नई दिल्ली:
दक्षिण कोरिया की दो बड़ी इलेक्ट्रॉनिक कंपनियां एलजी और सैमसंग भारत सरकार के एक नियम से खुश नहीं हैं। यह नियम भारत की ई-कचरा रीसाइक्लिंग से जुड़ा है। ये दोनों कंपनियां इस नियम को लेकर भारत सरकार के साथ कानूनी लड़ाई में उतर गई हैं। रॉयर्टस की एक खबर के मुताबिक इन दोनों कंपनियों ने भारत सरकार पर मुकदमा कर दिया है।
भारत सरकार ने ई-कचरे को लेकर एक नया नियम बनाया है। इस के अनुसार, ई-कचरा रीसाइकल करने वाली कंपनियों को ज्यादा पैसे देने होंगे। एलजी और सैमसंग का कहना है कि इससे उन पर बहुत ज्यादा आर्थिक बोझ पड़ेगा। उनका यह भी मानना है कि यह नियम ई-कचरा की समस्या को ठीक से हल नहीं करता।
क्या ‘पीएम मोदी AC योजना’ में मिल रहा फ्री में 5 स्टार एयर कंडीशनर? सरकार ने खुद बताया सच
क्या है सरकार का नया नियम?
सरकार का नया नियम कहता है कि इलेक्ट्रॉनिक सामान रीसाइकल करने वाली कंपनियों को कम से कम 22 रुपये (करीब 25 अमेरिकी सेंट) प्रति किलोग्राम देना होगा। सरकार का कहना है कि इससे ज्यादा कंपनियां रीसाइक्लिंग के काम में आएंगी और इस क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा। एलजी और सैमसंग इस बात से सहमत नहीं हैं।
क्या लिखा है केस?
एलजी कंपनी ने दिल्ली हाई कोर्ट में 550 पेज की याचिका दायर की है। एलजी के अनुसार, केवल कंपनियों से पैसे ऐंठकर और ‘प्रदूषण करने वाला भुगतान करे’ के नाम पर टैक्स लगाकर, जो उद्देश्य हासिल करना चाहते हैं, वो हासिल नहीं हो पाएगा। यानी एलजी कंपनी का कहना है कि सिर्फ कंपनियों पर बोझ डालने से ई-कचरा की समस्या हल नहीं होगी।
सैमसंग ने भी 345 पेज की याचिका में ऐसी ही चिंता जताई है। सैमसंग का कहना है कि कीमतों को तय करने से पर्यावरण की सुरक्षा नहीं होगी। बल्कि, इससे कंपनियों पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। सैमसंग ने पहले पीएमओ को भी लिखा था। उन्होंने कहा था कि नई कीमतें मौजूदा कीमतों से 5 से 15 गुना ज्यादा हैं।
इन कंपनियों ने भी दायर की याचिका
ई-कचरे से जुड़े इस नियम का विरोध एलजी और सैमसंग के अलावा और भी कंपनियां कर रही हैं। जापानी कंपनी Daikin और भारतीय कंपनियां Havells, Voltas और Blue Star ने भी कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं। Blue Star का कहना है कि उन्हें नियमों का पालन करने में बहुत परेशानी हो रही है। Johnson Controls-Hitachi ने भी पहले याचिका दायर की थी, लेकिन बाद में वापस ले ली। हालांकि, इसका कारण नहीं बताया गया है।
भारत तीसरा देश
भारत दुनिया में ई-कचरा पैदा करने वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है। पहले नंबर पर चीन है और दूसरे पर अमेरिका। सरकारी आंकड़ों के अनुसार पिछले साल भारत में केवल 43% ई-कचरा ही रीसाइकल किया गया। बाकी का 80% कचरा अनौपचारिक कबाड़ी वालों के पास चला गया।
