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भ्रष्टाचार में फंसे लेखपाल के खिलाफ 15 महीने बाद भी शुरू नहीं हो सकी विभागीय जांच, गाड़ी से मिले थे 10 लाख

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आगरा

उत्तर प्रदेश के आगरा में भ्रष्टाचार में फंसे लेखपाल के खिलाफ 15 महीने बीतने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जबकि उसकी गाड़ी से 10 लाख रुपये बरामद हुए थे। उसके खिलाफ थाना शाहगंज में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ था, लेकिन हैरत की बात यह है कि आरोपी लेखपाल के खिलाफ अब तक कोई विभागीय जांच नहीं हुई और न ही चल-अचल संपत्ति का ब्योरा पेश किया गया। लेखपाल का भौकाल इतना टाइट है कि तहसील के ज्यादातर मामलों में उसकी दखल है। ट्रांसफर पोस्टिंग का भी ठेका चल रहा है।

20 दिसंबर की रात को बमरौली कटारा के रहने वाले उमेश राणा ने लेखपाल भीमसेन पर खतौनी में नाम संशोधन करने के एवज में 10 लाख रुपये की रिश्वत का आरोप लगाया था। उमेश ने पुलिस को बताया कि रिश्वत की रकम लेखपाल ने सफेद कलर की स्विफ्ट डिजायर कार में रखी थी। रकम 2 हिस्सों में गाड़ी में रखी थी। उमेश की निशानदेही पर पुलिस ने अगले दिन फोरेंसिक टीम और वीडियोग्राफी कराते हुए गाड़ी से रकम बरामद की। उसी रात भीमसेन के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत थाना शाहगंज में केस दर्ज हुआ था। जिलाधिकारी अरविंद मलप्पा बंगारी का कहना है कि इस बारे में वे जानकारी जुटाएंगे। आरोपी चाहे जो भी हो उसके खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

15 महीने पर नहीं हुई विभागीय जांच
लेखपाल भीमसेन करीब 25 साल से लेखपाल के पद पर आसीन है। प्रमोशन होने के बावजूद भी उसने नहीं लिया। करीब 20 साल से वह लेखपाल संघ का अध्यक्ष रहा। भ्रष्टाचार में फंसने के बाद उसे निलंबित किया गया था। तत्कालीन जिलाधिकारी भानू चंद्र गोस्वामी ने विभागीय जांच कराने के आदेश दिए थे। एसडीएम रहीं नवोदिता शर्मा ने ऐसे अधिकारी को मामले की जांच सौंपी जो कि कई महीनों से हॉस्पिटल में बीमार थे। उनका ऑपरेशन हुआ था। नतीजा ये रहा कि भीमसेन के खिलाफ कोई भी विभागीय जांच नहीं हो सकी। न ही आय का ब्योरा मिल सका।

करोड़पति हैं लेखपाल
जमीनों की पैमाइश, एनओसी, धारा 80, स्टांपिंग, हैसियत आदि के ऐसे मामले होते हैं, जिनमें लेखपालों की चांदी कटती है। आगरा की सदर तहसील में तमाम लेखपाल ऐसे हैं, जिन पर करोड़ों की संपत्ति है, लेकिन वे मानव संपदा पोर्टल पर अपनी संपत्ति का विवरण तक नहीं देते हैं। बसई मुस्तिकिल से लेकर फतेहाबाद रोड क्षेत्र में तैनात लेखपाल जमकर धांधली करते हैं। इनकी शिकायतें भी लगातार होती हैं, लेकिन विभागीय अधिकारी कर्मचारी शिकायतों को दबा देते हैं। भीमसेन, सुनील कपूर, श्रीनिवास, अजीत सिंह, अतुल कृष्ण, गजेंद्र सिंह, हीरा सिंह, रिटायर हो चुके लेखपाल प्रताप सिंह आदि लगातार सुर्खियों में रहते हैं।

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