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परमाणु युद्ध की धमकी और अब अंतरराष्‍ट्रीय जांच की मांग… पहलगाम हमले पर पाकिस्तान को नहीं मिला दुनिया का साथ तो बदला पैंतरा

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इस्लामाबाद

पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत को मिल रहे दुनियाभर के देशों से समर्थन से पाकिस्तान डर गया है। पाकिस्तान को डर है कि भारत अगर हमला करता है तो उसे इंटरनेशनल कम्युनिटी का साथ नहीं मिलेगा और वो पूरी तरह से अलग थलग ही रहेगा। लिहाजा पाकिस्तान के घबराए हुए नेताओं और मंत्रियों ने अनाप शनाप बकना शुरू कर दिया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने शुक्रवार को एक बार फिर से कश्मीर आतंकवादी हमले में अपने देश का हाथ होने से इनकार किया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री, जो अभी तक परमाणु बम गिराने की धमकी दे रहे थे, उन्होंने नया पैंतरा चलते हुए पहलगाम आतंकी हमले की अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग कर डाली है। इससे पहले शहबाज शरीफ ने भी आज कहा है कि ‘पाकिस्तान निष्पक्ष जांच’ के लिए तैयार है। माना जा रहा है कि इंटरनेशनल कम्युनिटी से मिल रही आलोचनों से पाकिस्तान सकपका गया है।

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मुहम्मद आसिफ, जो पहलगाम आतंकी हमले के बाद लगातार विदेशी मीडिया को इंटरव्यू दे रहे हैं, उन्होंने कहा है कि “अंतर्राष्ट्रीय निरीक्षकों द्वारा की जाने वाली किसी भी जांच में सहयोग करने के लिए पाकिस्तान तैयार है।” पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने ऐसी टिप्पणी करके अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को ये संदेश देने की कोशिश की है कि वो भारत के साथ तनाव को काम करना चाहता है। लेकिन ये पाकिस्तान की एक कुटिल चालबाजी के अलावा कुछ भी नहीं है, जिसे वो कई दशकों से खेलता आया है।

परमाणु हमले से जांच की मांग तक… पैंतरे ही पैंतरे
शहबाज शरीफ के बाद ख्वाजा मुहम्मद आसिफ के मुंह से जांच की बात निकलना यूंही नहीं है। पाकिस्तान की ये सोची समझी रणनीति है। ऐसा वो सालों से करता आया है। इसके जरिए वो अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से सहानुभूति बटोरना चाहता है, जो अभी उसके खिलाफ है। इसके अलावा पाकिस्तान डरा हुआ भी है। भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ तेजी से कदम उठाए हैं, जिसमें सीमा पार करना और एक सिंधु जल समझौते को निलंबित करना शामिल है। भारत में अधिकारियों ने कहा है कि उन्हें हमले में कम से कम दो पाकिस्तानी नागरिकों के शामिल होने का संदेह है। ख्वाजा आसिफ ने कहा कि भारत ने आतंकी हमले के बाद के हालात का इस्तेमाल जल संधि को निलंबित करने और घरेलू राजनीतिक मकसदों के लिए किया है। उन्होंने कहा कि भारत “बिना किसी सबूत, बिना किसी जांच के” पाकिस्तान को दंडित करने के लिए कदम उठा रहा है।

इसके अलावा पाकिस्तानी रक्षा मंत्री ने ट्रंप प्रशासन से विवाद में मध्यस्थता करने को कहा है। आसिफ ने कहा कि “हम नहीं चाहते कि यह युद्ध भड़के, क्योंकि इस युद्ध के भड़कने से इस क्षेत्र में तबाही मच सकती है।” आपको बता दें कि कश्मीर में आखिरी बड़ा आतंकवादी हमला 2019 में हुआ था, जब पाकिस्तान के शह पर आतंकवादियों ने भारतीय सुरक्षाकर्मियों के काफिले पर हमला किया था। उस हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर हवाई हमले किए। वाशिंगटन में अधिकारियों ने अभी तक कश्मीर में हुए इस हमले के लिए किसी समूह को जिम्मेदार नहीं ठहराया है। लेकिन ट्रंप प्रशासन के कई अधिकारियों ने आतंकवाद की आलोचना करते हुए भारत का साथ देने की बात कही है।

ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों ने भारत को लेकर अपना गहरा समर्थन दिखाया है। अमेरिक के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस इस हफ्ते भारत में ही थे जब आतंकवादी हमला हुआ। पाकिस्तान और भारत, दोनों ने अपनी अपनी सीमाएं बंद कर दी हैं और राजनयिकों के खिलाफ कार्रवाई की है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारत “हर आतंकवादी और उनके समर्थकों” को दंडित करेगा। उन्होंने कहा, “आतंकवाद से भारत की भावना कभी नहीं टूटेगी।” भारत का कहना है कि आतंकी हमले की जिम्मेदारी लेने वाला समूह लश्कर-ए-तैयबा का प्रतिनिधि है, जो 2008 में मुंबई हमलों के पीछे शामिल था।

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