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ट्रंप के टैरिफ से पहले चीन ने अपने बड़े बैंकों को कर दिया टाइट, जानिए क्या है ड्रैगन का प्लान

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नई दिल्ली

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की योजनाओं से दुनियाभर में उथलपुथल मची हुई है। जिस तरह वह एक के बाद एक टैरिफ घोषित करते जा रहे हैं, उससे ट्रेड वॉर का और गहराना तय है। इस बीच चीन ने अपनी इकॉनमी में जान फूंकने के लिए बड़ा फैसला लिया है। उसने अपने चार सबसे बड़े सरकारी बैंकों को निवेशकों से 520 अरब युआन (लगभग 71.60 अरब डॉलर) जुटाने को कहा है। यह रकम प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए जुटाई जाएगी। इसका मतलब है कि बैंक सीधे तौर पर निवेशकों को शेयर बेचेंगे। इस फैसले में चीन का वित्त मंत्रालय भी शामिल होगा। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि बैंकों को अर्थव्यवस्था को सहारा देने में मदद मिल सके। चीन की सरकार ने पहले ही कहा था कि वह बैंकों को 500 अरब युआन की मदद देगी। इससे बैंक और ज्यादा लोन दे पाएंगे और अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।

सरकार के इस फैसले के बाद बैंकों के शेयरों में सोमवार को उछाल आया। बैंक ऑफ चाइना ने कहा है कि वह 165 अरब युआन तक जुटाने का लक्ष्य बना रहा है। इसी तरह चाइना कंस्ट्रक्शन बैंक भी 105 अरब युआन तक के प्राइवेट प्लेसमेंट की योजना बना रहा है। बैंक ऑफ कम्युनिकेशंस ने कहा कि वह 120 अरब युआन तक के शेयर बेचेगा। पोस्टल सेविंग्स बैंक ऑफ चाइना 130 अरब युआन तक जुटाएगा। इन चारों बैंकों में चीन का वित्त मंत्रालय एक बड़ा शेयरधारक है। मंत्रालय भी इन चारों बैंकों की पूंजी जुटाने की प्रक्रिया में शामिल होगा। बैंक ऑफ कम्युनिकेशंस ने अपनी फाइलिंग में कहा है कि शेयर जारी होने के बाद वित्त मंत्रालय उसका सबसे बड़ा शेयरधारक बन जाएगा।

क्या होगा फायदा
चीन के बड़े बैंकों का सालाना मुनाफा स्थिर रहा है लेकिन उनकी कमाई में कमी आई है। ऐसा इसलिए हुआ है क्योंकि अर्थव्यवस्था धीमी हो गई है और प्रॉपर्टी सेक्टर भी मुश्किलों का सामना कर रहा है। चीन की इकॉनमी में रियल एस्टेट का एक तिहाई हिस्सा है। रियल एस्टेट के डूबने से बैंकिंग सेक्टर पर भी खतरा मंडरा रहा है। विश्लेषकों ने चीन के अधिकारियों से कहा है कि वे बैंकों को जल्दी से पूंजी दें। इससे बैंक ज्यादा लोन दे पाएंगे और अर्थव्यवस्था को फिर से पटरी पर लाने में मदद मिलेगी। साथ ही, बैंकों को अपनी एसेट क्वालिटी को भी संभालना होगा।

चीन के बैंकों का मुनाफा पहले से ही दबाव में है। आर्थिक सुस्ती और प्रॉपर्टी मार्केट में लंबे समय से चल रही परेशानी के कारण ऐसा हुआ है। इस साल ब्याज दरों में कटौती होने की संभावना है, जिससे बैंकों का मुनाफा और भी कम हो सकता है। चीन ने इस साल के लिए आर्थिक विकास का लक्ष्य लगभग 5% रखा है। यह पिछले साल के बराबर ही है। सरकार ने वादा किया है कि वह महंगाई से निपटने और अमेरिकी टैरिफ के असर को कम करने के लिए और ज्यादा पैसे खर्च करेगी। चीन की सरकार बैंकों को मजबूत करने और अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए कई कदम उठा रही है।

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