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डिएगो गार्सिया दुनिया का सबसे खतरनाक लॉन्चपैड क्यों? अमेरिका ने भारत के करीब B-2 बॉम्बर क्यों तैनात किया

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वॉशिंगटन:

हिंद महासागर में दुनिया की दो महाशक्तियों के बीच मल्ल युद्ध जारी है। इनमें से एक देश अमेरिका है, जिसके पास डिएगो गार्सिया जैसा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा है। वहीं, दूसरी ओर चीन है, जो इलाके के देशों को अपने कर्ज जाल में फंसाकर उनकी जमीनों को हड़प रहा है। चीन की कोशिश इन देशों में सैना को तैनात करने की है, ताकि वह अपने सबसे खतरनाक दुश्मनों जैसे अमेरिका और भारत को मात दे सके। लेकिन, अमेरिका ने भी डिएगो गार्सिया में अपने सबसे शक्तिशाली बमवर्षकों में से एक बी-2 बॉम्बर को तैनात कर चीन को सख्त संदेश दे दिया है। ये बमवर्षक डिएगो गार्सिया से उड़ान भरकर चीन तक बमबारी करने में सक्षम हैं।

अमेरिका का न डूबने वाला विमानवाहक पोत
यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, हिंद महासागर में बसा डिएगो गार्सिया केवल एक दूरस्थ सैन्य अड्डा नहीं है, बल्कि यह अमेरिका का न डूबने वाला विमानवाहक पोत है। यह अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अमेरिका इस बेस की मदद से न सिर्फ चीन, बल्कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान, ईरान और यमन तक हवाई मिशनों को अंजाम दे सकता है। इसके अलावा वह हिंद महासागर से गुजरने वाले समुद्री परिवहन और चीनी पनडुब्बियों पर भी करीबी नजर रख सकता है।

डिएगो गार्सिया: स्टेजिंग पोस्ट से लॉन्चपैड तक
डिएगो गार्सिया में बी-2 बमवर्षक जैसे विमानों की रणनीतिक तैनाती के लिए नया नहीं है। 1991 के खाड़ी युद्ध के दौरान, अमेरिकी वायु सेना ने इस अलग-थलग एटोल से बमवर्षक लॉन्च किए। 2003 के इराक आक्रमण में, बी-1 और बी-52 बमवर्षक यहीं से उड़ान भरते थे। लेकिन इस बार हालात अलग हैं। यह कोई लंबी युद्ध तैयारी नहीं है, बल्कि एक स्पष्ट उद्देश्य के साथ यह तैनाती की जा रही है।

अमेरिका के लिए क्यों महत्वपूर्ण बी-2 बमवर्षक
बी-2 बमवर्षक अमेरिका के लिए सबसे बड़ी ताकत हैं। अन्य रणनीतिक बमवर्षकों के विपरीत, वे अंतरमहाद्वीपीय मिशनों को उड़ा सकते हैं और बिना ईंधन भरे वापस लौट सकते हैं, जबकि वे रडार के लिए लगभग अदृश्य रहते हैं। डिएगो गार्सिया में उन्हें तैनात करने से खाड़ी में उनके उड़ान के समय में कई घंटे की कमी आती है। इस बेस से, B-2 बमवर्षक ईरान, यमन, लाल सागर और उससे भी आगे के लक्ष्यों पर हमला कर सकते हैं, वो भी एक ही मिशन प्रोफाइल के भीतर।

हिंद महासागर पर अमेरिका की क्यों है नजर
हिंद महासागर अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन के लिए काफी महत्वपूर्ण है। इसे दुनिया के व्यापार के लिए शिपिंग हाईवे माना जाता है और जो प्रशांत या खाड़ी की तुलना में कम अस्थिर है। इस कारण यह इलाका अब वैश्विक भू-राजनीति का केंद्र बन गया है। डिएगो गार्सिया में बी-2 की तैनाती से अमेरिका को अपने दुश्मनों पर महत्वपूर्ण सामरिक बढ़त मिलेगी। इतना ही नहीं, अमेरिका अपनी जरूरत के हिसाब से हवाई मिशन को भी लॉन्च कर सकता है।

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