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रतन टाटा की एक इच्छा हुई पूरी, किसे मिली उनका फाउंडेशन संभालने की अहम जिम्मेदारी?

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नई दिल्ली

टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन को रतन टाटा एंडोमेंट फाउंडेशन (RTEF) का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। RTEF एक सेक्शन 8 कंपनी है। दिवंगत रतन टाटा ने इसे स्थापित किया था। उन्होंने अपनी अधिकांश संपत्ति दान और परोपकारी कार्यों के लिए इस फाउंडेशन को दे दी थी। उनकी इच्छा थी कि चंद्रशेखरन इसके चेयरमैन बनें। सूत्रों के अनुसार रतन टाटा की वसीयत के एग्जीक्यूटर्स ने बाहरी कानूनी विशेषज्ञों से राय लेने के बाद चंद्रशेखरन को नियुक्त किया। टाटा संस के चेयरमैन को टाटा ट्रस्ट का चेयरमैन बनने से रोकने वाला नियम यहां लागू नहीं होता क्योंकि यह फाउंडेशन ट्रस्ट से जुड़ा नहीं है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा इस फाउंडेशन का हिस्सा नहीं होंगे।

डेरियस खंबाटा, मेहली मिस्त्री और शिरीन और डिएना जेजीभॉय दिवंगत रतन टाटा की वसीयत के एग्जीक्यूटर हैं। रतन टाटा चाहते थे कि चंद्रशेखरन इस फाउंडेशन को लीड करें। चंद्रशेखरन जल्द ही फाउंडेशन के मैनेजमेंट स्ट्रक्चर को औपचारिक रूप देंगे। साथ ही वह उस टीम को भी अंतिम रूप देंगे जो इसे चलाएगी। रतन टाटा की संपत्ति का वितरण मार्च के अंत में वसीयत के प्रोबेट के लिए जमा होने और बॉम्बे हाईकोर्ट से प्रमाणित होने के बाद ही हो सकता है। इस प्रक्रिया में छह महीने तक का समय लग सकता है। अदालत से वसीयत को मंजूरी मिलने के बाद फाउंडेशन को टाटा संस और ग्रुप की कंपनियों में रतन टाटा की हिस्सेदारी के साथ-साथ टाटा टेक्नोलॉजीज और टाटा डिजिटल में होल्डिंग से धन प्राप्त होगा।

रतन टाटा की नेटवर्थ
चंद्रशेखरन ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की। रतन टाटा ने आर आर शास्त्री और बुर्जिस तारापोरवाला को RTEF के होल्डिंग ट्रस्टी और जमशेद पोंचा को सीईओ नियुक्त किया था। वह चाहते थे कि फाउंडेशन टाटा ट्रस्ट्स से स्वतंत्र रहे। लेकिन उन्होंने RTEF बोर्ड में ट्रस्टियों की नियुक्ति को लेकर कोई स्पष्ट लिखित निर्देश नहीं दिया था। Burgeon Law के सीनियर पार्टनर केतन मुखीजा ने कहा कि चंद्रशेखरन की नियुक्ति एक रणनीतिक प्रशासनिक कदम है। यह फाउंडेशन की टाटा ट्रस्ट्स से स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है।

रतन टाटा का पिछले साल अक्टूबर में 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। उनके पास टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में सीधे 0.83% की हिस्सेदारी थी। विभिन्न अनुमानों के अनुसार उनकी कुल संपत्ति लगभग ₹8,000 करोड़ थी। सूत्रों का कहना है कि उनकी वास्तविक संपत्ति इससे अधिक हो सकती है। टाटा संस के शेयरों के अलावा उनके पास फेरारी और मसेराती सहित लग्जरी कारों का एक बेड़ा, महंगी पेंटिंग, स्टार्टअप्स में शेयर और अन्य निवेश भी थे। उनकी पर्सनल इनवेस्टमेंट कंपनी RNT एसोसिएट्स के पास वित्त वर्ष 2023 तक ₹186 करोड़ का निवेश था जिसकी वैल्यू अब कई गुना बढ़ गई है।

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