इस्लामाबाद
कश्मीर के पहलगाम में आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनातनी चरम पर है। भारत ने पाकिस्तान पर नकेल कसने के लिए कई बड़े कदम उठाए हैं। इसमें सिंधु जल समझौते को निलंबित करना शामिल है। भारक के इस समझौता से अलग होने के फैसले पर पाकिस्तान ने गुस्से का इजहार करते हुए कहा है कि कोई भी पक्ष इस समझौते से अकेले बाहर नहीं निकल सकता है। इस समझौते में कोई भी बदलाव भारत और पाकिस्तान दोनों की मर्जी से ही हो सकता है। दूसरी ओर सामरिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी का कहना है कि भारत अकेले ही सिंधु जल समझौते को तोड़ सकता है। ये कानूनी तौर पर संभव है।
ब्रह्मा चेलानी ने अपने एक ट्वीट में बताया है कि भारत के पास सिंधु जल संधि (IWT) से कानूनी रूप से बाहर निकलने का विकल्प मौजूद है। वियना कन्वेनशन ऑफ लॉ ट्रीटीज (VCLT) के आर्टिकल-60 के मुताबिक अगर दूसरा पक्ष संधि का उल्लंघन करता है तो कोई भी देश इस संधि से हट सकता है या उसे निलंबित कर सकता है। ऐसे में भारत इस संधि से हट सकता है।
भारत ने समझौता सिर्फ स्थगित किया: चेलानी
चेलानी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय कानून में यह भी कहा गया है कि अगर परिस्थितियां बदलती हैं तो संधि से हटा जा सकता है। यह VCLT के अनुच्छेद-62 में बताया गया है। हालांकि भारत परिस्थितियों में बदलाव और उल्लंघन दोनों का हवाला देने के बावजूद IWT से हटा है। इसके बजाय भारत ने सिर्फ IWT को स्थगित करने का फैसला किया है। अंतर्राष्ट्रीय कानून में इस शब्द यानी स्थगित को औपचारिक रूप से परिभाषित नहीं किया गया है।
चेलानी के मुताबिक, पाकिस्तान सरकार IWT की शर्तों को बदलने के लिए भारत से बात नहीं कर रही है, यह एक तरह उल्लंघन है क्योंकि IWT के अनुच्छेद X11(3) में शर्तों को बदलने की बात कही गई है। भारत सरकार ने पाकिस्तान के भौतिक उल्लंघन को सिंधु जल संधि की शर्तों को संशोधित करने के लिए भारत के साथ वार्ता में शामिल होने से पाकिस्तानी सरकार के इनकार से जोड़ दिया है।
सिंधु समझौता क्या है
सिंधु जल समझौता भारत और पाकिस्तान के बीच नदियों का बंटवारा करता है। इस संधि के मुताबिक, सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी पाकिस्तान को देना तय किया गया। वह रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का पानी भारत को दिया गया। इस संधि में दोनों देशों के बीच समझौते को लेकर बातचीत करने और साइट के मुआयने का भी प्रावधान है। ये संधि कई युद्ध के बावजूद भारत और पाकिस्तान में बनी रही है।
