नई दिल्ली
पिछले कुछ सालों में भारत में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश काफी बढ़ा है। हालांकि, इसमें कई कानूनी अड़चनें और टैक्स भी ज्यादा हैं। चेनएनालिसिस के ग्लोबल क्रिप्टो एडॉप्शन इंडेक्स के अनुसार, भारत लगातार दूसरे साल क्रिप्टोकरेंसी अपनाने के मामले में दुनिया के टॉप देशों में शामिल है। युवाओं की वजह से यह ट्रेंड बढ़ रहा है। सीए नितिन कौशिक ने क्रिप्टो में आंख मूंदकर पैसा लगाने को लेकर चेतावनी दी है। इसके लिए उन्होंने एक निवेशक की आपबीती शेयर की है। उसने क्रिप्टो में भारी नुकसान उठाया।
सीए नितिन कौशिक ने बताया कि कुछ निवेशक बिना सोचे-समझे अनियंत्रित क्रिप्टो (अनरेगुलेटेड क्रिप्टो) में निवेश कर नुकसान उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर आप नुकसान उठाने के लिए तैयार नहीं हैं तो आपको निवेश नहीं करना चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक चौंकाने वाली कहानी शेयर की। उन्होंने बताया कि एक स्टार्टअप के मालिक जिनकी महीने की इनकम 5 लाख रुपये है, उन्होंने पिछले साल 70 लाख रुपये अनरेगुलेटेड क्रिप्टो प्रोजेक्ट्स में निवेश किए। अब उनके पूरे पोर्टफोलियो की कीमत सिर्फ 4 लाख रुपये है। नितिन कौशिक ने कहा, ‘अगर आप नुकसान उठाने के लिए तैयार नहीं हैं तो आपको निवेश नहीं करना चाहिए।’
2025 में क्रिप्टोकरेंसी में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है, लेकिन इसमें संभावनाएं भी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंंप के क्रिप्टो के समर्थन में आने से डिजिटल एसेट्स और क्रिप्टो से जुड़े स्टॉक्स में तेजी आई है। कुछ रुकावटों के बावजूद बाजार में माहौल सकारात्मक बना हुआ है।
क्रिप्टोकरेंसी में बढ़ी है लोगों की दिलचस्पी
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के एक सर्वे के अनुसार, रिटेल निवेशक अब पारंपरिक स्टॉक्स के बजाय क्रिप्टोकरेंसी में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। ग्लोबल रिटेल इन्वेस्टर आउटलुक 2024 के अनुसार, 29% निवेशक स्टॉक्स से बचने का कारण यह बताते हैं कि उन्हें इसकी समझ नहीं है। जबकि क्रिप्टोकरेंसी के बारे में ऐसा कहने वाले सिर्फ 24% हैं। इससे पता चलता है कि डिजिटल एसेट्स को अब ज्यादा आसान निवेश विकल्प माना जा रहा है। खासकर युवाओं में।
इस सर्वे में भारत, अमेरिका, चीन और ब्रिटेन जैसे 14 देशों के 13,000 से ज्यादा लोगों से जानकारी ली गई। रिपोर्ट के अनुसार, 44 साल से कम उम्र के आधे से ज्यादा निवेशक अपने पोर्टफोलियो का कम से कम एक तिहाई हिस्सा क्रिप्टोकरेंसी में लगा रहे हैं। इससे पता चलता है कि क्रिप्टोकरेंसी को अब एक मुख्यधारा की संपत्ति के रूप में पहचाना जा रहा है।
भारत में अभी बनी हुई है अनिश्चितता
भारत में क्रिप्टो निवेश को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है। डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स (DEA) के सचिव अजय सेठ ने कहा है कि सरकार स्टेबलकॉइन्स और क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट्स पर बदलते वैश्विक नियमों को देखते हुए अपने क्रिप्टोकरेंसी फ्रेमवर्क की समीक्षा करेगी।
कॉइनबेस ग्लोबल इंक. ने हाल ही में भारत की फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट (FIU) के साथ रजिस्ट्रेशन कराया है। इससे वह भारत में कानूनी रूप से ट्रेडिंग सेवाएं दे पाएगी। अमेरिका की इस एक्सचेंज कंपनी का इरादा भारत में अपने रिटेल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म को फिर से शुरू करने का है। यह भारत में विस्तार करने का उसका दूसरा प्रयास है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-NCR लगातार तीसरे साल क्रिप्टो अपनाने में सबसे आगे है। भारत के कुल क्रिप्टो निवेश में इसका 20.1% हिस्सा है। बेंगलुरु और मुंबई 9.6% और 6.5% के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। यह रिपोर्ट कॉइनस्विच नाम की एक घरेलू क्रिप्टो एक्सचेंज कंपनी की है।
Dogecoin सबसे ज्यादा निवेश पाने वाला कॉइन बन गया है। वहीं, SHIB सबसे ज्यादा ट्रेड किया जाने वाला कॉइन है। इससे पता चलता है कि भारतीय निवेशकों की मीम कॉइन्स में काफी दिलचस्पी है। PEPE 2024 में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाला रहा है। इसने 1,373% का शानदार रिटर्न दिया है। इसने पिछले साल Solana के 633% रिटर्न को भी पीछे छोड़ दिया।
पैसा लगाने से पहले इन 5 बातों का रखें ध्यान
क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करने से पहले कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। सबसे पहले, आपको यह समझना चाहिए कि क्रिप्टोकरेंसी क्या है और यह कैसे काम करती है। क्रिप्टोकरेंसी एक डिजिटल करेंसी है। इसका कोई भौतिक रूप नहीं होता है। यह कंप्यूटर नेटवर्क पर आधारित होती है। इसे सुरक्षित रखने के लिए क्रिप्टोग्राफी का इस्तेमाल किया जाता है।
दूसरा, आपको यह जानना चाहिए कि क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है। क्रिप्टोकरेंसी की कीमतें बहुत तेजी से बदल सकती हैं। इसलिए, आपको सिर्फ उतना ही पैसा निवेश करना चाहिए जितना आप खोने के लिए तैयार हैं।
तीसरा, आपकं उपभोक्ता प्राथमिकताओं में एक उल्लेखनीय बदलाव देखा गया है। नई पीढ़ी के मकान खरीदार, जो आकांक्षाओं और बदलती जीवनशैली से प्रेरित हैं, तेजी से लग्जरी मकानों की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसमें कभी किफायती आवास खंड का दबदबा था। यह बदलाव शहरी निवासियों की बदलती प्राथमिकताओं और समग्र जीवन अनुभव की बढ़ती मांग को दर्शाता है। भारत का बढ़ता मध्यम और उच्च-मध्यम वर्ग इस ट्रेंड में सबसे आगे है। डिस्पोजेबल आय में बढ़ोतरी, आसान फाइनेंसिंग तक पहुंच और वैश्विक प्रदर्शन ने आकांक्षाओं को फिर से परिभाषित किया है।
आज मकान खरीदार आराम, सुविधा और स्टेटस सिंबल को महत्व देते हैं, जो सभी लग्जरी टाउनशिप देने का वादा करते हैं। मिलेनियल्स, विशेष रूप से, इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनकी प्राथमिकता मात्रा से अधिक गुणवत्ता की ओर है, जो प्रीमियम सुविधाओं, समकालीन डिजाइनों और टिकाऊ जीवन समाधानों पर जोर देती है।
