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Tuesday, March 31, 2026
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म्यांमार में चीन का दोहरा खेल, भारत के घेरने के लिए बनाया ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स’ प्लान, निशाने पर मणिपुर!

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नेपीडा:

म्यांमार बीते काफी समय से गृहयुद्ध से जूझ रहा है। जंग का मैदान बने म्यांमार में एक ओर अराकान आर्मी और दूसरे विद्रोही गुट हैं तो दूसरी तरफ जुंटा शासन की सेना है। म्यांमार में चल रही अराजकता का असर चीन, बांग्लादेश, भारत जैसे पड़ोसी देशों पर भी हो रहा है। वहीं चीन जैसे देश म्यांमार की अस्थिरता का इस्तेमाल अपने फायदे और भारत को नुकसान पहुंचाने के लिए करने की कोशिश में जुटे हैं। इससे भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र की सुरक्षा पर खतरा पैदा हो रहा है। खुफिया एजेंसियों ने म्यांमार में चीन के बढ़ते प्रभाव पर भारत को चेताया है।

CNN-News18 की रिपोर्ट के अनुसार, खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि म्यांमार में चीन का बढ़ता प्रभाव भारत के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। खासकर मणिपुर जैसे राज्य संवेदनशील है, जहां लंबे समय से अशांति है और ये चीन के निशाने पर हैं। एजेंसिया का कहना है कि चीन की आक्रामक गतिविधियों को देखते हुए भारत और म्यांमार के बीच 1,693 किलोमीटर लंबी सीमा पर कड़ी निगरानी की जरूरत है।

चीन लगा रहा है रडार सिस्टम
चीन ने म्यांमार की सीमा से लगे युन्नान प्रांत में अत्याधुनिक रडार सिस्टम (LPAR, लार्ज फेज्ड अरे रडार) लगाए हैं। इससे चीन पूरे क्षेत्र पर नजर रख सकता है। ऐसा करते हुए चीन सैन्य गतिविधियों के साथ म्यांमार में अपना आर्थिक और राजनीतिक दबदबा बढ़ा रहा है, इससे क्षेत्र में अस्थिरता पैदा हो रही है। चीन का म्यांमार में आर्थिक प्रभाव पहले ही काफी ज्यादा है। दोनों देशों के बीच व्यापार 2 अरब डॉलर से ज्यादा है। इसके उलट भारत और म्यांमार के बीच व्यापार 1 अरब डॉलर का है।

चीन का म्यांमार में प्रभाव आर्थिक मदद से आगे बढ़कर है। वह म्यांमार की सैन्य जुंटा के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है और अराकान आर्मी जैसे सशस्त्र समूहों को हथियार भी देता है। यानी वह दोनों तरफ अपना खेल खेलने में लगा है। इससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती है, जिसका असर मणिपुर पर सबसे ज्यादा हो सकता है। यह भारत-म्यांमार-थाईलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग जैसी पहल को भी कमजोर करता है, जो बहुत हद तक मणिपुर में शांति और स्थिरता पर निर्भर करती है।

भारत को घेरने का प्लान
चीन की रणनीति स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स सिद्धांत पर है। इस प्लान के तहत चीन सहयोगी देशों और रणनीतिक ठिकानों का नेटवर्क बनाकर भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है। इन गतिविधियों से चीन को मलक्का जलडमरूमध्य से बचते हुए हिंद महासागर तक पहुंचने के वैकल्पिक रास्ते मिल जाते हैं। म्यांमार पर चीन का प्रभाव बढ़ने का मतलब भारत का असर कम होना है। इससे भारत की एक्ट ईस्ट नीति बेअसर हो सकती है।

खुफिया एजेंसियों का कहना है कि चीन के म्यांमार में प्रभाव का असर मणिपुर में साफ है। UWSA जैसे म्यांमार-स्थित समूहों के भारतीय उग्रवादी समूहों के साथ पुराने संबंध रहे हैं। चीन के बढ़ते प्रभाव से सीमा पार हथियारों और लड़ाकों की आवाजाही और बढ़ेगी। शीर्ष खुफिया अधिकारियों का मानना है कि भारत को म्यांमार में अपने हितों का ध्यान रखना जरूरी है।

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