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Wednesday, April 1, 2026
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सऊदी अरब से रक्षा संबंधों को मजबूत करेगा पाकिस्तान, मध्य-पूर्व में भारत के लिए खतरे की घंटी

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इस्लामाबाद

पाकिस्तान और सऊदी अरब रक्षा संबंधों को और ज्यादा मजबूत करने जा रहे हैं। दोनों देशों के शीर्ष सैन्य अधिकारियों की हाल में ही रियाद में हुई बैठकों के दौरान रक्षा और सुरक्षा सहयोग को गहरा करने पर सहमति बनी है। इस दौरान दोनों देश सैन्य अभ्यासों की संख्या को बढ़ाएंगे। एक दूसरे के देशों में सैनिकों की तैनाती भी करेंगे और सऊदी अरब भविष्य में पाकिस्तानी छोटे हथियारों की खरीद भी करेगा। इसके बदले में पाकिस्तान को सऊदी अरब से विदेशी मुद्रा की प्राप्ति होगी, जिससे देश की कंगाली को दूर करने के प्रयास किए जाएंगे।

पाकिस्तान के शीर्ष सैन्य अधिकारी ने किया सऊदी का दौरा
पाकिस्तानी सेना की प्रॉपगैंडा विंग इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (आईएसपीआर) ने बताया कि यह चर्चा पाकिस्तान-सऊदी संयुक्त सैन्य सहयोग समिति (जेएमसीसी) की बैठक के आठवें दौर के हिस्से के रूप में हुई, जिसमें पाकिस्तान के ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के अध्यक्ष जनरल साहिर शमशाद मिर्जा ने भाग लिया। अपनी यात्रा के दौरान, मिर्जा ने सऊदी अरब सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ के अध्यक्ष एयर चीफ मार्शल फय्याद अल रुवैली और सऊदी सहायक रक्षा मंत्री मेजर जनरल तलाल बिन अब्दुल्ला अल-ओतैबी से मुलाकात की।

सैन्य सहयोग बढ़ेंगे पाकिस्तान और सऊदी अरब
आईएसपीआर के अनुसार, उनकी बातचीत मिलिट्री ट्रेनिंग इनिशिएटिव, ज्वाइंट एक्सचेंज प्रोग्राम और अन्य रक्षा-संबंधी गतिविधियों सहित चल रहे सैन्य सहयोग पर केंद्रित थी। आईएसपीआर ने एक बयान में कहा, “सैन्य नेतृत्व ने दोनों भाईचारे वाले देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग को और बढ़ाने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।” सऊदी अरब के सशस्त्र बलों के मुख्यालय में पहुंचने पर, सऊदी सैन्य टुकड़ी द्वारा मिर्जा का गार्ड ऑफ ऑनर के साथ स्वागत किया गया। इस यात्रा ने पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच दीर्घकालिक रक्षा साझेदारी को उजागर किया, जो साझा सुरक्षा चिंताओं और रणनीतिक हितों से प्रेरित होकर दशकों से विकसित हुई है।

सऊदी अरब का फायदा उठा रहा पाकिस्तान
घनिष्ठ सैन्य सहयोग दोनों देशों के बीच घनिष्ठ सैन्य सहयोग का इतिहास रहा है। 1990-1991 के खाड़ी युद्ध के दौरान, पाकिस्तान ने संभावित इराकी आक्रमण से सऊदी अरब की रक्षा के लिए सैनिकों को तैनात किया था। तब से, वे नियमित रूप से संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रशिक्षण कार्यक्रम और खुफिया जानकारी साझा करने के प्रयासों में लगे हुए हैं। हालांकि पाकिस्तान ने सऊदी अरब को सैन्य सहायता के बदले उधारी में तेल खरीदने और कर्ज लेने जैसे कारनामें भी किए हैं।

भारत की कैसे बढ़ेगी टेंशन
सऊदी अरब अगर सैन्य सहयोग के लिए पाकिस्तान पर निर्भरता को बढ़ाता है तो इससे भारत की टेंशन बढ़ सकती है। दरअसर, खाड़ी देशों में सऊदी अरब भारत का बड़ा व्यापारिक साझेदार है। इसके अलावा भारत सऊदी अरब के रास्ते एक अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्ग भी बना रहा है, जो यूरोप तक फैला होगा। इससे भारत को व्यापार में सहूलियतें मिलेगी। ऐसे में अगर सऊदी अरब में पाकिस्तानी सेना की तैनाती बढ़ती है तो भारत परेशान हो सकता है।

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