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66 अरब डॉलर का एक्सपोर्ट बचाने की कवायद… मोदी सरकार 55% सामान पर घटाएगी टैरिफ

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नई दिल्ली:

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल से भारत समेत कई देशों पर टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह तारीख धीरे-धीरे करीब आ रही है। इस बीच रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत अमेरिका से आने वाले $23 अरब के सामान पर टैरिफ कम करने पर विचार कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि इसका मकसद $66 अरब के निर्यात को बचाना है। चीन के बाद अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है और भारत उसे किसी भी हाल में खोना नहीं चाहता है। दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत चल रही है।

सूत्रों का कहना है कि भारत इस समझौते के पहले चरण में अमेरिका से आने वाले आधे से ज्यादा सामान पर टैरिफ घटाने को तैयार है। यह कटौती कई साल में सबसे बड़ी होगी। इसका मकसद ट्रंप द्वारा लगाए जाने वाले जवाबी टैरिफ से बचना है। अमेरिका 2 अप्रैल से दुनिया भर के सामान पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने वाला है। इससे बाजार में उथल-पुथल मची है और पश्चिमी देशों के नीति निर्माताओं में भी खलबली है। एक विश्लेषण के मुताबिक ट्रंप के जवाबी टैरिफ से भारत से अमेरिका को होने वाले 66 अरब डॉलर के निर्यात का 87% हिस्सा प्रभावित होगा।

55% सामान पर घटेगा टैरिफ
समझौते के तहत, भारत अमेरिका से आने वाले 55% सामान पर टैरिफ कम करने को तैयार है। इन सामान पर अभी 5% से 30% तक टैरिफ लगता है। सूत्रों ने बताया कि भारत $23 अरब से ज्यादा के अमेरिकी सामान पर टैरिफ को काफी हद तक कम करने या पूरी तरह से हटाने को भी तैयार है। इस बारे में जब व्यापार मंत्रालय, प्रधानमंत्री कार्यालय और सरकार के प्रवक्ता से ईमेल के जरिए टिप्पणी मांगी गई तो उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।

विश्व व्यापार संगठन (WTO) के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका का ट्रेड-वेटेड एवरेज टैरिफ लगभग 2.2% है जबकि भारत का 12% है। अमेरिका को भारत के साथ व्यापार में $45.6 अरब का घाटा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फरवरी में अमेरिका की यात्रा के दौरान व्यापार समझौते पर बातचीत शुरू करने और टैरिफ को लेकर चल रहे विवाद को सुलझाने पर सहमति जताई थी। भारत 2 अप्रैल से पहले समझौता करना चाहता है। अमेरिका के असिस्टेंट ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव ब्रेंडन लिंच व्यापार वार्ता के लिए अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल लेकर मंगलवार से भारत आ रहे हैं।

कैसे होगा सबकुछ
भारत सरकार के अधिकारियों का कहना है कि अमेरिका से आने वाले आधे से ज्यादा सामान पर टैरिफ में कटौती जवाबी टैक्स से राहत मिलने पर निर्भर करती है। एक अधिकारी ने बताया कि टैरिफ में कटौती का फैसला अभी अंतिम नहीं है। इस पर अभी और भी विकल्प विचाराधीन हैं, जैसे कि टैरिफ का सेक्टर के हिसाब से समायोजन और प्रोडक्ट के हिसाब से बातचीत, न कि एक साथ व्यापक कटौती। भारत टैरिफ बाधाओं को समान रूप से कम करने के लिए व्यापक टैरिफ सुधार पर भी विचार कर रहा है। लेकिन यह बातचीत अभी शुरुआती दौर में है।

अमेरिकी राष्ट्रपति कई बार भारत को टैरिफ एब्यूजर और टैरिफ किंग कह चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा है कि वह किसी भी देश को टैरिफ से नहीं बख्शेंगे। सूत्रों ने बताया कि अनुमान के मुताबिक अमेरिका के जवाबी टैक्स के कारण मोती, खनिज ईंधन, मशीनरी, बॉयलर और बिजली के उपकरणों जैसी चीजों पर 6% से 10% तक टैरिफ बढ़ जाएगा। ये चीजें अमेरिका को होने वाले भारत के निर्यात का आधा हिस्सा हैं।

क्या-क्या सामान है लिस्ट में
दूसरे अधिकारी ने कहा कि 11 अरब डॉलर के फार्मास्युटिकल और ऑटोमोटिव निर्यात पर जवाबी टैरिफ का सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है, क्योंकि वे अमेरिकी बाजार पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। अधिकारी ने आगे कहा कि नए टैरिफ से इंडोनेशिया, इजराइल और वियतनाम जैसे वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं को फायदा हो सकता है। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि मांस, मक्का, गेहूं और डेयरी उत्पादों पर टैरिफ 30% से 60% तक है। उन पर कोई बात नहीं होगी। लेकिन बादाम, पिस्ता, ओटमील और क्विनोआ पर टैरिफ कम किया जा सकता है। एक चौथे अधिकारी ने कहा कि भारत ऑटोमोबाइल टैरिफ में भी धीरे-धीरे कटौती करने पर जोर देगा, जो अभी 100% से ज्यादा है।

भारत की इस मामले पर मुश्किल स्थिति 10 मार्च को संसद की स्थाई समिति को दिए गए व्यापार सचिव के बयानों और अमेरिकी वाणिज्य सचिव हावर्ड लुट्निक की टिप्पणियों से उजागर हुई। सूत्रों के मुताबिक कॉमर्स सेक्रेटरी सुनील बर्थवाल ने समिति को बताया कि भारत अमेरिका को एक व्यापार भागीदार के रूप में खोना नहीं चाहता है, लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हम अपने राष्ट्रीय हित से समझौता नहीं करेंगे। भारत में इस साल महंगी मोटरसाइकिलों और बर्बन व्हिस्की पर टैरिफ कम किया था लेकिन अमेरिका लुट्निक ने भारत को बड़ा सोचने के लिए कहा है।

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