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परमाणु बम से लैस ताकतों के बीच सीधे हो सकती है जंग, रूस ने दी डरावनी चेतावनी, जानें किसे बताया सबसे बड़ा खतरा

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मॉस्को

दुनिया परमाणु युद्ध के मुहाने पर खड़ी है। रूस के एक वरिष्ठ नेता ने चेतावनी दी है कि परमाणु बम से लैस दो ताकतों के बीच सीधी जंग शुरू हो सकती है। उन्होंने कहा कि इसकी संभावना खतरनाक स्तर पर पहुंच गई है। रूसी उप विदेश मंत्री सर्गेई वर्शिनिन ने उच्च स्तरीय निरस्त्रीकरण सम्मेलन के दौरान दुनिया को इस खतरे के बारे में आगाह किया। वर्शिनिन ने कहा, जैसा कि हम संयुक्त राष्ट्र की 80वीं वर्षगांठ के करीब पहुंच रहे हैं, हम खुद को अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के बीच एक गंभीर संकट के बीच पाते हैं।

वर्शिनिन ने इस खतरे के लिए वैश्विक व्यवस्था पर प्रमुख शक्तियों के अपना प्रभाव बनाए रखने की कोशिश को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि वैश्विक प्रभुत्व हासिल करने की कुछ देशों की इच्छा ने समान और अविभाज्य सुरक्षा के सिद्धांत का उल्लंघन किया है। रूसी नेता ने इन शक्तियों पर दूसरे देशों के हितों की अवहेलना करने, पिछले समझौतों को कमजोर करने और सैन्य श्रेष्ठता के लिए प्रयास करने का आरोप लगाया।

यूक्रेन और मध्य पूर्व के संकट ने बढ़ाया खतरा
उन्होंने परमाणु शक्तियों के बीच खतरे को यूक्रेन और मध्य पूर्व में चल रहे संकटों से जोड़ा। वर्शिनिन ने तर्क दिया कि यूक्रेन संघर्ष पश्चिमी देशों की आक्रामक नीतियों से उपजा है। उन्होंने कीव को लंबी दूरी के हथियारों की लगातार आपूर्ति की आलोचना की और कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों ने स्थिति को और खराब कर दिया है।

तनावों के बावजूद वर्शिनिन ने बातचीत के माध्यम से समाधान के पक्ष में रूस का रुख दोहराया। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी संवाद आपसी सम्मान और समानता पर आधारित होना चाहिए, जिसका उद्देश्य अस्थायी युद्धविराम के बजाय स्थायी शांति हो। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्थिरता प्राप्त करने के लिए क्षेत्र के सभी राज्यों और लोगों के वैध हितों पर विचार किया जाना चाहिए।

रूस और अमेरिका के बीच टकराव का खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, प्रत्यक्ष टकराव का सबसे बड़ा खतरा रूस और अमेरिका के बीच है। दोनों देशों के पास सबसे बड़ा परमाणु भंडार है। यूक्रेन में चल रहे युद्ध के कारण उनके तनावपूर्ण संबंध और भी तनावपूर्ण हो गए हैं, जहां रूस ने अक्सर नाटो पर शत्रुता बढ़ाने का आरोप लगाया है। वॉशिंगटन और उसके सहयोगियों ने यूक्रेन के लिए सहायता जारी रखी, जिसे मॉस्को उकसावे के रूप में देखता है। हालांकि, ट्रंप के आने के बाद स्थिति बदली है, जिन्होंने युद्ध शुरू करने के लिए रूस से सीधी बात की है। इसके साथ ही ट्रंप ने यूक्रेन को नाटो की सदस्यता से भी इनकार किया है। एक ऐसा कदम जिसे उन्होंने रूस के यूक्रेन पर आक्रमण की प्रमुख वजह बताया।

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