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नेताओं को संस्था की मर्यादा बनाये रखनी चाहिए… निशिकांत दुबे की टिप्पणी पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई

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नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी सांसद द्वारा चीफ जस्टिस पर की गई टिप्पणी पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा है कि संस्था की मर्यादा बनाए रखनी चाहिए। यह बात तब सामने आई जब एक जनहित याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। याचिकाकर्ता ने वक्फ कानून में संशोधन के बाद पश्चिम बंगाल में हुई हिंसा का मामला उठाया था। कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह कुछ ठोस सबूत पेश करे।

याचिका में बीजेपी सांसद के बयान का दिया हवाला
दरअसल, अधिवक्ता विशाल तिवारी ने एक जनहित याचिका दायर की थी। इसमें उन्होंने वक्फ कानून में संशोधन के बाद पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में हुई हिंसा का मुद्दा उठाया था। उन्होंने नफरत भरे भाषणों का भी जिक्र किया था। सुनवाई के दौरान, तिवारी ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के एक बयान का हवाला दिया। दुबे ने कहा था कि अगर सुप्रीम कोर्ट को ही कानून बनाना है, तो संसद और विधानसभाओं को बंद कर देना चाहिए।

कोर्ट ने ठोस सबूत पेश करने को कहा
इस पर जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने टिप्पणी की। बेंच ने कहा कि हमें शीर्ष अदालत की मर्यादा और प्रतिष्ठा बनाए रखनी चाहिए। कोर्ट ने तिवारी से कहा कि अनुच्छेद 32 के तहत दायर याचिका में दिए गए कथन भी सम्मानजनक होने चाहिए। कोर्ट ने तिवारी को याचिका में संशोधन करने की अनुमति दी और उनसे कुछ ठोस सबूत पेश करने को कहा।

याचिका में क्या आरोप?
तिवारी ने अपनी याचिका में कहा था कि पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले और उत्तर 24 परगना में वक्फ संशोधन अधिनियम के विरोध में हिंसा हुई। इस हिंसा में कई लोगों की जान चली गई और संपत्ति को नुकसान पहुंचा। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राजनीतिक दल इस स्थिति का फायदा उठा रहे हैं। वे राजनीतिक लाभ के लिए धार्मिक भावनाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि शांति बनाए रखने के बजाय, राजनीतिक नेता भड़काऊ भाषण दे रहे हैं, जिससे स्थिति और खराब हो रही है।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 21 अक्टूबर 2022 के आदेश का भी हवाला दिया गया है। इस आदेश में कोर्ट ने अधिकारियों को नफरत फैलाने वाले भाषण देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। तिवारी ने कहा कि नफरत फैलाने वाले भाषण देने वाले मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों और संवैधानिक पदों पर बैठे राजनीतिक नेताओं के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

हिंसा की जांच के लिए न्यायिक आयोग के गठन की मांग
तिवारी ने मांग की थी कि पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ संशोधन अधिनियम के खिलाफ हुए हिंसक विरोध प्रदर्शनों की जांच के लिए एक न्यायिक आयोग का गठन किया जाए। उन्होंने यह भी मांग की थी कि बंगाल सरकार को नफरत भरे और भड़काऊ भाषणों पर कार्रवाई करने और उन्हें रोकने के निर्देश दिए जाएं। उन्होंने कहा कि इस आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज को करनी चाहिए और इसमें पांच सदस्य होने चाहिए।

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