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क्‍या ऐसे ही देंगे टक्‍कर… कमजोर चीन भी भारत पर भारी, ये आंकड़े बता रहे हैं हमारी और ड्रैगन की स्‍टोरी

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नई दिल्‍ली

भारत के औद्योगिक उत्पादन (IIP) की रफ्तार अप्रैल में धीमी हो गई है। मैन्‍यूफैक्‍चरिंग, माइनिंग और बिजली क्षेत्रों का कमजोर प्रदर्शन इसकी वजह रहा। औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 2.7 फीसदी दर्ज की गई। पिछले साल यह आंकड़ा 5.2 फीसदी था। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने ये आंकड़े जारी किए हैं। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं के उत्पादन में भी गिरावट आई है। वहीं, इसकी तुलना चीन से करें तो अप्रैल 2025 में चीन की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि 6.1 फीसदी रही, जो भारत की तुलना में काफी ज्‍यादा है। यह तब है जब चीन अमेरिका के साथ ट्रेड वॉर में फंसा है। पहले के मुकाबले वह कमजोर है। चीन के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए भारत को अपनी औद्योगिक विकास दर को तेज करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।

अप्रैल में लगा झटका
भारत में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर अप्रैल में घटकर 2.7 फीसदी रह गई। मैन्‍यूफैक्‍चरिंग, खनन और बिजली क्षेत्रों में कमजोर प्रदर्शन के कारण यह गिरावट आई। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) के अनुसार, पिछले महीने औद्योगिक उत्पादन वृद्धि का अनुमान 3 फीसदी था। इसे संशोधित कर 3.9 फीसदी क‍िया गया है। औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के अनुसार, अप्रैल 2024 में औद्योगिक उत्पादन 5.2 फीसदी बढ़ा था। लेकिन, इस साल यह रफ्तार धीमी रही। एनएसओ के आंकड़ों से पता चलता है कि फरवरी में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर 2.7 फीसदी थी।

चीन से मुकाबले के ल‍िए करने होंगे कई काम
वहीं, अप्रैल 2025 में चीन की औद्योगिक उत्पादन वृद्धि 6.1 फीसदी रही है। यह आंकड़ा अर्थशास्त्रियों की 5.5 फीसदी की उम्मीद से बेहतर है। हालांकि, यह मार्च में दर्ज की गई 7.7 फीसदी की ग्रोथ से कम है, जो जून 2021 के बाद औद्योगिक उत्पादन में सबसे मजबूत विस्तार था।

चीन से मुकाबला करने के लिए भारत को कुछ सेक्‍टर्स पर फोकस बढ़ाने की जरूरत है। उसे मैन्‍यूफैक्‍चरिंग सेक्‍टर को बढ़ावा देना होगा। नीतिगत सुधारों के जरिये निवेश आकर्षित करना होगा। बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की जरूरत है। कौशल विकास पर ध्यान देना होगा। माइनिंग सेक्‍टर में सुधार के लिए नई तकनीकों का उपयोग करना होगा। नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की भी जरूरत है। इसके अलावा निर्यात को बढ़ावा देना,घरेलू मांग को मजबूत करना और इनोवेशन पर जोर देना भी उसकी प्र‍ाथमिकता में होना चाहिए।

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