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अमेरिका से हुआ भारतीय छात्रों का मोहभंग! स्टूडेंट्स पर ट्रंप के एक्शन के बीच रिसर्च में बड़ा खुलासा

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भारतीय छात्र अमेरिका में पढ़ाई नहीं करना चाहते हैं। ऐसा हम नहीं कह रहे हैं, बल्कि हाल ही में जारी हुई एक रिपोर्ट में ये बात सामने निकलकर आई है। StudyPortals के नए रिसर्च के मुताबिक, अमेरिका में पोस्टग्रेजुएट प्रोग्रामों में दिलचस्पी 2025 की शुरुआत में बहुत कम हुई है। यहां पढ़ने को लेकर दिलचस्पी में 40% की गिरावट हुई। विदेशी छात्रों में ये गिरावट ज्यादा है। अकेले भारतीय छात्रों के बीच पोस्टग्रेजुएट प्रोग्रामों को लेकर दिलचस्पी में 40% की गिरावट देखी गई है।

भारत से अमेरिका में पढ़ाई करने जाने वाले भारतीयों का एक बड़ा हिस्सा यहां पोस्टग्रेजुएट कोर्सेज में ही एडमिशन लेता है। पीजी के लिए अमेरिका लंबे समय से पॉपुलर देश रहा है। रिसर्च से छात्रों के व्यवहार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अमेरिका में नीतियां काफी ज्यादा सख्त हुई हैं और ऐसे में वह उन देशों में पढ़ने जाना चाहते हैं, जहां माहौल सुरक्षित है और नौकरी की संभावना ज्यादा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की वापसी के बाद से तो अमेरिका में इमिग्रेशन नीतियां काफी ज्यादा कड़ी हुई हैं।

अमेरिका छोड़ ब्रिटेन हो रहा पीजी के लिए पॉपुलर
जनवरी से मार्च 2025 तक के डाटा से मालूम होता है कि छात्रों को मोहभंग अमेरिका के एजुकेशन सेक्टर के लिए चिंताजनक साबित हो सकता है। जहां छात्रों के बीच अमेरिका की चमक फीकी हो रही है, वहीं ब्रिटेन को लेकर दिलचस्पी बढ़ रही है। अमेरिका के लिए चिंता की बात इसलिए भी है, क्योंकि अमेरिका में कई बड़े देशों से आने वाले छात्रों की संख्या घट रही है। रिसर्च में बताया गया है कि छात्र अब पीजी के लिए दूसरे देशों में जा रहे हैं। ब्रिटेन टॉप यूनिवर्सिटीज की वजह से पॉपुलर हो रहा है।

किन देशों से कितने छात्रों की दिलचस्पी घटी?
StudyPortals के डाटा से पता चला है कि भारत से आने वाले छात्रों की दिलचस्पी में 36.8% की गिरावट आई है। इसी तरह से बांग्लादेश, पाकिस्तान, नाइजीरिया और ईरान जैसे देशों से भी छात्रों की संख्या में भारी कमी आई है। बांग्लादेश में 54.1% की गिरावट आई है, जबकि ईरान से दिलचस्पी 61.2% तक गिर गई है। पाकिस्तान और नाइजीरिया में क्रमशः 36.3% और 38.7% की गिरावट देखी गई है।

किन वजहों से यूएस में पढ़ना नहीं चाहते छात्र?
अमेरिका में नहीं पढ़ने की कई सारी वजहें हैं, जिसमें राजनीतिक अस्थिरता, कड़ी वीजा नीतियां और अमेरिका में अनिश्चितता का माहौल शामिल हैं। ट्रंप की वापसी के बाद से ही राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बना है। पिछले साल कैंपस में प्रदर्शनों के बाद सैकड़ों छात्रों के स्टूडेंट वीजा रद्द कर उन्हें डिपोर्ट किया गया है। इसी तरह से वीजा नीतियां कड़ी की गई हैं, जिसमें वीजा देने से पहले सोशल मीडिया की जांच करना शामिल हैं। H-1B वीजा खत्म करने की मांग हुई है, जिसका फायदा सबसे ज्यादा छात्रों को मिलता है।

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