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Wednesday, April 1, 2026
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फ्रांस ने भारत के दोस्त को दिया झटका, ‘खलीफा’ एर्दोगन के हाथ लगी खतरनाक मेटियोर मिसाइल, तुर्की की बढ़ेगी ताकत

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पेरिस

फ्रांस ने भारत के दोस्त ग्रीस को बड़ा झटका देते हुए साफ कर दिया है कि वह तुर्की को मेडियोर एयर-टू-एयर मिसाइलों की बिक्री की राह में रोड़ा नहीं बनेगा। ग्रीस ने तुर्की को इन मिसाइलों को देने को लेकर खुलकर आपत्ति जताई थी, उसके बावजूद फ्रांस ने इस पर रोक लगाने से मना कर दिया। एथेंस में इसे एक प्रमुख यूरोपीय सहयोगी के धोखे के रूप में देखा जा रहा है। फ्रांस के सशस्त्र बल मंत्री सेबेस्टिय लेकोर्नू ने संसदीय सत्र में इस मुद्दे को सीधे संबोधित किया।

लेकोर्नू ने संसद में बताया कि पेरिस के पास इस सौदे को रोकने का अधिकार नहीं है। लेकोर्नू ने स्पष्ट किया कि यह फ्रांस की लड़ाई नहीं है। उन्होंने कहा, ‘यह सच है कि ग्रीस ने फ्रांस से तुर्की को मेटियोर मिसाइलों की बिक्री को रोकने के लिए कहा था, लेकिन यह राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रोन की सरकार के अधिकार क्षेत्र से बाहर है।’

फ्रांस ने बताई न रोकने की वजह
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि फ्रांस ब्रिटिश हथियारों के निर्यात को नियंत्रित नहीं करता है, जिससे पेरिस इस सौदे से दूर हो गया। लेकोर्नू ने आगे कहा कहा कि ‘हम तुर्की को यह प्लेटफॉर्म नहीं बेच रहे हैं।’ उन्होंने फ्रांस के रुख पर जोर दिया कि तुर्की के लिए कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है न कि हस्तक्षेप।

क्यों फ्रांस नहीं कर रहा हस्तक्षेप?
बुल्गारिया मिलिट्री डॉट कॉम की रिपोर्ट के अनुसार, फ्रांस के हस्तक्षेप न करने के पीछे का कारण अंतरराष्ट्रीय हथियार निर्माण और निर्यात नियमों का जटिल जाल है। मेटियोर मिसाइल, एक अत्याधुनिक एयर-टू-एयर हथियार है जिसे दृश्य-सीमा से परे युद्ध के लिए डिजाइन किया गया है। इसका निर्माण MBDA द्वारा किया जाता है, जो एक बहुराष्ट्रीय संस्था है। इसमें फ्रांस एयरबस में अपनी हिस्सेदारी के माध्यम से ब्रिटेन के BAE सिस्टम्स और इटली के लियोनार्डो के साथ एक भूमिका निभाता है। इस भागीदारी के बावजूद मिसाइल के विकास का नेतृत्व ब्रिटेन ने किया, जिसमें BAE सिस्टम्स ने अग्रणी भूमिका निभाई। मेटियोर को शुरू में छह देशों – ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन और स्वीडन ने कमीशन किया था ।

यूरोफाइटर टाइफून पर होनी है तैनाती
तुर्की को मेटियोर मिसाइलों की बिक्री यूरोफाइटर टाइफून से जुड़ी हुई है, जो ब्रिटेन और जर्मनी के प्रभुत्व वाले एक अलग संगठन द्वारा निर्मित एक लड़ाकू जेट है। लेकोर्नू का कहना है कि फ्रांस एमबीडीए में योगदान देता है, लेकिन यह ब्रिटिश नेतृत्व वाले निर्यात की शर्तों को निर्धारित नहीं करता है। टाइफून सौदा और विस्तार से मेटियोर मिसाइलें, लंदन के अधिकार क्षेत्र में आती हैं, पेरिस के नहीं। यूरोफाइटर टाइफून को हासिल करने की राह में भी कई सालों तक अंकारा को मुख्य रूप से जर्मनी से बाधाओं का सामना करना पड़ा, जो यूरोफाइटर संघ में एक प्रमुख खिलाड़ी है। जर्मनी ने मानवाधिकार संबंधी चिंताओं और सीरिया में अंकारा के सैन्य अभियानों के कारण तुर्की को हथियारों की बिक्री पर रोक लगा दी थी।

मेटियोर मिसाइल की ताकत
मेटियोर अपने आप में एक तकनीकी चमत्कार है, जिसे अपनी श्रेणी में किसी भी चीज़ से बेहतर बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। MBDA से विकसित यह एक सक्रिय रेडार-निर्देशित, हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है जिसमें एक थ्रॉटल करने योग्य रैमजेट इंजन है। अपनी पूरी उड़ान के दौरान यह मैक 4 से अधिक गति बनाए रखने में सक्षम है। इसकी रेंज 100 किलोमीटर से अधिक अनुमानित है।

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