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Wednesday, March 18, 2026
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भाषा से कैसी नफरत… हिंदी का अलग महत्व, NEP विवाद के बीच पहले पवन कल्याण और अब नायडू ने ऐसे समझाया

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नई दिल्ली

नई शिक्षा नीति में तीन भाषा फॉर्मूले को लेकर केंद्र और तमिलनाडु सरकार आमने-सामने है। तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन ने हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में लागू करने से साफ इनकार कर दिया है। इतना ही नहीं, स्टालिन ने हाल ही में बजट दस्तावेज में रुपये के चिह्न को भी तमिल भाषा से बदल दिया था।

इस पूरे घटनाक्रम को एक बार फिर दक्षिण भारत में हिंदी को लेकर परंपरागत विरोध के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, केंद्र सरकार ने साफ कहा है कि वह इस मुद्दे पर चर्चा के लिए पूरी तरह से तैयार है। इस बीच दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश से हिंदी के समर्थन के साथ ही सधा हुआ रुख देखने को मिल रहा है। पहले पवन कल्याण और अब आंध्र प्रदेश के सीएम चंद्रबाबू नायडू ने भाषा विवाद को लेकर विरोध से अलग रुख दिखाया है।

भाषा नफरत के लिए नहीं है: नायडू
इस पूरे विवाद के बीच आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार को टिप्पणी करते हुए कहा कि ‘राष्ट्रीय भाषा’ दिल्ली में हिंदी में धाराप्रवाह बातचीत को सक्षम करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि केवल वे लोग ही दुनिया भर में आगे बढ़ रहे हैं जो अपनी मातृभाषा में अध्ययन करते हैं।

नायडू ने कहा कि भाषा केवल संचार के लिए होती है। ज्ञान भाषा से नहीं आएगा। केवल वे लोग जो अपनी मातृभाषा में स्टडी करते हैं, वे दुनिया भर में उत्कृष्टता प्राप्त कर रहे हैं। (मातृभाषा के माध्यम से) सीखना आसान है। उन्होंने कहा कि मैं यह आपको बहुत स्पष्ट रूप से बता रहा हूं… भाषा नफरत करने के लिए नहीं है। यहां (आंध्र प्रदेश में) मातृभाषा तेलुगु है। हिंदी राष्ट्रीय भाषा है और अंतर्राष्ट्रीय भाषा अंग्रेजी है।

किसी भाषा को जबरन थोपना या फिर उसका अंधाधुंध विरोध करना, दोनों ही हमारे भारत में राष्ट्रीय और सांस्कृतिक एकजुटता के उद्देश्य को प्राप्त करने में मदद नहीं करते हैं। चूंकि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में हिंदी को अनिवार्य नहीं किया गया है, इसलिए इसे लागू करने के बारे में झूठी बातें फैलाना केवल जनता को गुमराह करने का एक प्रयास है।
पवन कल्याण, डिप्टी सीएम आंध्र प्रदेश

उन्होंने अपील की कि ‘भाषाओं को लेकर अनावश्यक राजनीति’ करने की कोई आवश्यकता नहीं है और उन्होंने अधिक से अधिक भाषाएं सीखने का आह्वान किया।

हिंदी का विरोध नहीं अनिवार्य बनाने का विरोध
आंध्र प्रदेश के उपमुख्यमंत्री पवन कल्याण ने हाल ही में कहा था कि कि न तो किसी भाषा को जबरन थोपने और न ही उसका अंधाधुंध विरोध करने से राष्ट्रीय और सांस्कृतिक एकजुटता हासिल होती है। अभिनेता से नेता बने कल्याण ने साफ कहा था कि उन्होंने कभी हिंदी भाषा का विरोध नहीं किया बल्कि उन्होंने केवल ‘इसे अनिवार्य बनाने का विरोध किया है। कल्याण के अनुसार, एनईपी 2020 के तहत छात्रों को एक विदेशी भाषा के साथ-साथ अपनी मातृभाषा सहित कोई भी दो भारतीय भाषाएं सीखने की सुविधा है। उन्होंने कहा था कि यदि वे हिंदी नहीं पढ़ना चाहते तो वे तेलुगु, तमिल, मलयालम, कन्नड़, मराठी या भारत की कोई भी अन्य भाषा चुन सकते हैं।

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