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अमेरिका छोड़ने पर मजबूर हुई भारतीय छात्रा बोली, ‘हमास के समर्थन का आरोप गलत’, जानें और क्या कहा

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वॉशिंगटन

अमेरिकी छात्र वीजा रद्द होने के बाद भारतीय छात्रा रंजनी श्रीनिवासन ने अमेरिका छोड़ दिया है। उन्होंने कहा है कि उन पर हमास का समर्थन करने कागलत आरोप लगाया गया है। रंजनी श्रीनिवासन अब भी इस बात से हैरान हैं कि फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों में उनकी मामूली भागीदारी के कारण उन्हें विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।

द न्यूज मिनट की रिपोर्ट के मुताबिक, गिरफ्तारी की आशंका से अमेरिका छोड़नी वाली रंजनी श्रीनिवासन ने कहा, ”वे मुझे किसी तरह का विरोध नेता बना रहे हैं, जो मैं नहीं हूं। मैं सिर्फ एक पीएचडी छात्र हूं, जिसके पास बहुत ज्यादा काम है। अगर मैं विरोध प्रदर्शन में जाना भी चाहूं तो मेरे पास ज्यादातर समय नहीं होता क्योंकि मैं पेपर ग्रेड करने में व्यस्त रहती हूं।” वहीं, अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया है कि रंजनी ने हमास का समर्थन किया था।

न्यूयॉर्क में कोलंबिया विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रही थीं रंजनी श्रीनिवासन
हिंसा का विरोध करने का मतलब हमास का समर्थन करना है, इस आरोप को उन्होंने खारिज किया है। उन्होंने कहा, ”शोध जटिल होता है। आप सच्चे तरीके से शोध नहीं कर सकते अगर आप लगातार धमकियों से डरते रहें।” रंजनी F-1 छात्र वीजा पर न्यूयॉर्क में कोलंबिया विश्वविद्यालय में अर्बन प्लानिंग में पीएचडी कर रही थीं।

ऐसा प्रतीत होता है कि वह अमेरिका के आव्रजन और सीमा शुल्क प्रवर्तन (ICE) की गिरफ्तारी से बाल-बाल बच गई हैं, जिसने हाल ही में कोलंबिया से फिलिस्तीनी स्नातक महमूद खलील को हिरासत में लिया था। वह एक जोड़ी कपड़े भी लिए बिना ही वहां से निकल गईं। उन्हें अपनी पालतू बिल्ली ‘क्रिकेट’ को भी पीछे छोड़ना पड़ा, जिसे उन्होंने चार साल पहले बचाया था।

वीजा रद्द किए जाने का मिला थी ईमेल
रिपोर्ट के मुताबिक, 6 मार्च की सुबह रंजनी ने चेन्नई स्थित अमेरिकी वाणिज्य दूतावास से भेजे गए एक ईमेल को पढ़ा, जो पिछली रात भेजा गया था। इसमें कहा गया था कि उनका वीजा रद्द कर दिया गया है। कोई और स्पष्टीकरण नहीं दिया गया था।

उन्होंने कहा, ”पहले तो मुझे लगा कि यह स्पैम है, क्योंकि यह इतना अवास्तविक लग रहा था। मुझे याद है कि मैंने एक स्क्रीनशॉट भेजा और अन्य अंतरराष्ट्रीय छात्रों से पूछा कि क्या किसी और को भी ऐसा मेल मिला है। जब मुझे एहसास हुआ कि यह असली था तो मैंने घबराकर कोलंबिया के ISSO (इंटरनेशनल स्टूडेंट्स एंड स्कॉलर्स ऑफिस) को ईमेल करना शुरू कर दिया, यह पूछते हुए कि यह क्यों हुआ।”

‘फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शन में भागीदारी केवल ‘सतही’ थी’
इसके बाद रंजनी की उलझन और चिंता बढ़ने लगी। उनका कहना है कि फिलिस्तीन समर्थक किसी भी प्रदर्शन में उनकी भागीदारी केवल ‘सतही’ थी और विरोध प्रदर्शनों से उनका जुड़ाव मुख्य रूप से सोशल मीडिया पोस्ट तक ही सीमित था। हालांकि उन्होंने अतीत में फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनों में भाग लिया था, लेकिन उनका कहना है कि वे अप्रैल 2024 के अधिकांश समय में अमेरिका में थी ही नहीं, जब विभिन्न परिसरों में बड़ी संख्या में फिलिस्तीन समर्थक छात्र प्रदर्शन हुए थे।

उन्होंने कहा, ”मैं अगस्त 2023 से 22 अप्रैल 2024 तक भारत में अपने पीएचडी के लिए फील्डवर्क कर रहा थी। 22 अप्रैल से 27 अप्रैल तक मैं अपने परिवार के साथ बोस्टन में थी। मैं 27 अप्रैल को एक कॉन्फ्रेंस के लिए न्यूयॉर्क में एक दिन के लिए थी और फिर मैं वापस बॉस्टन चली गई।”

रंजनी श्रीनिवासन ने किया सेल्फ डिपोर्टेशन- डीएचएस
11 मार्च को यूएस डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने घोषणा की कि रंजनी का वीजा ‘हमास और आतंकवादी गतिविधियों’ का समर्थन करने के कारण रद्द कर दिया गया है। घोषणा में यह भी कहा गया कि रंजनी ने हाल ही में लॉन्च किए गए अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (CBP) होम ऐप का इस्तेमाल करके ‘सेल्फ डिपोर्टेशन’ किया। यह ऐप बिना दस्तावेज वाले आप्रवासियों को ‘प्रस्थान का इरादा’ फॉर्म जमा करने और अपनी इच्छा से अमेरिका छोड़ने की अनुमति देता है। रंजनी ने टीएनएम को बताया कि डीएचएस की घोषणा से पहले उन्होंने इस ऐप के बारे में कभी नहीं सुना था। उन्होंने कहा कि वह 11 मार्च को ही अमेरिका से कनाडा के लिए रवाना हुई थीं।

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