बहुत से भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका में पढ़ाई करना किसी सपने के पूरे होने जैसा है, लेकिन यहां डिग्री लेने की सच्चाई बिल्कुल उलट है। मोटी फीस, वीजा को लेकर अनिश्चितता, जॉब मार्केट में अस्थिरता और मेंटल हेल्थ की चिंताएं छात्रों के विदेश जाने की उम्मीदों को चुनौती दे रही हैं। हाल ही में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर एक पोस्ट ने अमेरिका में पढ़ाई को लेकर तीखी बहस छेड़ दी है। यह बहस इस बात को लेकर हो रही है कि क्या अमेरिका में पढ़ाई मायने भी रखती है या नहीं।
Chance_Square8906 नाम के एक रेडिट यूजर ने दावा किया कि उसने पास मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री है, लेकिन नौकरी नहीं मिल रही। उसने लिखा, “कोचिंग माफिया अमेरिका को अवसरों का देश बताकर घोटाला कर रहा है। अगले 3-4 सालों तक अमेरिका मत आओ। छात्रों को नौकरी पाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। मैंने कई भारतीय छात्रों को डिप्रेशन में जाते देखा है। अमेरिकी यूनिवर्सिटीज आपका पैसा ले लेंगी। आपके ऊपर भारी कर्ज और डिप्रेशन रह जाएगा।”
अन्य यूजर्स ने भी शेयर किया अपना एक्सपीरियंस
रेडिट पोस्ट तेजी से वायरल हो गई और अन्य यूजर्स ने भी अपना एक्सपीरियंस शेयर किया। एक यूजर ने ब्रिटेन के हालातों की तुलना करते हुए कहा, “ब्रिटेन में 2021 से ही नौकरी पाना मुश्किल है। आजकल एक भारतीय स्पॉन्सर तभी काम का है, जब वे असाधारण हों (कैम्ब्रिज/ऑक्सफोर्ड स्तर के)। मुझे अब इंग्लैंड में विदेश में पढ़ने का कोई मतलब नहीं दिखता, जब तक कि आप सिर्फ डिग्री न चाहते हों।”
एक अन्य यूजर ने भी नौकरी नहीं मिलने की बात की। उसने बताया, “2022 तक लोगों के पास ग्रेजुएशन से पहले तीन नौकरी के ऑफर होते थे। अब ग्रेजुएशन के एक साल बाद भी उनके पास एक भी नहीं है। तभी आओ जब आप अमीर हों और एक बड़ा जोखिम लेना चाहते हों, जहां आप यूनिवर्सिटी को दी जाने वाली सारी रकम खो सकते हैं।”
यूएस में कैसे मिलेगी जॉब?
वहीं, अमेरिका में हार्डवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करने वाले एक यूजर ने बताया कि किस तरह से आपको यहां नौकरी मिल सकती है। यूजर ने कहा, “मुझे लगता है कि अमेरिका में जॉब मार्केट खराब है, लेकिन आप अपने जोखिमों को कम कर सकते हैं। मास्टर्स से पहले वर्क एक्सपीरियंस (कम से कम 3-4 साल) हासिल करें। एक अच्छी यूनिवर्सिटी से मास्टर्स होना चाहिए। इसके बाद भी आप ऐसी स्थिति का सामना कर सकते हैं, जहां जॉब पाने के लिए 5-6 महीने नौकरी ढूंढनी पड़े।”
