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Wednesday, April 1, 2026
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ट्रंप ने यूक्रेन के सामने रखी ऐसी डिमांड, अमेरिका का गुलाम बन जाएगा जेलेंस्की का देश, प्रथम विश्व युद्ध की वर्साय संधि से हो रही तुलना

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कीव/वॉशिंगटन:

डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति के सामने ऐसी मांग रखी है, जो अगर पूरी की जाती है और रूस के साथ युद्ध में तबाह जेलेंस्की का देश अमेरिका आर्थिक उपनिवेश बन जाएगा। ट्रंप ने यूक्रेन से 500 अरब डॉलर के मुआवजे की मांग की है। इसके लिए उन्होंने यूक्रेन के महत्वपूर्व खनिजों पर नियंत्रण की बात की है, लेकिन यह मांग इससे कहीं आगे जाती है। इसमें यूक्रेन के बंदरगाहों और बुनियादी ढांचे से लेकर तेल और गैस के बड़े संसाधन आधार तक सब कुछ शामिल हैं। ब्रिटिश अखबार टेलीग्राफ ने अपनी रिपोर्ट में ये दावा करते हुए बताया है कि अमेरिका ने एक सप्ताह पहले जेलेंस्की के कार्यालय में अनुबंध की शर्तें भेजी हैं।

अमेरिकी प्रस्ताव से घबराया कीव
टेलीग्राफ ने अनुबंध का एक ड्राफ्ट हासिल किया है, जिस पर विशेषाधिकार प्राप्त और गोपनीय लिखा है। इस पर 7 फरवरी 2025 की तारीख दर्ज है। इसकी शर्तें यूक्रेन को अमेरिका के आर्थिक उपनिवेश बनाने के बराबर हैं, जो कानूनी तौर पर हमेशा के लिए हैं। इस दस्तावेज ने कीव में घबराहट पैदा कर दी है।

यूक्रेन के संसाधनों पर अमेरिका का कब्जा
समझोते में ‘खनिज संसाधन, तेल और गैस संसाधन, बंदरगाह, अन्य बुनियादी ढांचा समेत यूक्रेन के संसाधनों से जुड़े आर्थिक मूल्य’ को शामिल किया गया है। इसमें कहा गया है कि समझौता न्यूयॉर्क के कानून से शासित होगा। अमेरिका, यूक्रेन द्वारा संसाधनों के दोहन से मिलने वाले राजस्व का 50 प्रतिशत और संसाधनों के भविष्य के मुद्रीकरण के लिए तीसरे पक्ष को जारी किए गए सभी नए लाइसेंसों के वित्तीय मूल्य का 50 प्रतिशत लेगा।

टेलीग्राफ ने अनुबंध को लेकर वार्ता से जुड़े एक सूत्र के हवाले से बताया कि ‘उस खंड का अर्थ है, पहले हमें भुगतान करें फिर अपने बच्चों को खिलाएं।’ इसमें कहा गया है भविष्य के सभी लाइसेंसों के लिए और निर्यात योग्य खनिजों की खरीद के लिए अमेरिका को पहले इनकार का अधिकार होगा। वॉशिंगटन को संप्रभु प्रतिरक्षा के साथ ही यूक्रेन की अधिकांश वस्तु और संसाधन अर्थव्यवस्था पर लगभग पूर्ण नियंत्रण प्राप्त होगा।

जर्मनी के साथ वर्साय की संधि से तुलना
अमेरिका के इस प्रस्ताव की तुलना प्रथम विश्वयुद्ध के बाद जर्मनी के साथ की गई अपमानजनक वर्साय की संधि से की जा रही है। टेलीग्राफ ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, अगर यह मसौदा स्वीकार कर लिया जाता है, तो ट्रंप की मांगें वर्साय संधि में जर्मनी पर लगाए मुआवजे की तुलना में यूक्रेनी जीडीपी के उच्च हिस्से के बराबर होंगी। ट्रंप प्रशासन की तरफ से भेजे गए प्रस्ताव की शर्ते देखकर लगता है कि इसे अमेरिकी विदेश विभाग या वाणिज्य विभाग ने नहीं, बल्कि निजी वकीलों ने लिखा है।

जेलेंस्की ने खुद रखा था प्रस्ताव
रिपोर्ट के अनुसार, बीते साल सितम्बर में ट्रंप टॉवर की यात्रा के दौरान राष्ट्रपति जेलेंस्की ने खुद यूक्रेन के दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और महत्वपूर्ण खनिजों में अमेरिका को प्रत्यक्ष हिस्सेदारी देने का विचार प्रस्तावित किया था। इसका उद्येश्य हथियारों की निरंतर आपूर्ति का रास्ता सुगम हो सके। उन्होंने अनुमान लगाया था कि इससे अमेरिकी कंपनियां जमीन पर काम करना शुरू कर देंगी, जो पुतिन को फिर से हमला करने से रोक देगा। हालांकि, अमेरिकी प्रस्ताव ने जेलेंस्की को असहज कर दिया है और उन्होंने अधिकारियों से इस पर हस्ताक्षर न करने को कहा है।

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