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सीमांचल में किस दल का सियासी गणित बिगाड़ेगा जन सुराज? अब प्रशांत किशोर से जुड़ा BJP का ये बड़ा नेता!

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अररिया

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज होती जा रही है। हालांकि अभी तक चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक दल अपनी रणनीतियां बनाने में जुट चुके हैं। प्रशांत किशोर की अगुवाई में जन सुराज पार्टी भी पूरे जोर-शोर से तैयारी कर रही है। प्रशांत किशोर दूसरी पार्टियों के नाराज नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल कर रहे हैं। जन सुराज का अभियान पूरे बिहार में चल रहा है, लेकिन सीमांचल पर पार्टी की खास नजर है। पार्टी ने पूर्णिया के पूर्व सांसद उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह को राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है। इसके बाद उदय सिंह सीमांचल में एक्टिव हो गए हैं। उदय सिंह के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद अब अररिया में चंद्रशेखर सिंह बबन भी जन सुराज में शामिल हो गए हैं। अब सवाल उठने लगा है कि सीमांचल में जन सुराज सबसे ज्यादा किसे नुकसान पहुंचा सकता है?

पूर्व सांसद उदय सिंह को सौंपी गई कमान, सीमांचल से उम्मीदें
जन सुराज ने सीमांचल की सियासी ताकत को भांपते हुए पूर्णिया के पूर्व सांसद उदय सिंह उर्फ पप्पू सिंह को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह पहली बार है, जब सीमांचल क्षेत्र के किसी नेता को किसी राजनीतिक पार्टी में इतना बड़ा पद मिला है। उदय सिंह पहले भाजपा में रह चुके हैं और 2004 व 2009 में लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। हालांकि 2014 में वे चुनाव हार गए और 2019 में कांग्रेस का दामन थामा, लेकिन तीसरे स्थान पर रहे। 2024 में उन्होंने चुनाव नहीं लड़ा।

राजनीतिक विरासत से सशक्त हैं उदय सिंह
उदय सिंह का राजनीतिक बैकग्राउंड भी मजबूत रहा है। उनकी मां माधुरी सिंह भी कांग्रेस से सांसद रह चुकी हैं। 1980 और 1984 में पूर्णिया से संसद पहुंचीं और 1977 में दूसरे स्थान पर रहीं थीं। इस परिवार की सीमांचल- विशेषकर पूर्णिया, अररिया, किशनगंज, कटिहार और कोशी क्षेत्र में अच्छी पकड़ मानी जाती है। उदय सिंह विभिन्न जातियों में लोकप्रिय हैं, जिससे जन सुराज को बड़े सामाजिक वर्ग का समर्थन मिलने की उम्मीद है।

पुराने भाजपा नेताओं को जोड़कर मजबूत की जा रही नींव
राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद उदय सिंह ने सीमांचल और कोसी इलाके में सक्रियता बढ़ा दी है। वे अपने पुराने समर्थकों और भाजपा में उपेक्षित नेताओं को जन सुराज में शामिल कर रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने अररिया जिले के कद्दावर नेता और दो बार भाजपा जिलाध्यक्ष रहे चंद्रशेखर सिंह बबन को पार्टी में शामिल किया। उदय सिंह स्वयं उनके घर जाकर उन्हें सदस्यता दिलाई।

चंद्रशेखर सिंह बबन हुए जन सुराज में शामिल
चंद्रशेखर सिंह बबन, जो जनसंघ के समय से भाजपा से जुड़े रहे हैं, ने जन सुराज में शामिल होते हुए कहा कि भाजपा अब पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर रही है। उन्होंने बताया कि वे आरएसएस के स्वयंसेवक रहे हैं। के.सी. सुदर्शन और रज्जू भैया के साथ सीमांचल में संगठन को मजबूत करने में लगे रहे थे। उन्होंने जन सुराज को नई सोच वाली पार्टी बताते हुए कहा कि वे अररिया, पूर्णिया और कोशी क्षेत्र में पार्टी को जमीनी स्तर पर मजबूत करेंगे।

जन सुराज की रणनीति: हाशिये के नेताओं को साथ लाकर ताकतवर बनना
जन सुराज का अभियान पूरे बिहार में जारी है, लेकिन सीमांचल को पार्टी एक विशेष लक्ष्य क्षेत्र मान रही है। पार्टी लगातार उन नेताओं और कार्यकर्ताओं को जोड़ रही है जो अपने-अपने दलों में उपेक्षित महसूस कर रहे हैं। प्रशांत किशोर का यह कदम न सिर्फ संगठन को मजबूत कर रहा है बल्कि भाजपा जैसे बड़े दलों को भी सीधी चुनौती दे रहा है।

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