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भारत का वर्टिकल लिफ्ट पंबन रेलवे ब्रिज बन कर हो गया है तैयार, रामनवमी के दिन खुलेगा

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नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी 6 अप्रैल को राम नवमी के अवसर पर रामेश्वरम में होंगे। इस अवसर पर वह रेलवे का नया पंबन पुल भी जनता को समर्पित करेंगे। नया पंबन पुल पुराने पुल की जगह लेगा। पुराने पंबन पुल को अंग्रेजो ने साल 1914 में बनाया था। उसमें जंग लगने की वजह से साल 2022 में उसे बंद कर दिया गया था।

नया पुल बनाया गया
पुराने पंबन पुल की जगह अब नया पंबन ब्रिज बना लिया गया है। यह पुल 2.5 किलोमीटर से ज्यादा लंबा है। इसे रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने 535 करोड़ रुपये की लागत से बनाया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा है, “इसे (पंबन ब्रिज को) तेज गति वाली ट्रेनों और ज्यादा ट्रैफिक को संभालने के लिए बनाया गया है। नया पंबन ब्रिज सिर्फ काम का नहीं है, बल्कि यह तरक्की का प्रतीक है। यह आधुनिक इंजीनियरिंग से लोगों और जगहों को जोड़ता है।”

सुरक्षा मानक पर खरा है पुल
इस पुल के सारे परीक्षण पूरे हो चुके हैं। पुल को सुरक्षा प्रमाणपत्र भी मिल गए हैं। पीटीआई (PTI) ने आरवीएनएल (RVNL) के वरिष्ठ उप महाप्रबंधक एन. श्रीनिवासन के हवाले से बीते फरवरी में ही खबर दी थी, “रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) ने पुल के लिए 75 किमी प्रति घंटे की गति सीमा को मंजूरी दी है। लेकिन, यह नियम पुल के बीच वाले हिस्से पर लागू नहीं होगा, जो ऊपर उठता है। नए पुल को 80 किमी प्रति घंटे की गति के लिए बनाया गया है। एक घुमाव के कारण, CRS ने 75 किमी प्रति घंटे की गति सीमा को मंजूरी दी है। केवल लिफ्ट वाले हिस्से के लिए, उन्होंने 50 किमी प्रति घंटे की अनुमति दी है।”

इलेक्ट्रोमैकेनिकल सिस्टम से चलेगा
नए पुल को इलेक्ट्रोमैकेनिकल सिस्टम से चलाया जाएगा। इससे समुद्र में जहाजों का आना-जाना आसान हो जाएगा। जब जहाज के आने का समय होगा, पुल को उठा दिया जाएगा। पुल को उठाने में 5 मिनट लगेंगे और इसे सिर्फ एक आदमी ही कर सकता है। मतलब, पुल को उठाने के लिए ज़्यादा लोगों की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, एक समस्या है हवाओं की गति की भी। समुद्र में जब हवा की गति 58 किमी प्रति घंटे या उससे ज़्यादा हो जाएगी, तो पुल को उठाने वाला सिस्टम काम नहीं करेगा। ऐसा अक्सर अक्टूबर और फरवरी के बीच होता है। इन महीनों में तेज़ हवाएं चलती हैं।

रामेश्वरम और धनुषकोडी को जोड़ने का एकमात्र रास्ता
रेलवे का पंबन पुल पहले रामेश्वरम और धनुषकोडी जाने का एकमात्र रास्ता था। यह पुल 1914 में बना था। बाद में, साल 1988 में इसके बगल में एक सड़क पुल बना। तब जाकर लोगों को दूसरा रास्ता मिला। 1988 तक, मंडपम और रामेश्वरम द्वीप के बीच ट्रेन ही एकमात्र साधन थी।

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