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Wednesday, March 4, 2026
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यूक्रेन युद्ध: अमेरिकी प्रतिबंधों की मार, दोस्‍त रूस में पैसे के लिए भटक रहे भारतीय, चीनियों को नो टेंशन

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मास्‍को

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही भारत और रूस के बीच रेकॉर्ड पैमाने पर व्‍यापार हो रहा है। भारत रूस से जमकर तेल खरीद रहा है और सामानों को आदान-प्रदान हो रहा है। इस बीच रूस में रह रहे भारतीयों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो गई है। दरअसल, यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद अमेरिका और अन्‍य पश्चिमी देशों ने रूस के खिलाफ कई तरह के प्रतिबंध लगा दिए हैं। इससे भारत और रूस के बीच पैसे का आदान प्रदान नहीं हो पा रहा है। वीजा और मास्‍टरकार्ड के काम नहीं करने से भारतीय लोग ट्रांजेक्‍शन नहीं कर पा रहे हैं। इसकी सबसे ज्‍यादा मार छात्रों पर पड़ी है जो रूस पढ़ने के लिए आए हैं। वहीं चीन के लोगों की बात करें तो वे आसानी से पैसा निकाल और भेज पा रहे हैं। आइए समझते हैं पूरा मामला…

रूस में अंतरराष्‍ट्रीय छात्रों के समन्‍वयक डॉक्‍टर सिद्धार्थ ने नवभारत टाइम्‍स डॉट कॉम से भारतीयों को हो रही परेशानी पर खुलकर अपनी बात कही है। डॉक्‍टर सिद्धार्थ का कहना है कि पीएम मोदी जब मास्‍को आए थे तब रूसी राष्‍ट्रपति ने मजाक में कहा था कि उन्‍हें पीएम मोदी को समझने के लिए ट्रांसलेटर की जरूरत नहीं है। इसकी वजह यह है कि पीएम मोदी से उनका भावनात्‍मक संबंध है। भारतीय मूल के डॉक्‍टर सिद्धार्थ कई साल रूस में रहते हैं। उन्‍होंने कहा कि दावा किया गया था कि पश्चिमी देशों के प्रतिबंध आम नाग‍रिकों के लिए नहीं हैं लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। रूस में जमीनी हालात बेहद खराब हैं।

चीन के लोगों को नहीं हो रही है कोई दिक्‍कत
डॉक्‍टर सिद्धार्थ ने बताया कि हाल ही में जब भारत के दो विमानों को तकनीकी दिक्‍कत की वजह से अचानक से रूस में उतरना पड़ा तब भारतीय यात्री पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों की वजह से पानी या खाना तक नहीं खरीद सके थे। भारतीय यात्रियों के डेबिट या क्रेडिट कार्ड काम ही नहीं कर रहे थे। इससे भारतीय यात्रियों को काफी दिक्‍कत हुई थी। उन्‍होंने बताया कि करीब 25 हजार भारतीय छात्र रूस में इस समय पढ़ाई कर रहे हैं। भारतीय छात्रों को अपने रुपये को क्रिप्‍टोकरेंसी या इंटरनेट मनी एक्‍सचेंज की मदद से बदलना पड़ता है। इससे भारतीय छात्रों के साथ धोखाधड़ी का खतरा काफी ज्‍यादा हो जाता है।

भारतीय डॉक्‍टर सिद्धार्थ ने कहा कि इस तरह के पैसे का आदान प्रदान सरकार की ओर से नियंत्रित नहीं है। यही नहीं अगर छात्रों के साथ कोई धोखाधड़ी होती है तो उन्‍हें यह नहीं पता होता है कि किससे संपर्क करना होगा। कई बार तो ये एक्‍सचेंज सर्विस रूस और भारत के बाहर से ऑपरेट होती है। उन्‍होंने बताया कि भारतीय जहां परेशान हो रहे हैं, वहीं रूस में रह रहे चीनी छात्रों को इस तरह की कोई दिक्‍कत नहीं होती है। चीनी छात्र अपने ‘यूनियन पे’ कार्ड का इस्‍तेमाल कर पाते हैं। उन्‍होंने बताया कि भारत और रूस रूपे और मीर जो रूसी सिस्‍टम है, उसे जोड़ा जा सकता है। उन्‍होंने कहा कि यह अच्‍छी खबर है क्‍योंकि भारत और रूस दोनों ही तीसरे देश पर निर्भर नहीं होना चाहते हैं। उन्‍होंने कहा कि भारत में बड़े पैमाने पर रूसी पर्यटक आते हैं और अगर पेमेंट की दिक्‍कत को दूर कर लिया जाए तो इससे भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था को काफी फायदा होगा।

 

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