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आगरा: पुलिस कस्टडी में मौत के आरोप में एक इस्पेक्टर, 2 दारोगा समेत 17 पुलिसकर्मी फंसे, सीआईडी ने माना दोषी

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आगरा

चोरी के शक में यातनाएं देकर एक व्यक्ति की पुलिस कस्टडी में मौत के मामले में 17 पुलिसकर्मी फंस गए हैं। इसमें एक इंस्पेक्टर, 2 दारोगा, 4 हेड कांस्टेबल शामिल हैं। मामले की जांच कर रही सीआईडी ने उक्त सभी को गैर इरादतन हत्या का दोषी पाया है। मामले में चार्जशीट दाखिल कर अभियोजन दर्ज करने के लिए शासन को फाइल भेजी है। साल 2018 में राजू गुप्ता की बेरहमी पिटाई लगाई थी, जिससे उसकी मौत हो गई। पुलिस ने बिना मुकदमा दर्ज किए युवक को अवैध रूप से हिरासत में रखा था। मृतक की विधवा मां ने आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी।

थाना सिकंदरा के गैलाना रोड स्थित नरेंद्र एंक्लेव की रहने वाली रेनू गुप्ता के इकलौते पुत्र राजू गुप्ता 22 नवंबर 2018 में मौत हो गई थी। राजू गुप्ता पर पड़ोसी अंशुल प्रताप सिंह ने जेवर से भरा बैग चोरी होने का शक जताया था। अंशुल ने राजू को अपने घर में बंधक बनाकर पीटा था। कॉलोनी का विवेक भी तब मौजूद था। 21 नवंबर को थाना सिकंदरा पुलिस ने राजू को बिना मुकदमा दर्ज किए हिरासत में लिया था। राजू के साथ पुलिस ने बर्बरता की, उसने इतना पीटा कि उसकी तबियत बिगड़ गई। आगरा पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती कराया। अगले दिन 22 नवंबर को चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया था। ये घटनाक्रम काफी सुर्खियों में रहा था।

सीआईडी कर रही है जांच
राजू गुप्ता की मौत के बाद आरोपी पुलिसकर्मी थाना छोड़कर भाग गए। पीएम रिपोर्ट में राजू के शरीर पर चोट के गंभीर निशान मिले। जो पुलिस की बर्बरता की कहानी बता रहे थे। राजू की मां की तहरीर पर अंशुल प्रताप सिंह, विवेक, दारोगा अनुज सिरोही के खिलाफ हत्या का केस दर्ज हुआ। मुकदमे में अन्य पुलिसकर्मियों को भी आरोपी बनाया गया। मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर सीआईडी ने मामले की विवेचना की है। सीआईडी के एसपी राजेंद्र यादव ने बताया कि राजू गुप्ता की अवैध हिरासत के दौरान जो भी पुलिसकर्मी थाने में मौजूद था। उन्हें गैर इरादतन हत्या का दोषी माना गया है।

पुलिसकर्मियों पर लटकी गिरफ्तारी की तलवार
इस मामले में 17 पुलिसकर्मी फंस गए हैं। घटना के समय थाने का चार्ज इंस्पेक्टर ऋषिपाल सिंह पर था। इस दौरान थाने में दारोगा ज्ञानेंद्र शर्मा, तेजवीर सिंह, मुख्य आरक्षी राकेश कुमार, राम किशन, देवेंद्र सिंह, रंजीत आरक्षी हरीश चंद्र, ब्रजेश कुमार, हिमांक कुमार (कंप्यूटर ऑपरेटर), राजेश, संजीव कुमार, सतेंद्र, संजीव, अनिल कुमार, जोगेश कुमार और चालक संजय कुमार को दोषी माना है। एसपी राजेंद्र यादव ने बताया कि सभी को गैर इरादतन हत्या में दोषी माना है। अभियोजन स्वीकृति के बाद गिरफ्तारी की तलवार लटक रही है।

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