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घूसखोर MLA कांड: राशन कार्ड में विवाहित और शपथ पत्र में अविवाहित, जानें इस घपलेबाज नेता की पूरी कहानी

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जयपुर:

20 लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में जेल गए विधायक जयकृष्ण पटेल का एक और कांड सामने आया है। यह उसने करीब सात साल पहले किया था। वर्ष 2018 में जयकृष्ण पटेल ने अपने आप को विवाहित बताया और प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1.20 लाख रुपए का भुगतान प्राप्त कर लिया। फर्जीवाड़ा करने के लिए राशन कार्ड में पत्नी के रूप में कल्पना नाम लिखवाया गया है जबकि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव और वर्ष 2024 में हुए उपचुनाव में जयकृष्ण पटेल द्वारा नामांकन के साथ दिए गए शपथ पत्र में खुद को अविवाहित बताया है।

पुश्तैनी मकान पर उठा लिया भुगतान
विधायक जयकृष्ण पटेल के दादा रमेशचंद्र सरकारी शिक्षक थे। जयकृष्ण के पिता जवाहरलाल भी सरकारी शिक्षक थे। उनका पुश्तैनी मकान बना हुआ है। उसी मकान पर प्रधानमंत्री आवास योजना के नाम पर भुगतान राशि उठा ली गई। आवेदन के समय मकान नहीं होना बताया गया था। मिलीभगत करके फर्जी तरीके से जियो टैगिंग की गई। पहले किसी और स्थान की फोटो लगा दी और बाद में पुश्तैनी मकान को नया मकान बताकर राशि प्राप्त कर ली। यह मकान जयकृष्ण पटेल और उसकी पत्नी कल्पना का बताया जबकि पिछले 20 साल में कोई नया मकान नहीं बनाया गया और कल्पना नाम की महिला परिवार में ही नहीं है।

दादी के नाम पर भी उठाया लिया भुगतान
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जयकृष्ण पटेल ने केवल अपने नाम से नहीं बल्कि उनके परिवार वालों ने दादी के नाम से भी भुगतान उठाया था। जयकृष्ण और कल्पना के नाम से वर्ष 2018 में 1.20 लाख की राशि उठाई जबकि इसके दो साल बाद दादी शांति देवी के नाम से भी पीएम आवास योजना के तहत राशि प्राप्त कर ली गई। इसके लिए आवेदन के समय दादी शांति देवी के पति के नाम के स्थान पर पिता का नाम लिखकर आवेदन किया गया। फिर अफसरों से मिलीभगत कर लाभ प्राप्त कर लिया।

फर्जी डिग्री से शिक्षक बना था जयकृष्ण पटेल
विधायक बनने से पहले जयकृष्ण पटेल सरकारी टीचर बन गया था। अब यह खुलासा हुआ है कि जयकृष्ण पटेल ने फर्जी डिग्री के जरिए नौकरी हासिल की थी। उसने एक ही सेशन में तीन अलग अलग जगह से डिग्रियां प्राप्त कर ली थी। वर्ष 2007 से लेकर 2010 तक मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के अधीन बांसवाड़ा की स्थित सरकारी कॉलेज से रेगुलर डिग्री कोर्स करना बताया गया। वर्ष 2011 में सिक्किम से बीए की डिग्री करने और गुजरात की कालोरक्स टीचर्स यूनिवर्सिटी से भी वर्ष 2012 में बीए की डिग्री करना सामने आया है। सरकारी शिक्षक बनने के बावजूद आज तक खाद्य सुरक्षा योजना से नाम नहीं हटाया है। परिवार आज भी राशन का मुफ्त गेहूं प्राप्त कर रहा है।

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