद जीत का स्वाद चखने वाली बीजेपी अब यहां मिले अनुभवों को पश्चिम बंगाल में भी इस्तेमाल करेगी। पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और बीजेपी ने अभी से वहां तैयारी शुरू कर दी है।
दिल्ली चुनाव में हर बात का रखा ख्याल
बीजेपी के एक सीनियर नेता ने कहा कि दिल्ली चुनाव में हमने इसका ख्याल रखा कि मजबूत कैंडिडेट के साथ ही चुनाव लड़ाने वाली टीम भी उतनी ही मजबूत हो। क्योंकि कई बार मजबूत टीम न होने से लोगों का समर्थन वोट में तब्दील नहीं हो पाता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली चुनाव में हमने दूसरे राज्यों के सीनियर नेताओं को जिम्मा दिया और माइक्रोमैनेजमेंट पर फोकस किया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में अरविंद केजरीवाल सरकार के खिलाफ एंटीइनकंबेंसी थी और पश्चिम बंगाल में भी वही माहौल है। हमें बस लोगों को यह बार-बार बताना है कि वे रोजमर्रा जो दिक्कतें झेल रहे हैं, वह ममता बनर्जी की सरकार को बदलकर ही दूर हो सकती है।
घर-घर बताएंगे भ्रष्टाचार का किस्सा
बीजेपी नेता ने कहा कि भ्रष्टाचार का मुद्दा भी दिल्ली चुनाव में बड़ा फैक्टर रहा। पश्चिम बंगाल में भी हम घर घर तक ममता सरकार के भ्रष्टाचार के किस्से बताएंगे। पश्चिम बंगाल में 2011 से ही ममता बनर्जी की सरकार है। तब टीएमसी ने 34 साल पुराने लेफ्ट के किले को ढहा कर पहली बार सत्ता हासिल की थी। 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने पश्चिम बंगाल की दो सीटें जीती और तब से ही वहां अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए लगातार कोशिश कर रही है।
2016 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को तीन सीटें मिली लेकिन वोट शेयर 10 पर्सेंट रहा, जो बीजेपी का उत्साह बढ़ाने के लिए काफी था। 2019 के लोकसभा चुनाव में तो बीजेपी ने 42 सीटों में से 18 सीटों पर जीत दर्ज की, जो बीजेपी का पश्चिम बंगाल में अब तक का सबसे अच्छा प्रदर्शन रहा। हालांकि 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी अपनी सत्ता बचाने में कामयाब रही। लेकिन बीजेपी 77 सीटें जीतकर मुख्य विपक्षी पार्टी बन गई। 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 12 सीटें ही जीत पाई। लेकिन लेफ्ट और कांग्रेस की स्थिति को देखते हुए अभी तो ये लग रहा है कि पश्चिम बंगाल में मुख्य मुकाबला टीएमसी और बीजेपी के बीच हो सकता है।
एक मुद्दा बदल देता है रुख
बीजेपी के एक सीनियर नेता ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि चुनाव में एक मुद्दा ही पूरा रुख बदल देता है और लोगों के मूड को समझना बहुत जरूरी होता है। उन्होंने दिल्ली अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि आम आदमी पार्टी के सीनियर नेता जितना ज्यादा बोल रहे थे उतना उन्हें नुकसान हुआ और हमें फायदा मिला, वे लोगों को मूड भांपने में असफल रहे। उन्होंने कहा कि जैसे ओडिशा में बीजेपी ने बाहरी को मुद्दा बनाया और वह क्लिक कर गया। तब बीजेपी ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री नवीन पटनायक के बेहद ख़ास रहे वीके पांडियन को मुद्दा बनाया था। पश्चिम बंगाल के लिए भी बीजेपी इसी तरह की कोई रणनीति पर काम कर सकती है।
