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नाबालिग का अपहरण कर कई बार बलात्कार, 4 साल बाद सिक्योरिटी गार्ड को 20 साल की सजा

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नई दिल्ली,

दिल्ली में 12 साल की एक लड़की को अगवा करके उसके साथ कई बार बलात्कार करने के जुर्म में एक सिक्योरिटी गार्ड को 20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है. ये वारदात साल 2021 में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हुई थी. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुशील बाला डागर ने कहा कि अपर्याप्त सजा देकर दोषी के प्रति अनुचित सहानुभूति दिखाना आपराधिक न्याय प्रणाली को नुकसान पहुंचाएगा.

जानकारी के मुताबिक, 32 वर्षीय आरोपी को इसी महीने की शुरुआत में यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम की धारा 6 (गंभीर यौन उत्पीड़न) के तहत दोषी ठहराया गया था. अतिरिक्त लोक अभियोजक योगिता कौशिक दहिया ने कहा कि मार्च 2021 में लड़की का अपहरण करने, बार-बार यौन उत्पीड़न करने और उसे धमकाने के अपने घृणित कृत्य के लिए दोषी नरमी का हकदार नहीं है.

15 अप्रैल को दिए गए अपने फैसले में अदालत ने साल 2015 के सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले का हवाला दिया था. इसके अनुसार अपर्याप्त सजा देकर अनुचित सहानुभूति कानून की प्रभावशीलता में जनता के विश्वास को कम करके न्याय प्रणाली को और अधिक नुकसान पहुंचाएगी. इसमें साल 2006 के सुप्रीम कोर्ट के एक अन्य फैसले का भी हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया कि सजा अपराध के अनुसार होनी चाहिए.

इसके साथ ही आरोपी के आचरण, यौन उत्पीड़न की शिकार महिला की स्थिति, उम्र और आपराधिक कृत्य की गंभीरता पर निर्भर होनी चाहिए. महिलाओं पर हिंसा के अपराधों से सख्ती से निपटने की जरूरत है. अदालत ने कहा, “अपराध की गंभीरता, पीड़िता-दोषी की उम्र को ध्यान में रखते हुए पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत 20 साल के कठोर कारावास (आरआई) की सजा सुनाई जा रही है.”

इसके साथ ही अदालत ने बलात्कार पीड़िता को 10.5 लाख रुपए का मुआवजा भी देने का आदेश दिया. इन पैसों से पीड़िता को पुनर्वास में मदद मिल सकती है. बताते चलें कि पिछले महीने दिल्ली की इसी अदालत ने एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के मामले में दोषी पाए गए एक व्यक्ति को 20 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई थी. ये अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सुशील बाला डागर की ही अदालत थी.

उस समय अतिरिक्त लोक अभियोजक योगिता कौशिक दहिया ने बताया था कि दोषी ने नाबालिग लड़की का अपहरण कर उसे अपने घर ले जाकर जुलाई 2020 में कई बार उसके साथ रेप किया. उन्होंने अदालत से कहा कि इस घृणित अपराध के लिए दोषी को कोई रियायत नहीं मिलनी चाहिए. इसके बाद अदालत ने अपने फैसले में पीड़िता के लिए मुआवजे का भी निर्देश दिया था.

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