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चाबहार में भारत की बढ़त को फेल करने की तैयारी में चीन, ग्वादर से ईरानी पोर्ट तक बनाना चाहता है संपर्क, समझें खतरा

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तेहरान/इस्लामाबाद

ईरान के चाबहार बंदरगाह पर भारत की बढ़त को बड़ा झटका लग सकता है। चीन की नजर ईरानी पोर्ट पर लग गई है, जिसे भारत ने तैयार किया है। इस बंदरगाह को पाकिस्तान में चीन निर्मित ग्वादर बंदरगाह से जोड़ने की योजना चल रही है। इसके लिए ईरान ने ही चीन को सुझाव दिया है। MEMRI की रिपोर्ट के अनुसार, बीते 13 मार्च को चाबहार फ्री जोन संगठन के निदेश मंडल के अध्यक्ष और सीईओ मोहम्मद सईद अरबाबी ने ईरान में चीन के राजदूत कांव पेइवु से मुलाकात की थी, जिसमें ईरान और चीन के बीच 25 साल के समझौते को लेकर चर्चा हुई।

ईरानी अधिकारी ने चीनी राजदूत को बताया कि ग्वादर में चीन की मौजूदगी चाबहार को पाकिस्तान से जोड़ने के लिए रणनीतिक अवसर प्रदान करती है। इससे तुर्की और यूरोप तक आसान पहुंच की सुविधा मिलती है। ईरानी समाचार एजेंसी IRNA की रिपोर्ट में अरबाबी के हवाले से कहा गया, ‘अगर हम सरकार को चाबहार-रिमदान रेलवे परियोजना शुरू करने और इसे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे से जोड़ने को मना सकते हैं, तो यह ईरान के बड़ा वाणिज्यिक अवसर बन सकता है।’

भारत की बढ़ेगी चिंता
चाबहार पर चीन की सक्रियता से भारत की चिंता बढ़ सकती है। ईरान के चाबहार पोर्ट को भारत ने तैयार किया है और इसे पाकिस्तान में मौजूद चीनी ग्वादर पोर्ट का जवाब समझा जाता है। बलूचिस्तान में हिंसा और पाकिस्तानी सेना की लूट के चलते चीन का ग्वादर बंदरगाह अभी तक शुरू नहीं हो सका है। जबकि भारत के बनाए चाबहार से व्यापार शुरू हो गया है। चाबहार बंदरगाह के जरिए भारत को मध्य एशिया तक पहुंच मिलती है। इस तरह यह चीन पर बढ़त देता है।

चीन के लिए भी आसान नहीं
चाबहार बंदरगाह परियोजना में चीन के शामिल होने से भारत के हितों के लिए खतरा हो सकता है। हालांकि, चीन के लिए चाबहार को ग्वादर से जोड़ना आसान नहीं होने वाला है। क्योंकि चीन और पाकिस्तान के सीपीईसी के खिलाफ बलूच गुरिल्ला युद्ध अब तेज हो गया है और यह शहरों तक पहुंच गया है। बलूच लड़ाके चीनी और पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बना रहे हैं। बलूच लड़ाकों ने पाकिस्तान को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया है। अब पाकिस्तान की संसद में भी बलूचिस्तान को गंवाने की चर्चा शुरू हो गई है।

बलूच विद्रोहियों का खतरा
पाकिस्तान के कई सैन्य समर्थक राजनेता अब खुले तौर पर स्वीकार करने लगे हैं कि बलूचिस्तान पर पाकिस्तान की पकड़ अब कमजोर हो गई है और बलूच लोग स्वतंत्रता आंदोलन और विद्रोहियों का सक्रिय रूप से समर्थन कर रहे हैं। पाकिस्तान नेशनल एसेंबली में बोलते हुए सांसद मौलाना फजल-उल-रहमान ने स्वीकार किया कि पाकिस्तान ने बलूचिस्तान में नियंत्रण खो दिया है।

बलूचिस्तान में चीन और पाकिस्तान की CPEC परियोजना के खिलाफ प्रतिरोध तेज हो गया है। बलूच समर्थक स्वतंत्रता सशस्त्र समूहों ने पहले ही चीन और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को चेतावनी दी है कि बलूचों की सहमति के बिना किसी भी देश को बलूचिस्तान के संबंध में पाकिस्तान के साथ व्यापार, सुरक्षा समझौते या किसी भी सौदे में शामिल नहीं होना चाहिए। ऐसे में ईरान का यह सुझाव कि चीन को चाबहार को ग्वादर से जोड़ने में मदद करनी चाहिए, आग में घी डालने का ही काम करेगा।

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