नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने रेप के मामलों में झूठे वादे के आरोपों पर चिंता व्यक्त की है। कोर्ट का कहना है कि बदलते सामाजिक मूल्यों के साथ, प्रेम संबंधों में असफलता को रेप का मामला नहीं बनाना चाहिए। कोर्ट एक ऐसे शख्स की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिस पर उसकी मंगेतर ने शादी का झूठा वादा करके यौन संबंध बनाने का आरोप लगाया था। कोर्ट ने इस तरह के मामलों को रूढ़िवादी मानसिकता का परिणाम बताया है। कोर्ट ने यह भी कहा कि मामलों को निष्पक्षता से देखना चाहिए, केवल पीड़िता के नजरिए से नहीं।
कोर्ट ने महिला से कहा, ‘अगर आप इतनी भोली थीं तो आप हमारे सामने नहीं होतीं, आप बालिग थीं, यह नहीं हो सकता कि आपको यह विश्वास दिलाया गया कि आपकी शादी हो जाएगी।’ कोर्ट ने आगे कहा, ‘आजकल नैतिकता और मूल्यों की अवधारणा युवाओं के साथ अलग है। अगर हम आपसे सहमत होते हैं, तो कॉलेज में किसी लड़के और लड़की के बीच कोई भी रिश्ता दंडनीय हो जाएगा। मान लीजिए कि वे एक-दूसरे से प्यार करते हैं और लड़की ने विरोध किया और लड़के ने कहा कि मैं तुमसे अगले हफ्ते शादी करूंगा और फिर वह नहीं करता है, तो फिर से अपराध होगा।’ इसका मतलब है कि अगर कोई लड़का किसी लड़की से शादी का वादा करके संबंध बनाता है और बाद में शादी नहीं करता, तो उसे रेप के आरोप में फंसाया जा सकता है।
‘रूढ़िवादी मानसिकता काम कर रही है’
बेंच ने आगे कहा कि ऐसे मामले अक्सर रूढ़िवादी सोच के कारण होते हैं। बेंच ने कहा, ‘रूढ़िवादी मानसिकता काम कर रही है क्योंकि यहां आदमी को दोषी ठहराया जाता है। हमारी व्यवस्था में कमियां हैं। कई बार लड़की अपने ससुरालवालों के खिलाफ 5 मामले दर्ज कराती है। आप हमसे जो भी टिप्पणी चाहते हैं या हाई कोर्ट की टिप्पणी को रद्द करना चाहते हैं… वह ठीक है… अंततः आप पीड़ित हैं।’ इसका मतलब है कि समाज में अभी भी यह माना जाता है कि अगर कोई लड़का किसी लड़की के साथ संबंध बनाता है तो उसे उससे शादी करनी चाहिए। अगर वह शादी नहीं करता है, तो उसे दोषी माना जाता है।
‘निष्पक्ष रूप से देखना होगा, सिर्फ…’
बेंच ने आगे कहा कि मामले को निष्पक्ष रूप से देखना होगा, सिर्फ पीड़िता के नजरिए से नहीं। जस्टिस सुंदरेश ने कहा, ‘हम इसे केवल एक लेंस से नहीं देख सकते। हमारा किसी एक लिंग से लगाव नहीं है। मेरी भी एक बेटी है और अगर वह भी इस स्थिति में है तो मुझे इसे एक व्यापक दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है। अब देखिए (इस) मामले में, क्या इतने कमजोर सबूतों के साथ दोषसिद्धि हो सकती है?’ इसका मतलब है कि कोर्ट को यह सुनिश्चित करना होगा कि आरोपी को भी न्याय मिले। कोर्ट को यह देखना होगा कि क्या सबूत कमजोर हैं और क्या आरोपी को दोषी ठहराया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के क्या मायने?
सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उन पुरुषों के लिए राहत की खबर है जिन पर शादी का झूठा वादा करके बलात्कार का आरोप लगाया गया है। कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हर प्रेम संबंध को बलात्कार का मामला नहीं बनाया जा सकता है। कोर्ट ने यह भी कहा है कि मामलों को निष्पक्ष रूप से देखना होगा, सिर्फ पीड़िता के नजरिए से नहीं।
