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तहव्वुर राणा के प्रत्यर्पण का रास्ता साफ, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका

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नई दिल्ली

26/11 मुंबई हमलों के आरोपी तहव्वुर राणा को भारत प्रत्यर्पित किए जाने के एक कदम और करीब पहुंच गया है, क्योंकि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने उसकी आपातकालीन स्थगन याचिका खारिज कर दी है। उसके वकील ने अब सीधे अमेरिकी मुख्य न्यायाधीश जॉन रॉबर्ट्स के समक्ष अपील की है।

राणा ने भारत में अपने प्रत्यर्पण पर आपातकालीन रोक लगाने के लिए शीर्ष अमेरिकी अदालत का रुख किया था , जिसमें कहा गया था कि उसकी धार्मिक पहचान और सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण उसे भारत में प्रताड़ित किया जाएगा और मार दिया जाएगा। न्यायमूर्ति एलेना कैगेन ने उसके आवेदन को अस्वीकार कर दिया, जिसके बाद उसके वकील ने सीधे मुख्य न्यायाधीश के पास अपील की।

राणा की याचिका में कहा गया है कि वह पाकिस्तानी मूल का मुसलमान है और पाकिस्तानी सेना का पूर्व सदस्य है, जिसके कारण उसे हिरासत में यातनाएं दी जा सकती हैं तथा उसकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए उसकी मृत्यु भी हो सकती है। क्योंकि वो कई रोगों से ग्रसित है।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि भारत में सरकार तेजी से निरंकुश होती जा रही है और उन्होंने ह्यूमन राइट्स वॉच 2023 वर्ल्ड रिपोर्ट का हवाला दिया, जिसमें भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पर धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों के भेदभाव का आरोप लगाया गया है।

राणा के प्रत्यर्पण पर ट्रम्प की घोषणा
तहव्वुर राणा पाकिस्तानी-अमेरिकी आतंकवादी डेविड कोलमैन हेडली का एक जाना-माना सहयोगी है, जो 26 नवंबर, 2008 को मुंबई में हुए हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक था, जिसमें 174 लोग मारे गए थे। उसे प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) का समर्थन करने के लिए अमेरिका में दोषी ठहराया गया था और भारत लंबे समय से उसके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले महीने व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राणा के भारत प्रत्यर्पण की पुष्टि की थी। उन्होंने कहा था कि तहव्वुर राणा भारत वापस जाएगा, जहां उसे न्याय का सामना करना पड़ेगा। पीएम मोदी ने भी इस कदम के लिए ट्रंप का आभार व्यक्त किया।

भारत लाए जाने के बाद राणा को विशेष राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) अदालत में पेश किए जाने की उम्मीद है, जिसके बाद एनआईए पूछताछ के लिए उसकी हिरासत की मांग करेगी। प्रत्यर्पण को भारतीय एजेंसियों और सरकार के लिए एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है।

राणा को डेनमार्क में विफल हमले के लिए रसद सहायता प्रदान करने के लिए दोषी ठहराया गया था, लेकिन भारत में आतंकवादी गतिविधियों के लिए उसे बरी कर दिया गया था। जिला अदालत ने राणा को 14 साल की कैद की सजा सुनाई। आतंकवादी डेविड हेडली ने भी अदालत में राणा के खिलाफ गवाही दी।

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